
विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव, खरगोन। जिला जेल में रविवार को अलग नजारा था। यहां सामान्य तौर पर श्रमदान करने वाले बंदी व कैदी आज कतारबद्ध बैठे दिखाई दिए। कई वर्षों बाद इन्होंने कोरे पन्नों पर जिंदगी का ककहरा लिखा। उल्लेखनीय है कि साक्षर भारत अभियान के तहत हुई नवसाक्षर परीक्षा में ये शामिल हुए। इस परीक्षा में 32 विचाराधीन व सजायाफ्ता कैदियों को शामिल होना था। परंतु एक बंदी रिहा होने से रविवार को 31 लोग शामिल हुए। इसमें दो महिला बंदी भी शामिल हुई।
लगभग चार माह लगातार अभ्यास के बाद 50 प्रतिशत से अधिक कैदियों ने बेहतर प्रदर्शन किया। सिर्फ एक बंदी अपना पूरा पर्चा हल नहीं कर सका। शिक्षक हरिसिंह कुशवाह के अनुसार देवेंद्रसिंह और सुरेश देवा ने सबसे बेहतर मेहनत की और सवाल हल किए। इसके अतिरिक्त महिला बंदी कालीबाई व सुनीताबाई ने भी आसानी से पर्चे हल कर लिए। उल्लेखनीय है कि अधिकांश बंदी आजीवन करावास की सजा भुगत रहे हैं। श्री कुशवाह ने बताया कि शिव भगवान रिहा हो जाने से परीक्षा में शामिल नहीं हो सके।
कम रही उपस्थिति
जिले में रविवार को 586 केंद्रों पर नवसाक्षरों की परीक्षा हुई। इसमें करीब 14 हजार परीक्षार्थियों को शामिल होना था। उम्मीद के अनुरूप कई केंद्रों में उपस्थिति कम देखी गई। जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी बी रायक ने बताया कि उन्होंने बलवाड़ी, मोहम्मदपुरा, दयालपुरा, शाहपुरा आदि केंद्रों का निरीक्षण भी किया।
प्रसन्नता की बात है कि कैदी व कैदियों में साक्षरता के प्रति रुझान बढ़ा है। वे प्रयास करेंगे कि पढ़ाई का और बेहतर माहौल दे सके। -जीएल ओरासी, अधीक्षक, जिला जेल, खरगोन