• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • दिवाली पूजन 2026
  • होम
  • मध्यप्रदेश
  • खरगोन

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 23, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जलीकट्टू नहीं, यहां पूजते है मिट्टी के नंदी

निमाड़ में एक ऐसी जगह भी है जहां मिट्टी से निर्मित नंदी (सांड) को न केवल पूजा जाता है

By Edited By:
Publish Date: Mon, 23 Jan 2017 05:11:22 PM (IST)Updated Date: Wed, 25 Jan 2017 12:03:43 PM (IST)
  • को पसंदीदा स्रोत बनाएं preferred source google
जलीकट्टू नहीं, यहां पूजते है मिट्टी के नंदी

खरगोन, अमित भटोरे। तमिलनाडू में जलीकट्टू के बाद बैल-सांड चर्चा में है। वहां पेटा (पशु अधिकार संगठन) और वहां की संस्कृति की चाहे जंग छिड़ी हो परंतु निमाड़ में एक ऐसी जगह भी है जहां मिट्टी से निर्मित नंदी (सांड) को न केवल पूजा जाता है बल्कि एक विशेष धार्मिक स्थल पर उन्हें सजाया जाता है। यह मंदिर भी इन दिनों जलीकट्टू के साथ चर्चा में है।

अखबारों और टेलीविजन की सुखिर्यों जलीकट्टू के साथ इस मंदिर की आस्थाएं देखी जा रही है। उल्लेखनीय है कि जिला मुख्यालय से कोई 9 किमी दूर राजपुरा खेड़ा के प्राचीन रेणुका माता मंदिर में यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इस मंदिर में नंदी पूजने की अपनी मान्यताएं है। यहां तक कि श्रद्धालुओं को भरोसा है कि नंदी को मिट्टी से निर्मित कर यहां अर्पित किया जाता है। यह परंपरा अच्छे स्वास्थ्य की कामनाओं के साथ निभाई जाती है।


वर्षभर चलता है सिलसिला

रेणुका माता मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है। कई समाजों की कुलदेवी होने के साथ ही यहां वर्ष भर श्रद्धालु मन्न्त उतारने का सिलसिला चलता है। मंदिर समिति अध्यक्ष मोतीराम पटेल ने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है। प्रत्येक चतुर्दशी पर श्रद्धालुओं द्वारा विशेष पूजन किया जाता है।

श्रद्धालु नारायण पटेल का कहना है उन्होंने भी मन्न्तें पूरी होने पर अपने हाथों से मिट्टी के नंदी बनाकर मंदिर में चढ़ाए। कई समाजों के श्रद्धालु यहां सामूहिक कुलदेवी पूजन के लिए भी आते है। वर्ष में एक बार रेणुका चतुर्दशी पर यहां एक दिवसीय मेला लगता है। जहां दूरदारज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते है।

वर्षों पहले बंद हो चुकी छकड़ा रेस

हालांकि निमाड़ में भी कुछ वर्ष पहले बैलों और उससे जुड़ी प्रतिस्पर्धाओं पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया जा चुका है। गौरतलब है कि जिले के ही ओझरा से कसरावद तक वर्ष में एक बार छकड़ा रेस आयोजित होती थी। इस रेस में बड़ी संख्या में छोटी बैलगाड़ियों के साथ बैलों को दौड़ाया जाता था।

इधर धार्मिक स्थल सगुर-भगुर देवी परिसर में आयोजित मेले के दौरान वर्ष में एक बार छकड़ा रेस प्रतिस्पर्धा होती थी। इन स्पर्धाओं में न केवल आम नागरिक बल्कि जनप्रतिनिधि भी हिस्सा लेते थे। लगातार शिकायतों और कानूनी प्रक्रियाओं के बीच यह वक्त के साथ बंद हो गई। हालांकि कुछ स्थानों पर इक्का-दुक्का आयोजनों से इंकार नहीं किया जा सकता।

एक क्लिक पर पढ़ें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की लेटेस्ट खबरें। Hindi News पढ़ें। MP News, Chhattisgarh news, आज का राशिफल और आज का मौसम से जुड़ी ताजा जानकारी पढ़ें।