नर्मदा तट पर स्थित है प्राचीन बड़ा गणपति मंदिर
नगर में नरसिंह टेकड़ी के पीछे 306 साल प्राचीन बड़ा गणपति भगवान का मंदिर है। मंदिर में भगवान गणेश की तीन मूर्तियां स्थापित है। यहां श्रद्धालु मोदक का भोग लगाकर मनवांछित फल पाने की कामना करते हैं।
By Nai Dunia News Network
Edited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Fri, 22 Oct 2021 06:41:20 PM (IST)
Updated Date: Fri, 22 Oct 2021 06:41:20 PM (IST)

महेश्वर (नईदुनिया न्यूज)। नगर में नरसिंह टेकड़ी के पीछे 306 साल प्राचीन बड़ा गणपति भगवान का मंदिर है। मंदिर में भगवान गणेश की तीन मूर्तियां स्थापित है। यहां श्रद्धालु मोदक का भोग लगाकर मनवांछित फल पाने की कामना करते हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु लड्डुओं का भोग लगाकर पूजन अर्चन कर भगवान को धन्यवाद देते हैं। मंदिर के पुजारी ऋषि कुमार पुत्र विष्णुपंत जोशी ने बताया कि हमारी लगभग सात पीढ़ियों से भगवान गजानंद की पूजा अर्चना कर सेवा की जा रही है। पहले नर्मदा के किनारे लिंबाडिट मार्ग पर भगवान गणेश का मंदिर नहीं था। यहां पर मात्र चबूतरा था। हमारे परदादा रेवादास पुत्र दयानंद भट्ट ने एक बड़े पत्थर पर हथौड़ी और छैनी के माध्यम से भगवान गणेश की आदमकद मूर्ति का निर्माण किया था। मूर्ति का निर्माण करने के बाद विधि विधान से भगवान की मूर्ति को स्थापित किया गया। प्रतिवर्ष माघ माह की चतुर्थी को यहां मेला लगता है। श्रद्धालु भगवान के चरणों में बेर चढ़ाकर आशीर्वाद लेते हैं।
1997 में हुआ था मंदिर का जीर्णोद्धार
मूर्ति लगभग छह फीट की होकर एकदंताय है। इसलिए इन्हें एक दंत गणेश कहते हैं। मूर्ति पूर्वमुखी स्थापित होकर चार भुजा धारी है। भगवान गणेश की कमर में नाग लिपटा हुआ है। पैरों में खड़ाऊं तथा गले मे रुद्राक्ष की माला व जनेऊ धरण किए हैं। इस मंदिर में बड़े गणपति के साथ दो और मूर्तियां जो अलग-अलग लोगों के द्वारा दान की गई स्थापित है। मुख्य मूर्ति बीच में बता दाएं बाएं स्थापित मूर्तियां भी भगवान गणेश की ही है। 1997 में स्वर्गीय कमलाबाई पत्नी बाबूलाल सोनी (सुंडालिया) महेश्वर की स्मृति में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया।