खरगोन(नईदुनिया प्रतिनिधि)
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष आईपीसी केसरी ने गुरुवार को जिले में निर्माणाधीन दो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने बिंजलवाड़ा उद्वहन सिंचाई परियोजना के तहत हीरापुरा के पास बन रहे पंप हाउस का निरीक्षण किया। कार्य की प्रगति देखने के बाद नाराजगी व्यक्त की। वीसी केसरी ने पंप और निर्माण अवधि में पूर्ण नहीं होने पर निर्माण कंपनी जीवीपीआर हैदराबाद को ब्लैकलिस्टेड करने के निर्देश दिए।
एनवीडीए उपाध्यक्ष ने निरीक्षण की शुरुआत में कसरावद रोड स्थित जामला गांव में बलकवाड़ा उद्वहन सिंचाई परियोजना अंतर्गत बन रहे पंप हाउस पहुंचे। यहां मौजूद अधिकारियों से पंप के निर्माण कार्य को पूर्ण करने की समयावधि और परियोजना में अब तक हुए निर्माण कार्य की जानकारी ली। इस परियोजना के 48 महीने हो जाने बाद कार्य बाकी होने पर गति तेज करने और समयसीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए। इस दौरान कलेक्टर अनुग्रहा पी., सुप्रिडेंट इंजीनियर एसके राउत, नर्मदा घाटी परियोजना के सदस्य अभियांत्रिकी सुकलिकर, बिंजलवाड़ा सिंचाई परियोजना के कार्यपालन यंत्री बीएस मंडलोई सहित परियोजनाओं से जुड़े अन्य तकनीकी अधिकारी मौजूद रहे।
सड़क, भू-अर्जन और बिजली के मामलों के लिए सूची बनाएं
हीरापुर के नजदीक पंप हाउस निर्माण पर ही एनवीडीएम उपाध्यक्ष केसरी ने समीक्षा की। समीक्षा में परियोजना में सड़क, भू-अर्जन और बिजली के विभिन्ना मामलों को लेकर अधीक्षण यंत्री एमएस अजनारे को सूची बनाकर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसके अलावा कलेक्टर स्तर से निराकरण करने के लिए प्रत्येक टीएल बैठक में उपस्थित रहने को कहा। बिंजलवाड़ा परियोजना के कार्य में देरी होने के कारणों की जानकारी लेते हुए कहा कि छीपानेर, बदनावर और पीपरी की परियोजना के काम प्रारंभ है और यहां बंद क्यों? कंपनी के प्रतिनिधि ने फसलें होने के कारण कार्य बंद होना बताया। इस पर एनवीडीएम उपाध्यक्ष केसरी ने ब्लैकलिस्टेड करने व एमडी को भोपाल में बैठक करने के निर्देश दिए। जब तक इस परियोजना का बचे समय में कार्य पूर्ण नहीं होता, तब तक कांट्रेक्टर अन्य परियोजना का कार्य नहीं कर पाएगा।
जिले के लिए महत्वपूर्ण है दोनों परियोजनाएं
जिले के लिए बिंजलवाड़ा और बलकवाड़ा उद्वहन सिंचाई परियोजनाएं बड़ी महत्वपूर्ण है। बिंजलवाड़ा उद्वहन सिंचाई परियोजना से 129 गांव लाभाविंत होंगे। इससे 38 हजार 587 किसानों की 50 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी। इसकी लागत 692.52 करोड़ रुपये है। इस परियोजना का कार्य 2018 में प्रारंभ हुआ था। वर्ष 2021 में पूर्ण होना था लेकिन कार्य अपूर्ण होने से 2023 तक पूर्ण करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। इसी तरह बलकवाड़ा उद्वहन सिंचाई परियोजना से खरगोन के तीन हजार 700 किसानों की नौ हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इस परियोजना से 40 गांव लाभाविंत होंगे। इस परियोजना की कुल लागत 97.36 करोड़ रुपये हैं। इस परियोजना को 51 महीने में पूर्ण होना था।