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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 16, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अब नहरों के पानी का सहारा पर छोटे- बड़े जलाशय सूखे पड़े

सूखे की स्थिति को देखते हुए थांवर बांध परियोजना बीजेगांव डेम से 10 क्यूसेक पानी छोड़ा गया जो अब नहरों के माध्यम से घीरे-धीरे किसानों के खेतों तक पहुंचा...और पढ़ें

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Publish Date: Wed, 16 Sep 2015 11:28:31 PM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2015 11:28:31 PM (IST)
अब नहरों के पानी का सहारा पर छोटे- बड़े जलाशय सूखे पड़े

सूखे की स्थिति को देखते हुए थांवर बांध परियोजना बीजेगांव डेम से 10 क्यूसेक पानी छोड़ा गया जो अब नहरों के माध्यम से घीरे-धीरे किसानों के खेतों तक पहुंचाया जा रहा है। बारिश की बेरुखी से इन दिनों विकासखंड व नगर के किसान मायूस हैं। पानी के अभाव में खेतों में दरारें पड़ गई है और धान के पौधे सूख रहे हैं। ऐसे में हालात सूखे जैसे बन गए हैं। सावन व भादों माह में उम्मीद से कम बारिश से छोटे बड़े जलाश्य खाली पड़े है। जिस कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। सितंबर माह में बारिश का यही दौर चला तो धान उत्पादन में भारी नुकसान हो सकता है।

किसान कर रहे रतजगा

बांध से जैसे ही नहर में पानी छोड़ा गया वैसे ही किसानों ने अपने अपने खेतों में सिंचाई शुरु कर दी लेकिन ऊपरी भागों तकनहीं पहुंच रहे पानी के लिए किसान द्वारा रतजगा किया जा रहा है ताकि कोई पानी को चुरा न ले फिर भी टेल के किसान पानी लाने में असमर्थ हैं।


थांवर परियोजना बांध तीन मीटर खाली पड़ा

जिले की जीवनदायनी भी खाली बीजेगांव मे बने थांवर परियोजना बांध जिससे जिले के किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होता है। वह भी कम बारिश के चलते तीन मीटर खाली है। जिस कारण लगभग 100 गांव के किसान पानी से वंचित हो सकते हैं।

किसानों ने कहा- बारिश नहीं हुई तो हालात बद्तर होंगे

कृषक अर्जुन नरवरे ने बताया कि हमारे खेत ऊपरी भागों में होने के कारण वैसे भी पानी की कमी बनी रहती है। इसी वजह से नहरों से भी पानी नहीं मिल पा रहा है। यदि ऐसे हालात रहे तो पूरी कि पूरी फसल सूख जाएगी। जिससे किसानों के सामने भूखे मरने की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।

गर्मी के कारण फसलें सूख रहीं और लग रहा रोग

क्षेत्र में अधिकांश फसल सूखने की कगार में है। बारिश सत्र के अंतिम समय तक मानसून रुठा हुआ है और आमजन गर्मी से हलाकान है। क्षेत्र में अच्छी बारिश के लिए कई धार्मिक अनुष्ठान और पूजा पाठ किए जा रहे हैं लेकिन सारे प्रयास धरे रह गए। पर्याप्त बारिश के अभाव में क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में धान की फसल सूखने की कगार पर है। कई गांव में खेत सूखने लगे और उनमें दरारें आने से धान के पौधे सूखने लगे है। पानी के अभाव में फसलों में पीला मोजक जैसी बीमारी से फसल खराब होने लगी।

खेतों का पानी किसान नालों में बहा रहे

सिंचाई विभाग के अधिकारी व कर्मचारी ने बताया कि किसान अपना पानी लेने के बाद बचे हुए पानी को नालों के माध्यम में व्यर्थ बहा रहे हैं। फोड़ी गई नहरों को सुधार किया जा रहा है। ताकि टेल के किसानों को पानी मिल सके।

थांवर बांध परियोजना बीजेगांव डेम से 10 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। ताकि किसानों को फसल के लिए पानी मिल सके। हमारे द्वारा पूरा प्रयास किया जा रहा है कि हर किसानों को पानी मिल सके। किसान भी हमारी मदद कर पानी को व्यर्थ नालों में न बहाएं।

-अधार सिंह राजपूत,एसडीओ थांवर परियोजना संभाग नैनपुर