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पत्नी का घरेलू कार्य भी आर्थिक योगदान से कम नहीं, मंदसौर में दंपती की दुर्घटना में मृत्यु पर 55.03 लाख रुपये का अवॉर्ड पारित

न्यायालय पंचम मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण न्यायाधीश मंजू सिंह ने बस दुर्घटना में पति-पत्नी की मृत्यु से जुड़े दो प्रकरणों में निर्णय देते हुए कुल 55 लाख...और पढ़ें

By Alok SharmaEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sun, 13 Sep 2026 03:51:21 PM (IST)Updated Date: Sun, 13 Sep 2026 03:51:21 PM (IST)
पत्नी का घरेलू कार्य भी आर्थिक योगदान से कम नहीं, मंदसौर में दंपती की दुर्घटना में मृत्यु पर 55.03 लाख रुपये का अवॉर्ड पारित
दंपती की दुर्घटना में मृत्यु पर 55.03 लाख रुपये का अवॉर्ड पारित। (एआई इमेज)

HighLights

  1. गृहिणी के घरेलू कार्य को भी आर्थिक मूल्य प्रदान किया
  2. न्यायालय ने पेंशन को परिवार की नियमित एवं पक्की आय का स्रोत माना
  3. प्रयागराज कुंभ से दर्शन कर बस से लौट रहे यात्रियों की बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी

नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर। न्यायालय पंचम मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण न्यायाधीश मंजू सिंह ने बस दुर्घटना में पति-पत्नी की मृत्यु से जुड़े दो प्रकरणों में निर्णय देते हुए कुल 55 लाख 3 हजार 856 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि का अवॉर्ड पारित किया है। न्यायालय ने पेंशन को परिवार की नियमित एवं पक्की आय का स्रोत माना। वहीं गृहिणी के घरेलू कार्य को भी आर्थिक मूल्य प्रदान करते हुए उसकी भूमिका को मान्यता दी।

अभियोजन के अनुसार प्रयागराज कुंभ से दर्शन कर बस से लौट रहे यात्रियों की बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसमें 64 वर्षीय किशोरीलाल राठौर तथा उनकी पत्नी कैलाशीबाई दोनों निवासी मंदसौर की मृत्यु हो गई थी। मृतक के दो पुत्र एवं पुत्री की ओर से न्यायालय में क्लेम आवेदन प्रस्तुत किए गए थे।


मामले में महत्वपूर्ण तथ्य यह था कि मृतक किशोरीलाल सेवानिवृत्त कर्मचारी थे और उन्हें पेंशन मिलती था। उनकी मृत्यु के बाद पेंशन पात्रता भी समाप्त हो चुकी थी। अधिवक्ता संजय राठौर द्वारा तर्क दिया गया कि पेंशन पिछली सर्विस से मिलने वाली नियमित एवं पक्की आय है जो मृत व्यक्ति से जुड़े आर्थिक लाभ का जरुरी हिस्सा है और इसका लाभ केवल पत्नी तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति से भी जुड़ा होता है। न्यायालय ने इन तर्कों से सहमत होते हुए किशोरीलाल की मृत्यु पर 29,47,856 रुपये का अवार्ड पारित किया।

गृहिणी के घरेलू कार्य को भी माना आर्थिक योगदान

इसी दुर्घटना में मृतक की पत्नी 60 वर्षीय कैलाशीबाई जो गृहिणी थी के संबंध में भी न्यायालय ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। न्यायालय ने माना कि परिवार के प्रति गृहिणी द्वारा किए जाने वाले घरेलू कार्य की भूमिका अदृश्य होने के बावजूद अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। अब समय आ गया है कि गृहिणी के घरेलू कार्य को वास्तविक रूप में मान्यता दी जाए।

कैलाशीबाई की आय 30 हजार रुपये प्रतिमाह मानते हुए न्यायालय ने उनके निधन पर 25,56,000 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि का अवॉर्ड पारित किया। साथ ही अवॉर्ड राशि पर दावा आवेदन की तारीख से 6 प्रश वार्षिक ब्याज तथा निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर 9 प्रश की दर से ब्याज देने का आदेश भी पारित किया गया। दोनों प्रकरणों में न्यायालय द्वारा पारित कुल अवॉर्ड 55,03,856 रुपये है।प्रकरण में पैरवी अधिवक्ता नंदलाल राठौर, संजय राठौर एवं गोवर्धनलाल राठौर ने की।

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