
किशोर ग्वाला, नईदुनिया, मंदसौर। जिले की सड़कों पर निराश्रित गोवंशों की संख्या कम नहीं हो रही है, जबकि जिले में शासन द्वारा 74 नई गोशालाओं का निर्माण किया और संचालन भी शुरू कर दिया है। इसके बावजूद अभी भी 10 हजार से अधिक गोवंशी सड़कों पर ही आसरे की तलाश में घूम रहे हैं। इसके कारण कई बार हादसे हो रहे हैं, गोवंश भी घायल हो रहे हैं। सीतामऊ के समीप मोरखेड़ा में प्रस्तावित गो-अभयारण्य निर्माण के लिए भी अभी प्रक्रिया की गति बढ़ी नहीं हैं।
जिले में सड़कों पर घूमने वाले गोवंशी के लिए सरकार ने गोशालाएं खोली हैं। इनके निर्माण में करोड़ों रुपये भी खर्च किए गए हैं। गोशालाओं में गोपालन शुरू हो गया। बावजूद अभी भी हजारों गोवंशी सड़कों पर घूम रहे हैं। निराश्रित गोवंशी किसानों और आमजन के परेशानी का कारण बने हुए हैं। ये खेतों में फसलों को बर्बाद करते हैं तो शहरी क्षेत्र में भी यातायात सहित अन्य व्यवस्थाओं में परेशानी होती है। कई बार गोवंशी भी दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं।
जिलेभर में कुल सात लाख मवेशी हैं। इनमें से 10 हजार से अधिक निराश्रित गोवंशी हैं, जो सड़कों पर घूम रहे हैं। निराश्रित गोवंशी को सहारा देने के लिए राज्य शासन द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर ग्राम पंचायतों में गोशालाएं बनाई जा रही हैं। दो चरणों में जिले में 74 गोशालाएं बनकर तैयार हो चुकी हैं। इनमें से 72 में गोपालन चल रहा हैं। ग्राम तलाब पिपलिया व रणायरा गोशाला की अभी पंजीकरण की कार्रवाई चल रही हैं, जल्द ही इन दोनों गोशालाओं का भी संचालन प्रारंभ हो जाएगा।
74 गोशालाएं बनने के बाद भी सड़कों पर निराश्रित गोवंशी की झुंड कम नहीं हो रहे हैं। जिला मुख्यालय की सड़कों पर बड़ी संख्या में गोवंशी मुख्य मार्गों की सड़कों, मोहल्लों, कालोनियों में भ्रमण कर रहे हैं। वहीं गांवों में घूमने वाली निराश्रित गोवंशी किसानों की फसलों को चौपट करती हैं। जिससे किसान भी परेशान रहते हैं। कई बार गोवंशी दुर्घटनाओं का शिकार हो रही हैं। मुख्य मार्गों से लेकर कालोनियों की सड़क पर विचरण कर रहा गोवंशी आमजन के लिए भी मुसीबत बना हुआ हैं। स्थिति तब और गंभीर हो जाती हैं जब दो गौवंशी सड़क पर लड़ते हैं। सड़क पर गोवंशी के विचरण से सब्जी मंडी, सम्राट मार्केट, सदर बाजार, नई आबादी सहित शहर के सभी क्षेत्रों में परेशानी हो रही हैं।
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने हर पंचायत में गोशाला खोलने का वादा किया था, सत्ता में आते ही सरकार ने इस वादे को निभाया। कांग्रेस के शासन में मंदसौर जिले में पहले चरण में 36 गोशालाओं का निर्माण हुआ। इसके बाद सत्ता परिवर्तन हुआ लेकिन गोशालाओं का निर्माण जारी रहा। दूसरे चरण में राज्य शासन ने जिले की पंचायतों में 38 गोशालाएं बनाने का कार्य शुरू किया। अब तक दोनों चरणों की सभी 74 गोशालाओं का निर्माण पूर्ण हो चुका है। प्रत्येक गोशाला में 27.71 लाख की लागत से आवश्यक कार्य हुए हैं। इनमें चरागाह भी शामिल हैं।
जिले की 23 गोशालाओं में 8500 गोवंशी और नवीन 72 गोशालाओं में करीब साढ़े सात हजार गोवंशी का पालन हो रहा है। पशुपालन विभाग के अनुसार गरोठ व भानपुरा क्षेत्र में अधिक संख्या में निराश्रित पशु हैं। एक साल पहले हुए सर्वे के अनुसार जिले में सभी प्रकार के पशुओं की संख्या करीब सात लाख है। अकेले मंदसौर शहर में सड़कों पर करीब एक हजार से अधिक गौवंशी सड़कों पर घूमते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी निराश्रित पशु खेतों में नुकसान करते हैं।
जिले में मनरेगा के तहत 74 गोशालाएं बनकर तैयार हो चुकी हैं। दोनों चरणों में तैयार हुई गोशालाओं में से 72 में गोपालन शुरू हो गया है। दो गोशालाओं का संचालन भी जल्द शुरू होगा। - प्रदीप चौहान, मनरेगा अधिकारी, मंदसौर