• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • शारदीय नवरात्रि
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • मंदसौर

मंदसौर के गांव में बुराई पर विजय का प्रतीक बनी स्वच्छता, दशहरे पर सबसे साफ-सुथरे घर को किया जाता है पुरस्कृत

बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व दशहरा देशभर में रावण दहन के साथ मनाया जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के धमनार गांव में इस पर्व का एक अनूठा ...और पढ़ें

By Alok SharmaEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Tue, 20 Oct 2026 07:46:15 AM (IST)Updated Date: Tue, 20 Oct 2026 07:51:15 AM (IST)
मंदसौर के गांव में बुराई पर विजय का प्रतीक बनी स्वच्छता, दशहरे पर सबसे साफ-सुथरे घर को किया जाता है पुरस्कृत
ग्राम धमनार में इस तरह बनती है हर घर के बाहर रंगोली। -फाइल फोटो

HighLights

  1. मंदसौर जिले के धमनार गांव में इस पर्व का एक अनूठा संदेश भी है
  2. गांव में 1968 से दशहरे पर हो रही घरों की सफाई की प्रतिस्पर्धा
  3. रावण के पुतले के साथ गंदगी की बुराई को मिटाने का संकल्प भी दोहराया जाता है

आलोक शर्मा, नईदुनिया, मंदसौर : बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व दशहरा देशभर में रावण दहन के साथ मनाया जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के धमनार गांव में इस पर्व का एक अनूठा संदेश भी है। यहां रावण के पुतले के साथ गंदगी की बुराई को मिटाने का संकल्प भी दोहराया जाता है।

दशहरे पर गांव के घर-आंगन की स्वच्छता परखी जाती है। हर घर के बाहर रंगोली सजाई जाती है। जो घर जितना साफ-सुथरा होता है, उसे पुरस्कृत किया जाता है। शाम को रावण दहन के समय स्वच्छता की इस प्रतिस्पर्धा में प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार दिए जाते हैं। स्वच्छता का यह उत्सव गांव में पिछले 58 वर्षों से परंपरा के रूप में जीवित है।


देश में स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई, लेकिन धमनार ने इससे कई दशक पहले ही स्वच्छता को सामाजिक संस्कार बनाने की पहल कर दी थी। वर्ष 1965 में किसान नेता हीरालाल धाकड़ धमनार के सरपंच बने थे। उस समय गांवों में प्लेग महामारी फैल रही थी।

गंदगी भी बीमारियों के फैलने का एक कारण बनती हैं

स्वास्थ्यकर्मियों ने उन्हें बताया कि गंदगी भी ऐसी बीमारियों के फैलने का एक कारण बनती है। इस बात ने धाकड़ को गांव में सफाई के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दशहरा पर स्वच्छता की प्रतिस्पर्धा शुरू कराई। इस तरह परंपरा की शुरुआत वर्ष 1968 में हुई थी। शुरुआत में घर के सामने गंदगी मिलने पर सवा रुपये का दंड लगाया जाता था। समय के साथ यह राशि बढ़कर 180 रुपये हो गई। दंड का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि लोगों में सफाई के प्रति जिम्मेदारी जगाना था।

डोंडी पिटवाकर दिया जाता है संदेश

आज धमनार की आबादी लगभग 8,000 है। गांव में 700 से 800 घर हैं। उपसरपंच लक्ष्मीनारायण मेहता बताते हैं कि अब स्वच्छता गांव का उत्सव बन चुकी है। वर्ष 1968 में पहली बार दशहरा से एक दिन पहले डोडी पिटवाकर ग्रामीणों को इस आयोजन की सूचना दी गई थी। आज भी यही परंपरा निभाई जाती है।

स्वच्छता की पहल को मिला सम्मान

धमनार की इस परंपरा की चर्चा वर्ष 1985 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा तक पहुंची थी। उस समय गांव को आदर्श ग्राम पंचायत का खिताब दिया गया था। साथ ही जिला मुख्यालय से धमनार तक करीब 30 किलोमीटर लंबी सड़क भी स्वीकृत की गई थी।

यह हमारे लिए गर्व की बात है

गांव की परंपरा अनुकरणीय है। यह हमारे लिए गर्व की बात है। - दिव्यांक सिंह, कलेक्टर

यह भी पढ़ें- इंदौर में दशहरे से पहले ही जला रावण, इंद्रपुरी कॉलोनी में शॉर्ट सर्किट से पुतले में लगी आग, राख हुआ ढांचा