
नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर। सीतामऊ-चौमहला मार्ग पर ग्राम धतूरिया के पास चंबल नदी पर बहे पुल को सात साल बाद भी नहीं बनाया जा सका है। इसके चलते दोनों तरफ से आवागमन कर रहे लोग स्टीमर का सहारा ले रहे हैं। सीमित स्टीमर होने से क्षमता से 4 गुना तक लोगों को बैठाकर चंबल पार करा रहे हैं। वहीं लोगों के साथ ही उनके दोपहिया वाहन भी स्टीमर में ही भरे जा रहे हैं।
शनिवार को भी धतूरिया घाट का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से बहुप्रसारित हो रहा था। जिसमें एक छोटे से स्टीमर में क्षमता से कई गुना अधिक यात्री भरे हुए हैं। मोटरसाइकिलें भी उसी में लादी हुई हैं। स्टीमर पानी में आधा डूबता हुआ चल रहा है। जरा सा संतुलन बिगड़ने पर बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार सीतामऊ तहसील के धतूरिया और चंबल नदी पार राजस्थान के सीमावर्ती गांवों को जोड़ने के लिए चंबल नदी पर बना पुल 2019 में बह गया था। इसके बाद से ही यहां पुल नहीं बना है। इसके चलते सात साल से लोग लकड़ी और टीन के जुगाड़ से बने स्टीमर से आर-पार आ जा रहे हैं। एक स्टीमर पर अधिकतम 8 से 10 लोगों की क्षमता है। लेकिन 25 से 30 लोग और उनकी मोटरसाइकिले भी उसी पर लदी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रति व्यक्ति 30 से 50 रुपये और बाइक के 100 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। ज्यादा कमाई के लालच में नाव संचालक जानबूझकर ओवरलोड कर रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि नाव में न तो लाइफ जैकेट है, न ही कोई सुरक्षा उपकरण। अधिकतर यात्रियों को तैरना भी नहीं आता। यह पहला मामला नहीं है। दो सालों में चंबल में इसी तरह के ओवरलोड के कारण 2 से 3 हादसे हो चुके हैं, जिसमें कई लोगों की जान पर बन आई थी।