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चंबल में मौत का सफर! 7 साल से पुल नहीं बना, ओवरलोड स्टीमर में बाइक समेत नदी पार कर रहे ग्रामीण

मंदसौर के धतूरिया में 2019 में बहा चंबल पुल सात साल बाद भी नहीं बना। स्टीमर में क्षमता से चार गुना यात्री और वाहन लादकर जोखिमभरा आवागमन जारी है।

By Alok SharmaEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Sun, 27 Sep 2026 01:32:56 PM (IST)Updated Date: Sun, 27 Sep 2026 01:32:56 PM (IST)
चंबल में मौत का सफर! 7 साल से पुल नहीं बना, ओवरलोड स्टीमर में बाइक समेत नदी पार कर रहे ग्रामीण
चंबल में मौत का सफर! (नईदुनिया)

HighLights

  1. 2019 में बहा चंबल पुल सात साल बाद नहीं बना।
  2. ग्रामीण स्टीमर से चंबल नदी पार करने को मजबूर हैं।
  3. स्टीमर में क्षमता से चार गुना यात्री बैठाए जा रहे।

नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर। सीतामऊ-चौमहला मार्ग पर ग्राम धतूरिया के पास चंबल नदी पर बहे पुल को सात साल बाद भी नहीं बनाया जा सका है। इसके चलते दोनों तरफ से आवागमन कर रहे लोग स्टीमर का सहारा ले रहे हैं। सीमित स्टीमर होने से क्षमता से 4 गुना तक लोगों को बैठाकर चंबल पार करा रहे हैं। वहीं लोगों के साथ ही उनके दोपहिया वाहन भी स्टीमर में ही भरे जा रहे हैं।

आधा डूबता स्टीमर

शनिवार को भी धतूरिया घाट का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से बहुप्रसारित हो रहा था। जिसमें एक छोटे से स्टीमर में क्षमता से कई गुना अधिक यात्री भरे हुए हैं। मोटरसाइकिलें भी उसी में लादी हुई हैं। स्टीमर पानी में आधा डूबता हुआ चल रहा है। जरा सा संतुलन बिगड़ने पर बड़ा हादसा हो सकता है।


2019 में बहा था पुल, सात साल से चल रहा जुगाड़

स्थानीय लोगों के अनुसार सीतामऊ तहसील के धतूरिया और चंबल नदी पार राजस्थान के सीमावर्ती गांवों को जोड़ने के लिए चंबल नदी पर बना पुल 2019 में बह गया था। इसके बाद से ही यहां पुल नहीं बना है। इसके चलते सात साल से लोग लकड़ी और टीन के जुगाड़ से बने स्टीमर से आर-पार आ जा रहे हैं। एक स्टीमर पर अधिकतम 8 से 10 लोगों की क्षमता है। लेकिन 25 से 30 लोग और उनकी मोटरसाइकिले भी उसी पर लदी है।

मनमाना किराया और सुरक्षा उपकरणों का पूरी तरह अभाव

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रति व्यक्ति 30 से 50 रुपये और बाइक के 100 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। ज्यादा कमाई के लालच में नाव संचालक जानबूझकर ओवरलोड कर रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि नाव में न तो लाइफ जैकेट है, न ही कोई सुरक्षा उपकरण। अधिकतर यात्रियों को तैरना भी नहीं आता। यह पहला मामला नहीं है। दो सालों में चंबल में इसी तरह के ओवरलोड के कारण 2 से 3 हादसे हो चुके हैं, जिसमें कई लोगों की जान पर बन आई थी।

प्रशासन की लापरवाही और ग्रामीणों की मजबूरी

  • फिर भी जिला प्रशासन ने केवल औपचारिकता के लिए घाटों का निरीक्षण किया था न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की। न घाट पर कोई चेतावनी बोर्ड लगा है, न कोई सरकारी कर्मचारी तैनात है। वीडियो बहुप्रसारित होने के बाद लोगों में आक्रोश भी दिख रहा है।
  • उनका कहना है कि 70 किमी लंबा चक्कर काटने के बजाय स्टीमर से नदी पार करना हमारी मजबूरी है। लोगों की मांग है कि तत्काल घाट पर सुरक्षा व्यवस्था की जाए, ओवरलोडिंग पर रोक लगे और चंबल पर पक्के पुल का निर्माण जल्द शुरु किया जाए। ताकि ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार नहीं करना पड़े।