
नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर : जिले के राजस्थान से लगे सीमावर्ती गांवों में सिंथेटिक (नकली) दूध का जानलेवा कारोबार तेजी से पैर पसार रहा है। आमजन के स्वास्थ्य से हो रहे इस खिलवाड़ को रोकने की असली जिम्मेदारी जिला प्रशासन और खाद्य एवं सुरक्षा विभाग की थी, लेकिन उनकी घोर सुस्ती के बीच पुलिस ने मोर्चा संभाला है।
पुलिस ने पिछले छह महीनों में बड़ी कार्रवाई करते हुए सिंथेटिक दूध की चार बड़ी फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया है। इन कार्रवाइयों में 50 हजार लीटर से अधिक नकली दूध तैयार करने की सामग्री जब्त की जा चुकी है। इसी कड़ी में डूंगरखेड़ी और खेजड़िया भूप मामले में फरार मुख्य आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता पाई है।
एसपी विनोद कुमार मीना के निर्देशन में शामगढ़ थाना प्रभारी कपिल सौराष्ट्रीय और उनकी टीम ने बुधवार को ग्राम डूंगरखेड़ी में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस ने कृष्णपालसिंह और शिवराजसिंह के घर के बाड़े में चल रही नकली दूध की फैक्ट्री पर छापा मारा।
मौके से मिल्क पाउडर के 6 कट्टे (25-25 किलो), वनस्पति तेल के 5 डिब्बे, फिल्टर मिक्सर इलेक्ट्रॉनिक मशीन, गैस भट्टी, डीप फ्रीजर, दूध टेस्ट करने की 2 इलेक्ट्रॉनिक मशीनें और सबसे चौंकाने वाली बात—यूरिया के चार कट्टे व 40 लीटर लिक्विड सोप (साबुन का घोल) बरामद किया। पुलिस ने आरोपी दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 272, 274, 275 और 110 के तहत गंभीर आपराधिक मामला दर्ज किया है।
इससे पहले 27 सितंबर को सुवासरा पुलिस ने ग्राम खेजड़िया भूप में एक बाड़े में चल रही सिंथेटिक दूध और नकली घी की फैक्ट्री पकड़ी थी। उस समय आरोपी मौके से भागने में सफल रहे थे। पुलिस ने अब तत्परता दिखाते हुए फरार आरोपी पीरुसिंह और रामसिंह को गिरफ्तार कर लिया है।
इनके ठिकाने से पुलिस ने 85 कट्टे मिल्क पाउडर, पाम ऑयल, यूरिया के 6 कट्टे, तैयार नकली घी और भारी मात्रा में मशीनें जब्त की थीं।पूछताछ में यह बात सामने आई है कि यह जहरीला सिंथेटिक दूध न केवल स्थानीय स्तर पर खपाया जा रहा था, बल्कि राजस्थान के भवानीमंडी, कोटा और झालावाड़ तक सप्लाई किया जा रहा था।
चचावदा चकोटिया (गरोठ): यहां लगभग 700 लीटर तैयार नकली दूध और 25 हजार लीटर दूध बनाने की सामग्री मिली थी। इस फैक्ट्री को उत्तर प्रदेश के आगरा का रहने वाला मनीष नाम का युवक चला रहा था, जो खुद को केमिस्ट बताता है। उसने स्थानीय निवासी दिनेश गुर्जर का बाड़ा किराये पर ले रखा था।
इस पूरे घटनाक्रम ने जिला प्रशासन और खाद्य एवं सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिलावटखोरों पर नकेल कसने का जो काम खाद्य विभाग को रूटीन चेकिंग के जरिए करना चाहिए था, वह काम पुलिस को मुखबिरों की सूचना पर करना पड़ रहा है। पुलिस अब इस पूरे रैकेट की सप्लाई चेन और इससे जुड़े अन्य सफेदपोशों की तलाश में जुटी है ताकि इस जानलेवा नेटवर्क को जड़ से उखाड़ा जा सके।
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