
नईदुनिया प्रतिनिधि, महू-इंदौर : प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए करोड़ों रुपये का बजट तैयार करती है, लेकिन खिलाड़ियों तक फिर भी सुविधाएं नहीं पहुंच पा रहीं। शिक्षा विभाग द्वारा इंदौर में राज्य स्तरीय टेबल टेनिस स्पर्धा आयोजित की जा रही है, लेकिन खिलाड़ियों के लिए यह स्पर्धा कम और यातना ज्यादा है।
शिक्षा विभाग द्वारा 70वीं राज्य स्तरीय शालेय टेबल टेनिस स्पर्धा की मेजबानी इंदौर को सौंपी गई है। चार दिवसीय स्पर्धा का समापन 25 सितंबर को होगा। स्पर्धा में शिक्षा विभाग के 10 संभागों के 400 के करीब खिलाड़ी और अधिकारी शामिल हैं। यह स्पर्धा अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 आयु वर्ग में आयोजित की जा रही है।
आयोजन इंदौर के एक निजी स्कूल में किया जा रहा है, लेकिन बाहर से आने वाले खिलाड़ियों को महू की धर्मशाला में ठहराया गया है। आने-जाने में खिलाड़ियों के घंटों खराब होते हैं, जिससे उनका प्रदर्शन भी प्रभावित हो रहा है। फिर धर्मशाला की गंदगी से खिलाड़ी परेशान हैं।
एक कमरे में सामान्यत: दो लोग ठहरते हैं, लेकिन यहां बैरख की तरह आठ से 10 बच्चों के लिए एक कमरा है। कई जगह पर गुटखे की पीक के निशान बने हैं। संपन्न परिवारों ने अपने बच्चों को धर्मशाला से निकालकर निजी खर्च पर होटलों में ठहरा दिया है। जो गरीब परिवारों के हैं वे इसी हाल में रहने और खेलने को बाध्य हैं।
शिक्षा विभाग द्वारा बालिकाओं के ठहरने की व्यवस्था महू की गोपाल मंदिर धर्मशाला में की है। वहीं बालकों को मारवाड़ी धर्मशाला में ठहराया गया है। गोपाल मंदिर धर्मशाला में बालिकाओं को 10 कमरे दिए गए हैं। हर एक कमरा एक संभाग के खिलाड़ियों को दिया गया है।
इस एक कमरे में 8-8 बालिकाएं रूकी हैं। बालिकाओं को सोने के लिए साफ बिस्तर व चादर तक नहीं दिए गए। वहीं बाथरूम तक इतने गंदे हैं कि बाहर तक बदबू फैली हुई है। बाथरूम का पानी भी बहकर बाहर आ रहा है। इतनी गंदगी के बीच बालिकाओं को इंफेक्शन होने और बीमार पड़ने का खतरा भी बढ़ गया है। इसके कारण कई बालिकाओं ने साथ मिलकर होटल का कमरा भी बुक कर लिया है।
वहीं बालकों जहां ठहराया गया उसकी स्थिति भी इसी तरह है। एक कमरे में 10-10 बालकों को ठहराया हुआ है। कमरे के कोनों में गुटखे के पीक के निशान बने हुए हैं। फिलहाल गर्मी व उमस बढ़ चुकी है परंतु उससे बचाव के लिए कमरों में सही पंखे भी नहीं हैं। वहीं गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया।
रात में बच्चे मच्छरों के बचाव के लिए अगरबत्ती व अन्य साधन भी ढूंढने लगे। इसके अलावा खाने को लेकर भी शिकायत सामने आई है। बच्चों ने बताया कि खाना बिल्कुल ठीक नहीं है। थकान होने के कारण आधा पेट खाना खाकर कमरे में लौट आए हैं। व्यवस्था सही नहीं होने के कारण भोपाल संभाग के आधे से अधिक खिलाड़ी धर्मशाला छोड़कर होटल चले गए हैं।
खिलाड़ियों के साथ आए उनके शिक्षकों ने बताया कि धर्मशाला से टूर्नामेंट स्थल 12 किमी की दूरी पर है। जिसके कारण दो घंटे का समय बच्चों के आने-जाने में ही पूरा हो रहा है। पहले दिन स्कूल तक पहुंचने के लिए बस कहां से मिलेगी यह भी पता नहीं चला। जिसके कारण काफी दूर तक पैदल चलना पड़ा।
सुबह 9 बजे टूर्नामेंट शुरू होता है तो बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए सुबह 6 से 7 बजे उठना पड़ रहा है। इसके बाद बाथरूम के लिए लाइन लगाना पड़ती है। तैयार होने के बाद स्कूल पहुंचते हैं तो बच्चों के पास टूर्नामेंट मैच के पहले बच्चों को प्रैक्टिस करने का समय भी नहीं मिल रहा है। जिससे उनकी परफार्मेंस पर भी असर पड़ रहा है।
धर्मशाला के कमरे काफी बड़े हैं। सभी के लिए पलंग हैं। लेट-बाथ अटैच है। पहले तो सरकारी स्कूलों में ठहराया जाता था, लेकिन हमने प्रयास किया कि बेहतर सुविधाएं मिलें। इसके बावजूद कुछ बच्चों को धर्मशाला की सुविधा ठीक नहीं लगी तो वे होटल में रहने चले गए। खिलाड़ियों के भोजन की व्यवस्था सभी संभागीय टीमें स्वयं के स्तर पर करती हैं। -हेमंत वर्मा, सहायक संचालक
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