चंबल नदी के रिठौरा घाट पर बना 45 मीटर ऊंचा एआई टावर, अवैध रेत खनन रोकेने के लिए इससे निगरानी
रिठौरा घाट पर बने टावर पर करीब सवा करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके लिए विशेष साफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है, जो घाटों की सामान्य स्थिति में बदलाव पहचान सकेगा।
Publish Date: Mon, 26 Oct 2026 02:34:47 PM (IST)Updated Date: Mon, 26 Oct 2026 02:41:20 PM (IST)
HighLights
- पांच वर्ग किमी क्षेत्र पर रखेगा नजर
- हाईवे पर लगाए गए दो एआई ई-चेकगेट
- फिलहाल चल रहा है 15 दिन का ट्रायल
हरिओम गौड़. नईदुनिया, मुरैना। चंबल नदी में रेत के अवैध उत्खनन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बावजूद पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है। रात में घाटों पर उत्खनन और सड़कों पर रेत से भरे वाहनों की आवाजाही जारी है। ऐसे में जिला प्रशासन ने रेत माफिया पर निगरानी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) तकनीक का सहारा लिया है। रिठौरा घाट पर 45 मीटर ऊंचा एआइ टावर बनकर तैयार है, जो पांच वर्ग किमी क्षेत्र में गतिविधियों पर नजर रखेगा।
वहीं, हाईवे पर रेत और पत्थरों के अवैध परिवहन की निगरानी के लिए दो एआइ ई-चेकगेट लगाए गए हैं। फिलहाल तीनों का 15 दिन का ट्रायल चल रहा है।
गड्ढों और संदिग्ध वाहनों पर नजर
रिठौरा घाट पर बने टावर पर करीब सवा करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके लिए विशेष साफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है, जो घाटों की सामान्य स्थिति में बदलाव पहचान सकेगा। गड्ढे बनने या रेत के टापू की स्थिति बदलने पर अलर्ट जारी किया जा सकेगा। उत्खनन और परिवहन में इस्तेमाल होने वाले जेसीबी, हाइड्रा और ट्रैक्टर-ट्राली जैसे वाहनों की विशेषताएं भी साफ्टवेयर में दर्ज की जाएंगी।
सेंसर और सीसीटीवी कैमरों की मदद से संदिग्ध गतिविधियों की फोटो और वीडियो जुटाकर कार्रवाई के लिए साक्ष्य उपलब्ध कराए जाएंगे। टावर को चंबल घड़ियाल अभयारण्य के डीएफओ कार्यालय और पुलिस कंट्रोल रूम से जोड़ा जा रहा है। ट्रायल के दौरान दिन और रात में अलग-अलग समय पर वाहनों और अन्य गतिविधियों के जरिए तकनीक की जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, सूचनाएं कंट्रोल रूम तक पहुंचने लगी हैं। बीच में सर्वर संबंधी तकनीकी समस्या आई थी, जिसे दुरुस्त कर दिया गया है।
हाईवे पर आरएफ तकनीक से पहचान
नेशनल हाईवे-43 पर धौलपुर रोड स्थित अल्लाबेली चौकी पर लगाया गया ई-चेकगेट राजघाट, बरवासिन और आसपास के घाटों से होने वाले रेत परिवहन पर नजर रखेगा। दूसरा चेकगेट बानमोर में लगाया गया है, जहां रेत के साथ पत्थरों के अवैध परिवहन की निगरानी होगी। रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) तकनीक से वैध परिवहन वाले वाहनों की पहचान की जाएगी। पहचान पत्र नहीं मिलने पर संदिग्ध वाहनों की फोटो-वीडियो लेकर जानकारी कंट्रोल रूम तक पहुंचाई जाएगी।
रात में निगरानी होगी आसान
डीएफओ एससी बघेल के अनुसार, ट्रायल के दौरान एआइ टावर और ई-चेकगेट से सूचनाएं मिलने लगी हैं। रात में अवैध उत्खनन और परिवहन की निगरानी में कर्मचारियों को जोखिम रहता है। नई व्यवस्था से संदिग्ध गतिविधियों और वाहनों की पहचान कर कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।