अब नौकरी में भी काम आएगी APAAR ID: नियोक्ता एक क्लिक पर जांच सकेंगे डिग्री और मार्कशीट, शिक्षा मंत्रालय ने बदली गोपनीयता नीति
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्पष्ट है कि छात्र-छात्राओं का निजी डेटा रखने के लिए अपार थर्ड पार्टी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स का इस्तेमाल कर सकता है। डेटा...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 08 Oct 2026 06:39:41 PM (IST)Updated Date: Thu, 08 Oct 2026 06:40:44 PM (IST)
HighLights
- छात्र की मंजूरी से ही दिखेगा रिकॉर्ड
- फर्जी डिग्री और कागजी झंझट से मिलेगी राहत
- 'वन नेशन वन स्टूडेंट' नीति से जुड़ेगा डेटा
नईदुनिया प्रतिनिधि, मुरैना। छात्र-छात्राओं को जारी होने वाली अपार आईडी अब पढ़ाई के बाद नौकरी में भी काम आएगी। शिक्षा मंत्रालय ने हाल में ही निजता नीति अपडेट की है। अब एकेडमिक ब्योरा शैक्षणिक संस्थानों के अलावा नियोक्ता जैसी अधिकृत थर्ड पार्टी के साथ भी शेयर हो सकेगा। यानी नियोक्ता अपार के डेटा से ही छात्र की डिग्री-मार्कशीट इत्यादि जांच सकेगा।
छात्र आवेदन में अपार आईडी और अन्य जानकारी देगा
अपार में मार्कशीट ग्रेड शीट, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और अन्य एकेडमिक उपलब्धियां स्टोर रहती हैं। नीति में स्पष्ट है कि छात्र-छात्राओं का निजी डेटा रखने के लिए अपार थर्ड पार्टी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स का इस्तेमाल कर सकता है। डेटा उपलब्धता, रिकवरी व सेवा की निरंतरता के लिए डेटा ट्रांसफर किया जा सकेगा। छात्र आवेदन में अपार आईडी और अन्य जानकारी देगा। हालांकि, आईडी मिलते ही अकादमिक रिकार्ड नहीं दिखेगा। सत्यापन छात्र की सहमति से ही हो पाएगा। नियोक्ता को वेरिफायर के रूप में पंजीकरण कराना होगा।
फिर वह छात्र के किसी खास दस्तावेज के सत्यापन का अनुरोध भेजेगा। छात्र के पास इसकी सूचना जाएगी। वह ओटीपी या ई-साइन से मंजूरी देगा। इसके बाद नियोक्ता रिकार्ड देख सकेगा। नियोक्ता सामान्य यूजर की तरह अपार के रिकार्ड नहीं देख सकता। छात्र की मंजूरी के बिना प्रमाणपत्र नहीं खुलेंगे। छात्र सत्यापन रिक्वेस्ट को मंजूर या स्वीकार कर सकता है।
इसका फायदा क्या होगा
- जिला परियोजना समन्वयक हरीश तिवारी के मुताबिक, अपार आइडी छात्रों के लिए एक 12 अंकों की यूनिक डिजिटल पहचान है, जिसे वन नेशन वन स्टूडेंट आइडी भी कहा जाता है।
- इसके भविष्यवर्ती फायदों में पहली कक्षा से लेकर डाक्टर तक की पूरी पढ़ाई का डेटा, मार्कशीट, डिग्री और सर्टिफिकेट एक ही जगह डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेंगे।
- कागजी दस्तावेजों के खोने या फटने का डर खत्म हो जाएगा क्योंकि यह डिजिलाकर से जुड़ी होगी।
- ट्रांसफर या दाखिला लेते समय बार-बार कागजात या टीसी (टीसी/माइग्रेशन) ले जाने की झंझट नहीं होगी, नया संस्थान एक क्लिक पर डेटा देख सकेगा।
छात्र बिना क्रेडिट खोए एक संस्थान से दूसरे संस्थान में जा सकेंगे आसानी से
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट्स के जरिए छात्र बिना क्रेडिट खोए एक संस्थान से दूसरे संस्थान में आसानी से जा सकेंगे। फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट बनाने व उनका उपयोग करने पर पूरी तरह रोक लगेगी, जिससे योग्य छात्रों को नौकरी और एडमिशन में सही अवसर मिलेंगे।
सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, इंटर्नशिप और एजुकेशन लोन के लिए आवेदन करना और उनका सत्यापन करना बेहद आसान व तेज हो जाएगा।
उम्मीदवार अपने बायोडाटा में जो डिग्री और संस्थान बताएगा, नियोक्ता उनका डिजिटल रिकार्ड देखकर प्रामाणिकता जांच सकेगा फर्जी डिग्री की समस्या खत्म हो जाएगी। थर्ड पार्टी सत्यापन में डेटा सुरक्षा व साइबर सुरक्षा अहम रहेंगे।