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मुरैना में मोबाइल निकालने कुएं में उतरे कथा वाचक की दम घुटने से मौत, बचाने उतरा दोस्त भी बेहोश

मुरैना में कुएं में गिरा मोबाइल निकालने उतरे 26 साल के कथावाचक शिवकुमार उपाध्याय की जहरीली गैस से दम घुटने से मौत हो गई।

By Hariom GaurEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Fri, 17 Jul 2026 09:54:32 AM (IST)Updated Date: Fri, 17 Jul 2026 10:03:25 AM (IST)
मुरैना में मोबाइल निकालने कुएं में उतरे कथा वाचक की दम घुटने से मौत, बचाने उतरा दोस्त भी बेहोश
दो घंटे तक कथावाचक को निकालने के प्रयास करती रही टीम।

HighLights

  1. खाकी की धर्मशाला स्थित मंदिर में पूजा के दौरान मोबाइल कुएं में गिर गया था
  2. रस्सी के सहारे उतरे शिवकुमार 15-20 फीट नीचे बेहोश होकर गिर पड़े
  3. बचाने उतरा दोस्त देवेश शर्मा भी गैस की वजह से बेहोश हो गया था

नईदुनिया प्रतिनिधि, मुरैना। कुएं में गिरे मोबाइल को निकालने के लिए कथा वाचक रस्सी के सहारे सूखे कुएं में उतरा, लेकिन सालों से सूखे कुएं में बन रही जहरीली गैस से उनका दम घुटा और गिर पड़े। मदद के लिए कथावाचक का दोस्त भी कुएं में उतरा और बेहोश हो गया, जिसे तत्काल लोगों ने बाहर खींच लिया।

बेसुध पड़े कथा वाचक को निकालने के लिए एसडीईआरएफ की टीम बुलाई गई, लेकिन यह टीम बिना संसाधनों के केवल बिलैया लेकर पहुंच गई। बिलैया से कुएं में गिरी बाल्टियां बाहर निकाली जाती हैं। दो घंटे तक रस्सी से बांधकर बिलैया फेंकी गईं, उनमें उलझाकर कथा वाचक को निकाला गया, अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया।


कथावाचक शिवकुमार पुत्र जगदीश उपाध्याय उम्र 26 साल मूलरूप से श्यामपुर खुर्द के थे, लेकिन वर्तमान में रामनगर की तोमर गली में रहते थे। हर रोज वह रेलवे स्टेशन के पीछे स्थित खाकी की धर्मशाला के परिसर में बने मंदिर पर पूजा करने आते थे। गुरुवार की सुबह 11 बजे पूजा करने पहुंचे। पूजा के लिए कुएं के घाट पर लगी तुलसी के पत्ते तोड़ रहे थे, इसी दौरान उनके कुर्ते की जेब में रखा मोबाइल कुएं में गिर गया।

लोगों ने आवाज दी तो कुंए के अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई

शिवकुमार ने मोबाइल निकालने के लिए रस्सी का इंतजाम किया, इसके बाद खाकी की बगिया के आसपास मौजूद ई रिक्शा व ठेले वालों के अलावा अपने दोस्त देवेश शर्मा को मदद के लिए बुलाया। चार-पांच लोग रस्सी का एक सिरा पकड़कर घाट पर खड़े गए, दूसरे छोर को पकड़कर शिवकुमार कुएं में उतरा, लेकिन 15 से 20 फीट नींचे उतरते ही उनके हाथ से रस्सी छूट गई ओर कुएं में गिर गए। घाट पर मौजूद लोगों ने आवाज दी, लेकिन कुएं के अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

यह देख देवेश शर्मा ने कुएं में उतरने का फैसला लिया। देवेश ने रस्से का एक सिरा कमर से बांधा और कुएं में उतरने लगे, लेकिन 12-15 फीट नींचे जाकर वह भी बेहोश होकर लटक गए। यह देख रस्सी थामे लोगों ने तत्काल उन्हें बाहर खींच लिया, तब तक देवेश बहोश हो चुका था। उसके बाद लोगों को समझ आया, कि कुएं में जहरीली गैस है। बताया गया है, कि कुआं पटियों से ढंका था, उतरने के लिए दो-तीन पटिया खिसकाई गईं।

सांसद के फोन पर भी एक घंटे में, बिना संसाधन को पहुंची एसडीईआरफ

खाकी की बगिया, रेलवे स्टेशन के पास हैं, पास में ही सांसद शिवमंगल सिंह तोमर का आवास है। उस समय सांसद अपने घर पर ही थे। सूचना मिलने पर तत्काल सांसद मौके पर आए और एसडीईआरएफ के लिए फोन लगाया। सूचना के करीब एक घंटे बाद एसडीईआरएफ टीम मौके पर पहुंची। नियमानुसार गैस वाले कुएं या गड्ढे में रेस्क्यू चलाने के लिए एसडीईआरएफ पर मल्टी गैस डिटेक्क्टर, सांस लेने के लिए आक्सीजन सिलिंडर (बीए-सेट), जहरीली गैस को बाहर निकालने वाले ब्लोअर और अंदर जाने के लिए टाइपाड या विंच मशीन होती है, लेकिन मुरैना एसडीईआरएफ पर कुछ नहीं था।

संसाधन के नाम पर रस्सी व बिलैया (एंकरनुमा लोहे के नुकीले कांटों का समूह) था। रस्सी के एक छोर में बिलैया बांधकर बार-बार उसे कुएं में फेंका गया, जबकि कुएं के घाट से सूखी तलहटी में पड़े कथावाचक साफ दिख रहे थे। दो घंटे बाद बिलैया में कथावाचक के कपड़े फंसे और दोपहर सवा दो बजे के करीब उन्हें कुएं से बाहर निकाला जा सका।

अस्पताल में हंगामा, पोस्टमार्टम तक से किया इंकार

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अस्पताल में पहुंचने के बाद डाक्टरों ने कथा वाचक शिवकुमार का चेकअप किया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद मृतक के स्वजन व परिचितों ने अस्पताल में हंगामा कर दिया। एसडीईआरएफ टीम पर रेस्क्यू में करीब ढाई घंटे का समय लगाने और बिना संसाधन रेस्क्यू के आरोप लगाते हुए प्रशासन को मौत का जिम्मेदार बताया। हंगामा कर रहे लोगों ने शव का पोस्टमार्टम करने से भी मना कर दिया।

लोगों ने आरोप लगाए, कि सुबह 11 बजे जहरीली गैस से भरे कुएं में गिरे कथावाचक गिरे जिन्हें सवा दो बजे निकाला जा सका। तीन घंटे से ज्यादा जहरीली गैस में रहने के बाद भी जब कुएं से बाहर निकले तो उनकी सांस हल्की-हल्की चल रही थी। लेकिन वहां भेजी गई एंबुलेंस में भी ऑक्सीजन नहीं थी। कुएं से बाहर निकालते ही ऑक्सीजन लग जाती तो शिवकुमार की जान बच सकती थी।

हंगामे के बाद डिप्टी कलेक्टर उमेश अवस्थी, सीएसपी दीपाली चंदौरिया पहुंच गए। लोगों को जांच के बाद लापरवाहों पर कार्रवाई का भरोसा दिया, उसके बाद शव का पोस्टमार्टम करवाने लोग राजी हुए। स्टेशन रोड थाना पुलिस ने मर्ग का प्रकरण दर्ज किया है।

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मैंने मना किया था, कहा मरना है क्या

शिवकुमार मेरे लिए भाई समान था। रोज यहां पूजा करने आते थे, मेरे घर पास ही है। आज यहां आने से पहले घर आए, मिलने के बाद पूजा करने आ गए। कुछ देर बाद उनका फोन आया कि तुलसी तोड़ते समय मोबाइल कुएं में गिर गया, उसे निकालने रस्सी ले आया हूं, मुझे कुएं में उतरना है, आ जाओ। मेरे मित्र थे, इसलिए मैने उन्हें गुस्से में गाली देकर कहा कि मरना है, क्या? कुएं में उतरने की कोई जरूरत नहीं, वह सालों से बंद है। वह नहीं माने, मुझे बुला लिया।

15-20 फीट उतरने के बाद उनके हाथ से रस्सी छूटी और गिर गए। उसके बाद मैंने कुएं में उतरने का फैसला लिया। रस्सी पकड़ रहे लोगों ने मेरी कमर से रस्सी बांध दी, मैं 10-12 फीट नींचे उतरने के बाद बेहोश हो गया, तो मुझे बाहर खींच लिया। अगर प्रशासन की हीलाहवाली नहीं होती और रेस्क्यू टीम संसाधनों के साथ होती तो शिवकुमार की जान नहीं जाती। - प्रत्यक्षदर्शी और मृतक के दोस्त देवेश शर्मा ने जैसा नईदुनिया को बताया