नईदुनिया प्रतिनिधि, सबलगढ़/ मुरैना। राजस्थान के करौली में रहने वाले व्यक्ति की मौत 1980 में हो गई, लेकिन उसकी सबलगढ़ में स्थित जमीन की रजिस्ट्री 2024 में हो गई। 42 साल पहले मर चुके व्यक्ति के नाम पर फर्जी आदमी खड़ा किया, जिसे जमीन का मालिक बताकर करोड़ों की जमीन कौड़ियों के भाव नाम कर ली। यह मामला कोर्ट में पकड़ में आया और सबलगढ़ कार्ट ने 9 आरोपियों पर केस दर्ज करने के आदेश पुलिस को दिए हैं। आरोपियों में एक सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस का भतीजा है।
12 जून 2025 को जमीन का हो गया नामांतरण
सबलगढ़ के सुनहरा पटवारी हल्का नंबर में सर्वे नंबर 107, 108, 109, 117, 118, 119, 120, 121 और 133 की जमीन करौली निवासी हजारी पुत्र किरोड़ीलाल के नाम से दर्ज थी। 4 दिसंबर 2024 को इस जमीन की रजिस्ट्री आशुतोष माहेश्वरी, आशन गिरि, शिशुपाल त्यागी, संजीव त्यागी, रामअवतार त्यागी, देवेंद्र पचौरी के नाम हो गई। 12 जून 2025 को जमीन का नामांतरण भी हो गया। इसी बीच जगमोहन, गणेश आदि ने सबलगढ़ कोर्ट में केस दर्ज कर दिया।
कोर्ट के आदेश के बावजूद पुलिस ने 10 दिन बाद भी नहीं की FIR दर्ज
इसी केस में न्यायाधीश आशुतोष कुमार ने 1 अक्टूबर को फैसला सुनाते हुए नौ लोगों को करोड़ों रुपये की जमीन की फर्जी रजिस्ट्री का दोषी माना है। कोर्ट ने इन पर बीएनएस की धारा 318 (4), 336(3), 338, 340(2) और सहपठित धारा 3(5) के तहत केस दर्ज किया जाने के आदेश सबलगढ़ थाना प्रभारी को दिए हैं, हालांकि 10 दिन बाद भी पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया है। बताया गया है, कि इसी मामले में पीड़ित पक्ष ने लगभग दो साल पहले करौली में भी FIR करवाई। लेकिन आरोपियों की बड़ी पहुंच के कारण करौली पुलिस ने बिना किसी कार्रवाई के मामले में खात्मा लगा दिया। अब सबलगढ़ में केस दर्ज होने से पीड़ितों को न्याय की आस बंधी है।
इन लोगों पर होगी FIR
- मोतीलाल पुत्र चुन्नीलाल उम्र 73 साल निवासी तांबे की टोडी, छतपाड़ा, करौली राजस्थान
- आशुतोष माहेश्वरी पुत्र कौशल कुमार माहेश्वरी उम्र 55 साल निवासी हुजरात पुल, नया बाजार ग्वालियर
- आसन गिरि पुत्र रामस्वरूप गिरि, उम्र 38 साल, निवासी सविता नगर जौरा
- शिशुपाल त्यागी पुत्र जसवंत त्यागी, उम्र 38 साल निवासी गैपरी-जौरा
- संजीव कुमार पुत्र मातादीन त्यागी, उम्र 33 साल, निवासी शेखपुर-कैलारस
- रामअवतार पुत्र भूपसिंह त्यागी, उम्र 41 साल, निवासी जलालपुरा-जौरा
- देवेंद्र पुत्र रामअवतार पचौरी, उम्र 55 साल निवासी, जतावर हिंगोनाखुर्द मुरैना
- सुरेंद्र पुत्र रामस्वरूप, निवासी चिन्नौनी
- कल्लू पुत्र सोनेराम शर्मा, निवासी नंदगांगोली
एक करोड़ रुपये किसने किसको दिए, पता ही नहीं
यह जमीन 1.40 करोड़ रुपये में खरीदी गई है, लेकिन कोर्ट की जांच में यह भी सामने आ गया, कि 1.40 करोड़ रुपये में से मात्र 12 लाख रुपये (8.87 फीसद राशि) ही बैंकिंग माध्यम से दर्शाया गया है। एक करोड़ रुपये का भुगतान दो साल पूर्व होना लिखा है, यानी हजारीलाल की मौत के 42 वर्ष बाद उसे एक करोड़ रुपये देना भी बता दिया। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में लिखा, कि इस प्रकरण का केंद्रीय प्रश्न यही है, कि यह राशि किसने दी और किसने ग्रहण की।
लेने वाले ने नकद ली या खाते में राशि दी गई?
कोर्ट जांच में यह भी सामने आया, कि पंजीयन प्रमाण पत्र में जमीन की कीमत 2 करोड़ 55 लाख 84 हजार रुपये अंकित है। जबकि रजिस्ट्री के समय विक्रेता को केवल 15 लाख 68 हजार 500 रुपये दिए गए। इसमें 12 लाख रुपये का चेक और 3 लाख 68 हजार 500 रुपये नकद दिए गए हैं। कोर्ट ने कहा, कि यह राशि जमीन के मूल्य से काफी कम है।
कोर्ट के आदेश के बाद खसरे में छेड़छाड़ के आरोप
उधर, पीड़ित पक्ष ने कोर्ट के आदेश के बाद राजस्व रिकार्ड में छेड़छाड़ के आरोप लगाए हैं। आरोप है कि सुनहरा हल्का पटवारी ने 4 अक्टूबर को जमीन के असली मालिक गणेश पुत्र महादेव का नाम हटा दिया और खसरे के खाना नंबर पांच में आशुतोष माहेश्वरी, आशन गिरि, शिशुपाल त्यागी, संजीव त्यागी, रामअवतार त्यागी, देवेंद्र पचौरी के नाम दर्ज कर, इन्हें जमीन का मालिक बता दिया है, जबकि कोर्ट ने इन पर एफआइआर के आदेश दिए हैं। इस मामले में हल्का पटवारी भानू श्रीवास का कहना है, कि तात्कालीन एसडीएम अरविंद सिंह माहौर ने इस मामले में 11 जुलाई 2025 को एक आदेश जारी कर निर्देश दिए थे, कि सर्वे नंबर 107, 108, 109, 117, 118, 119, 120, 121 और 133 के कंप्यूटर खसरा की अभिलेख के कालम 8 एवं 12 में दर्ज आधिपत्य कृषक एवं कब्जेदार की प्रविष्टि को विलोपित किया जाए।
बकौल भानू श्रीवास उनकी हल्का में पदस्थी फरवरी 2026 में हुई है। यह प्रविष्टि पहले ही हो चुकी, जिसमें पूरी जानकारी दर्ज नहीं थी, उन्होंने कालम नंबर 12 में एसडीएम के आदेश की जानकारी दर्ज की है, किसी का नाम हटाया या बढ़ाया नहीं है। वहीं शिकायतकर्ता का दावा है, कि धारा बी-121 में दर्ज किए बिना ही यह पूरी कार्रवाई कर दी गई है, जो पूरी तरह अवैध है।
हां कोर्ट से इस तरह की एफआईआर के आदेश मिले है। यह मामला फर्जीवाड़े का है और जो तथ्य हमें एफआईआर के लिए चाहिएं, वह फरियादी अब तक दे नहीं पाया है। फर्जीवाड़े की एफआईआर हो तो जाती है, लेकिन अधूरे तथ्यों के कारण प्रकरण पड़ा रहता है। कोर्ट ने जो मुझे टाइम लाइन दी है, उसमें मैं अपनी कागजी कार्रवाई पूरा करके एफआईआर कर लूंगा। - पंकज मुदगल, टीआई, सबलगढ़ थाना, जिला मुरैना