मुरैना(नईदुनिया प्रतिनिधि)। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण चंबल सहित पूरे प्रदेश में मुनाफाखोर सक्रिय हो गए हैं और खाद्य सामग्री से लेकर जरूरत का हर सामान महंगा कर दिया है। जो सामग्री रूस से नहीं आतीं, जिनका स्टाक देश में भरपूर मात्रा में रहता है वह भी बीते एक पखवाड़े से लगातार महंगी हो रही हैं। इनमें लोहे का सरिया भी है जो एक पखवाड़े में ही अप्रत्याशित रूप से 1500-1600 रुपये क्विंटल महंगा हो गया है। इसके अलावा ज्वेलरी से लेकर दाल, आटा, तेल, घी, मसालों के दाम भी 20 से 30 फीसद महंगे हो गए हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बहाने सोने के भाव बीते 15 से 20 दिन में 48 हजार से बढ़कर 53 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है। इससे भी आश्चर्यजनक स्तर पर भवन निर्माण में उपयोग होने वाले सरिया के दाम बढ़े हैं। एक पखवाड़ा पहले सरिया के दाम 5500-5600 रुपये क्विंटल था, जो वर्तमान में 8500-8600 रुपये क्विंटल में बिक रहा है। सरिया पर इस महंगाई का असर ऐसा पड़ा है कि कई लोगों ने भवन निर्माण काम रोक दिया है। केवल निजी ही नहीं बल्कि सरकारी निर्माण कार्यों का ठेका लेने वाले ठेकेदारों का बजट भी ऐसा बिगड़ा है, कि जिला मुख्यालय पर हो रहे कई निर्माण कार्यों पर ब्रेक लग गया है। सोने व लोहे के अलावा तेल, घी, आटा, दाल, मसालों के दाम भी 25 रुपये प्रतिकिलो तक बढ़ गए हैं।
पेट्रोल-डीजल बढ़ते ही और बढ़ेगी महंगाईः
रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड आयल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इस कारण पेट्रोल-डीजल के दामों में 10 से 12 रुपये लीटर की बढ़ोतरी की संभावनाएं जताई जा रही हैं। अगर पेट्रोल-डीजल इतना महंगा हुआ तो खाद्य सामग्री सहित जरूरत का हर सामान महंगा होना तय है। हर ओर बढ़ी महंगाई के बीच सिर्फ सरसों का तेल ही ऐसा है, जिसके भाव बीते एक पखवाड़े में कम हुए हैं। 15 दिन पहले सरसों का तेल 180 रुपये किलो से घटकर 170 रुपये किलो पर आ गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि, अभी सरसों की पैदावार का सीजन है। बाजार में सरसों की बंपर आवक होने से सरसों के दाम भी कम हैं, इसलिए सरसों तेल महंगा नहीं हुआ।
यह है अंतर
सामग्री पहले अब
अरहर दाल 100 110
मूंग दाल 90 105
गेहूं आटा 22 26
चना 55 65
धनिया 95 120
मिर्च 180 200
हल्दी 90 115
रिफाइंड तेल 140 160
घी 400 450
बादाम 650 700
मैदा 24 27
नोट : भाव खेरीज किराना दुकानों पर प्रति किलो में हैं।
वर्जन
- सरिया के दाम 1600 रुपये क्विंटल तक बढ़ गए हैं। इससे निर्माण कार्यों का पूरा बजट बिगड़ गया है। इस महंगाई के कारण कई ठेकेदारों ने निर्माण काम रोक दिए हैं। इंतजार कर रहे हैं कि सरिए के दाम कम हों तब निर्माण काम शुरू हों, क्योंकि इस अतिरिक्त खर्च का भुगतान नहीं होता, इसका खामियाजा ठेकेदारों को उठाना पड़ता है।
नरेंद्र सिंह यादव,शासकीय ठेकेदार
- 15 दिन में आटा, तेल, घी, मसाले आदि सभी के भाव बढ़ गए हैं। हर परिवार का महीने का 800 से 1000 रुपये का खर्च बढ़ गया है। समझ नहीं आता कि रूस यूक्रेन के युद्ध से इन सामग्रियों का क्या लेना-देना है। जरूरत की यह सामग्रियां तो देश में ही पैदावार होती हैं। अब पेट्रोल-डीजल के भाव बढ़ेंगे तब फिर यह सामग्री महंगी होगी।
दिनेश कुमार शर्मा
वनखंडी रोड निवासी