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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 16, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Morena News : प्रशासन का ध्यान कोरोना नियंत्रण पर, सिंथेटिक दूध व पनीर बनाने वाले हुए अनियंत्रित

Morena News : मुरैना जिले में कोरोना काल के बीच मिलावटखोरी भी तेजी से पनप रही है।

By Hemant Kumar UpadhyayEdited By: Hemant Kumar Upadhyay
Publish Date: Thu, 16 Jul 2020 06:47:38 PM (IST)Updated Date: Fri, 17 Jul 2020 07:49:42 AM (IST)
Morena News : प्रशासन का ध्यान कोरोना नियंत्रण पर, सिंथेटिक दूध व पनीर बनाने वाले हुए अनियंत्रित

Morena News : मुरैना (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सिंथेटिक दूध और मिलावटी पनीर के मामले में कुख्यात मुरैना में इस व्यापार पर रोक नहीं लग पा रही है। कोरोना काल में इसमें और इजाफा हुआ है, क्योंकि सभी अधिकारी कोरोना नियंत्रण में व्यस्त हैं। वहीं मिलावटखोर बेरोकटोक मिलावटी पनीर को धड़ल्ले से बाहर भेज रहे हैं। गर्मी में खासतौर पर मई, जून और जुलाई में दूध का उत्पादन कम हो जाता है।

इसके बावजूद जिले से मिलावटी पनीर भारी मात्रा में बाहर भेजा जा रहा है। एक अनुमान के हिसाब से जिले में रोजाना करीब 12 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है, लेकिन गर्मी में यह 6 से 7 लाख लीटर तक सीमित हो जाता है। ऐसे में दूध से बनने वाले उत्पाद की मात्रा भी कम हो जाती है। लेकिन इस साल ऐसा नहीं हुआ। अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बेशक ट्रेन बंद हैं, लेकिन जिले से मिलावटी पनीर महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों में भेजा जा रहा है। अंतर सिर्फ इतना है कि अब मिलावटी पनीर लोडिंग वाहन से अन्य राज्यों में भेजा जा रहा है।


इस तरह से समझें किस तरह बिक रहा है पनीर

- शहर में ही करीब डेढ़ दर्जन से अधिक पनीर बनाने की फैक्ट्री हैं। खासबात यह है कि शहर के लोग केवल एक डेयरी से ही अधिक पनीर खरीदते हैं। इसके बावजूद सभी फैक्ट्रियां चल रही हैं। इन फैक्ट्रियों से पनीर सीधे लोडिंग वाहनों में पैक होकर दूसरे शहरों व राज्यों में भेजा जा रहा है।

- इस समय गांवों से दूध बहुत कम आ रहा है, लेकिन मिलावटखोर के सामने दूध की कमी नहीं आ रही। वे पहले सिंथेटिक दूध बनाते हैं और बाद में उससे पनीर बनाते हैं, जिसे आम व्यक्ति आसानी से समझ नहीं सकता।

- शहर की अधिकतर पनीर बनाने की डेयरी अब हाइवे के किनारे पहुंच गई हैं, इसलिए वे पनीर बनाकर सीधे दूसरी जगहों पर भेज देते हैं।

इसलिए हो रहा है ऐसा

वर्तमान में खाद्य सुरक्षा विभाग के अफसर कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। इस बात का फायदा मिलावटखोर पूरी तरह से उठा रहे हैं। बताया जाता है कि पिछले साल जुलाई में जिले में जब मिलावटी दूध के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई तो मिलावटखोरों को काफी घाटा हुआ था, लेकिन लॉकडाउन और कोरोना ने उनके व्यवसाय को बढ़ा दिया है।

इनका कहना है

सभी खाद्य अधिकारियों को इंसीडेंट कमांडर बनाया गया है। इस वजह से मिलावट के खिलाफ क्षेत्र में कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। जैसे ही समय मिलता है, कार्रवाई फिर शुरू करेंगे।

- डीके जैन, खाद्य सुरक्षा अधिकारी