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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 27, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Morena News: माफिया ने रेत के लिए छलनी कर डाले जलीय जीवों के रहवास

Morena News: माफिया ने अंधाधुंध तरीके से अवैध उत्खनन कर रहे माफिया ने चंबल नदी किनारों को छलनी कर दिया है।

By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Wed, 27 Apr 2022 11:28:01 PM (IST)Updated Date: Thu, 28 Apr 2022 11:46:23 AM (IST)
Morena News: माफिया ने रेत के लिए छलनी कर डाले जलीय जीवों के रहवास

Morena News: मुरैना(नईदुनिया प्रतिनिधि)। मुरैना में रेत माफिया पर अंकुश नहीं लग पा रहा। अंधाधुंध तरीके से अवैध उत्खनन कर रहे माफिया ने चंबल नदी किनारों को छलनी कर रखा है। जेसीबी व हाइड्रा जैसी मशीनों से दिनदहाड़े अवैध उत्खनन किया जा रहा है। इसका सबसे बुरा असर जलीयजीवों के घरोंदों पर हो रहा है। चंबल नदी में जहां-जहां अवैध उत्खनन हो रहा है, वहां-वहां से जलीयजीव पलायन कर चुके हैं। माफिया ने नदी के किनारों को खोद-खोदकर छलनी कर दिया है, जिससे चंबल का पूरा स्वरूप ही बिगड़ गया है।

चंबल नदी में घड़ियाल, मगरमच्छ, कछुआ और डाल्फिन जैसी मछलियां पाई जाती हैं। घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुआ जैसे जलीय जीव अपना वंश बढ़ाने के लिए नदी किनारे के रेत के टीलों में अण्डे देते हैं। इन्हीं रेत के टीलों को जलीयजीवों का रहवास कहा जाता है। रेत माफिया के कारण जलीयजीवों के रहवास किस तरह नष्ट हो रहे हैं, यह देखना और समझना है तो मुरैना-धौलपुर बार्डर पर राजघाट की हालत देखिए। कुछ साल पहले तक यहां रेत से कछुआ, मगरमच्छ व घड़ियालों के अण्डे निकलते थे, नदी में यह जलीयजीव जगह-जगह नजर आते थे, लेकिन राजघाट पर जेसीबी व हाइड्रा जैसी मशीनों से हर रोज करीब डेढ़ हजार ट्राली रेत निकाला जा रहा है। रेत माफिया ने रेत के टीले गायब कर, रेत निकालने के लिए किनारों को जगह-जगह खोदकर तालाब से बना दिए हैं। राजघाट क्षेत्र से डाल्फिन सालों पहले गायब हो चुकी हैं, अब घड़ियाल व मगरमच्छ भी नहीं दिखते। यह हालत केवल राजघाट की नहीं, बल्कि बरवासिन, भानपुर, अटारघाट, रऊघाट, नगरा, उसैद जैसे 25 से ज्यादा घाट हैं, जहां रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है। इन सभी जगहों से जलीयजीव पलायन कर गए हैं। रेत माफिया ने इन घाटों से रेत निकालने के लिए अलग सड़कें बना रखी हैं, जिन पर किसी आम आदमी का जाना खतरे से खाली नहीं।


संयुक्त टीम लापता, मौज में रेत माफियाः

रेत माफिया पर कार्रवाई के लिए हर विभाग ने अपने-अपने कर्मचारियों को सीधे तौर पर मना कर रखा है। तीन महीने में हुईं जिला टास्क फोर्स की पिछली दो बैठकों वन विभाग के अफसरों ने अपने कर्मचारियों से कहा है कि वह अकेले कार्रवाई में हीरो न बनें। एसपी ने थाना प्रभारी व पुलिसकर्मियों से कह रखा है कि वह तैयारी के बिना रेत के अवैध वाहनों को रोके नहीं। उधर कलेक्टर हर बार कहते हैं कि रेत, पत्थर के अवैध उत्खनन पर वन विभाग, राजस्व, पुलिस व माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम मिलकर कार्रवाई करेगी। अचरज की बात यह है कि एक साल पहले बनी संयुक्त टीम ने आज तक एक भी कार्रवाई को अंजाम नहीं दिया है।

किनारों से लेकर बीहड़ों तक में अवैध रेत के स्टाक :

चंबल नदी से इतनी मात्रा में रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है कि वह मुरैना, ग्वालियर व राजस्थान के धौलपुर में भी नहीं खप पा रहा। ऐसे में रेत माफिया ने चंबल नदी के किनारों से लेकर बीहड़ों में अवैध रेत के स्टाक कर रखे हैं। राजघाट पर चंबल नदी किनारों पर ही 700 से ज्यादा छोटे-छोटे टीले बनाकर रेत का स्टाक कर रखा है। घाट के आसपास जैतपुर, भानपुर, पिपरई, मसूदपुर, गोसपुर, जनकपुर, केंथरी, तोरखेरा गांव के आसपास बीहड़ों में हजारों डंपर रेत का स्टाक रखा हुआ है। बारिश के सीजन में जब चंबल नदी उफान पर होती है, तब रेत माफिया स्टाक किए गए रेत को महंगे दामों में खपाते हैं।

वर्जन

- अवैध रेत के खिलाफ कार्रवाई के लिए टास्क फोर्स की बैठक में रणनीति बनी है। जल्द पुलिस, राजस्व व माइनिंग विभाग के साथ मिलकर जल्द ही रेत माफिया पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।

स्वरूप दीक्षित,डीएफओ, मुरैना