यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 22, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Morena Weather Update: दोपहरी में गरज-चमक के साथ बरसे बादल, मौसम में बढ़ी ठंडक
मंगलवार की शाम से ही मौसम के मिजाज बदले थे। आसमान में छाए बादलों के कारण रात के समय हल्की बारिश हुई। इसके बाद बुधवार की सुबह से ही बूंदाबांदी का दौर श...और पढ़ें
By Paras PandeyEdited By: Paras Pandey
Publish Date: Thu, 22 Feb 2024 04:28:06 PM (IST)Updated Date: Thu, 22 Feb 2024 04:28:06 PM (IST)
बारिश की बूंदाबांदी से बचने छाता लेकर जाता युवक। मुरैना, नईदुनिया न्यूज। मौसम ने अचानक से करवट ली और आसमान में बादल मंडरा गए। मानसून की तरह दोपहरी में बादल खूब गरजे और बिजली भी चमकी, इसी के साथ दिनभर रुक-रुककर हल्की-हल्की बूंदाबांदी होती रही। मौसम के इस बदलाव ने तापमान लुढ़का दिया, हवाओं में ठंडक घुल गई, जिससे गुलाबी सर्दी का दौर लौट आया।
मंगलवार की शाम से ही मौसम के मिजाज बदले थे। आसमान में छाए बादलों के कारण रात के समय हल्की बारिश हुई। इसके बाद बुधवार की सुबह से ही बूंदाबांदी का दौर शुरू हो गया। हल्की बारिश ने शहर की सड़कों को तर कर दिया। दोपहर 2 बजे से आसमान में बादलों की गर्जना सुनाई देने लगी। रह-रहकर बादल गरजते रहे, इस दौरान बिजली भी चमकती दिखी।
बादल मंडराए रहने के कारण सूरज खुलकर अपनी चमक नहीं बिखेर पाया। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में यह बदलाव आया है, जो आगामी 24 घंटे तक रहेगा। इस दौरान कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है।
दिनभर धूप नहीं खिलने और बारिश के बाद हवाओं में ठंडक घुलने का असर यह रहा, कि दिन का तापमान 27 डिग्री से लुढ़ककर 25 डिग्री सेल्सियस पर आ गया, वहीं न्यूनतम तापमान भी दो डिग्री की गिरावट के बाद 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया है। दोपहर 3 बजे ठंडी बयार ने सर्दी का अहसान कराना शुरू कर दिया, शाम के समय सर्दी का असर और बढ़ गया, इसलिए लोगों के गर्म कपड़े अलमारियों से फिर निकल आए।
दो दिन बाद फिर बारिश के आसार
मुरैना आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र के मौसम विज्ञानी डॉ. हरवेंद्र सिंह ने बताया, कि पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण मंगलवार से ही मौसम में यह बदलाव है, इसका असर गुरुवार तक रहेगा। इस दौरान अंचल में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। डॉ. हरवेंद्र सिंह ने बताया, कि दो दिन बाद मौसम के मिजाज फिर इसी तरह बदलेंगे और गरज-चमक के साथ बारिश भी होगी।
बिना मौसम की यह बारिश फसलों के लिए फायदेमंद है। गेहूं की जिन फसलों की सिंचाई की जा रही है, उन किसानों के लिए यह हल्की बारिश भी बड़ी राहत भरी है, वहीं जिन किसानों की फसल पककर कटने की ओर है, उन्हें डर सता रहा है, कि बारिश के साथ कहीं ओले न गिर पड़े, ऐसा हुआ तो किसानों की फसलों को भारी क्षति होगी। उधर मौसम विभाग ने ओलावृष्टि जैसी संभावनाओं से इंकार किया है।