अटल प्रोग्रेस वे का एलाइनमेंट बदलने और बीहड़ की जमीन के विरोध में प्रदर्शन: मुरैना, कैलारस और सबलगढ़ में आज 'जेल भरो आंदोलन'
मध्य प्रदेश किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तिवारी ने बताया कि कैलारस में सुबह 11 बजे से पुरानी सब्जी मंडी, साढ़े 12 बजे सबलगढ़ गल्ला मंडी और मुरैना में एक बजे किसान नेहरू पार्क पर इकट्ठा होंगे।
Publish Date: Mon, 10 Aug 2026 11:03:36 AM (IST)Updated Date: Mon, 10 Aug 2026 11:04:01 AM (IST)
HighLights
- एलाइनमेंट में बदलाव का विरोध
- जमीन आवंटन रद्द करने की मांग
- शक्कर कारखाना चलाने पर अड़े किसान
नईदुनिया न्यूज, मुरैना। किसान श्रमिकों की मांगों को लेकर देश भर में 10 अगस्त को जेल भरो आंदोलन का आव्हान किया गया है। जिस पर सोमवार को मुरैना, कैलारस, सबलगढ़ में किसान गिरफ्तारी देंगे और जेल भरों आंदोलन करेंगे। इस आंदोलन की अगुवाई करने के लिए अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव व किसान नेता बादल सरोज प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे। मध्य प्रदेश किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तिवारी ने बताया कि कैलारस में सुबह 11 बजे से पुरानी सब्जी मंडी, साढ़े 12 बजे सबलगढ़ गल्ला मंडी और मुरैना में एक बजे किसान नेहरू पार्क पर इकट्ठा होंगे।
अशोक तिवारी ने बताया कि अटल प्रोग्रेस वे सड़क परियोजना का एलाइनमेंट बदलकर पहले के एलाइनमेंट चंबल के बीहड़ों से निकालने की जानकारी मध्यप्रदेश की विधानसभा में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह द्वारा प्रस्तुत की गई और लिखित में पटल पर रखी गई। अब उसे दोबारा से समतल, बहु फसली और बेसकीमती जमीन से निकालने संबंधी पत्र परियोजना निदेशक एनएचएआई द्वारा भू-अर्जन अधिकारी को लिखा है।
दोबारा से सड़क निकालने की कार्रवाई की जा रही है
इसमें जौरा, मुरैना श्योपुरकलां के जिलों में किसानों के सर्वे नंबरों को होल्ड कर दिया गया है। पहले जहां से सड़क निकली जा रही थी, वहां से दोबारा से सड़क निकालने की कार्रवाई की जा रही है। इसी तरह सबलगढ़ में अटार से निवाड़ी तक चंबल के बीहड़ों की जमीन उद्योग विभाग आवंटित की गई है। इस जमीन पर पीढ़ियों से किसान काबिज है और खेती कर रहे हैं किसानों की मांग है कि आवंटन रद्द किया जाए और इसे अनुपयोगी जमीन पर बनाया जाए।
इसके अलावा 15 साल से किसान शक्कर कारखाने को चलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बार-बार मुख्यमंत्री द्वारा, मंत्रियों द्वारा सांसद और नेताओ द्वारा घोषणा की जाती है, वायदा किए जाते हैं। परंतु शक्कर कारखाना बिल्कुल नहीं चलाया जा रहा है। अब उसे पूरी तरह से परिसमापन करके समाप्त किया जा रहा है। इसका विरोध किसान श्रमिक कर रहे हैं और कारखाने को चलाने के लिए किसानों का संघर्ष जारी है। कई मांगे उठाई जा रही है।