सुप्रीम कोर्ट का मप्र सरकार से कड़ा सवाल-बिना नंबर के वाहन से हादसा हुआ, तो जिम्मेदार कौन?
शपथ पत्र दाखिल करते हुए कोर्ट को अवगत कराया कि खनन के संबंध में प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट में खनन के पुराने फोटो इस्तेमाल किए गए हैं।
Publish Date: Sat, 30 May 2026 08:37:45 AM (IST)Updated Date: Sat, 30 May 2026 09:19:30 AM (IST)
सोशल मीडियाHighLights
- अवैध रेत खनन मामले में शीर्ष कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
- सरकार का दावा और सीईसी का दौरा
- अगली सुनवाई 22 जुलाई को
नईदुनिया प्रतिनिधि, मुरैना। चंबल नदी के घाटों से होने वाले अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश सरकार से पूछा कि रेत के अवैध खनन में लगे गैर पंजीकृत वाहनों से हादसा होने पर पीड़ित को मुआवजा नहीं मिलता। बिना नंबर के वाहन से हादसा होता है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
मप्र सरकार की ओर से अवैध खनन को नकारते हुए दिए गए शपथ पत्र पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (सीईसी) को दोबारा स्थलीय निरीक्षण का आदेश दिया है। अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच में हुई सुनवाई में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सालिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केवल रेत ढुलाई का काम हो रहा है। यह रेत आदेश से पूर्व खनन कर संग्रहित की गई थी। बेंच ने मुरैना में बिना पंजीकरण के हजारों वाहनों के संचालन पर सख्त नाराजगी जताई।
इस पर, एएसजी एसवी राजू ने 15 दिन में बिना पंजीकरण नंबर के संचालित हो रहे वाहनों पर कार्रवाई करने की बात कही। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल करते हुए कोर्ट को अवगत कराया कि खनन के संबंध में प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट में खनन के पुराने फोटो इस्तेमाल किए गए हैं। इसका ड्रोन सर्वे भी कराया जा चुका है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में फैले राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध खनन का स्वत: संज्ञान लेते हुए इसी वर्ष मार्च में वाद दर्ज किया था। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकार को अवैध खनन रोकने के लिए अप्रैल में आदेश किया था। सीईसी ने 30 अप्रैल से दो मई तक चंबल अभयारण्य का निरीक्षण किया। अपनी रिपोर्ट में बिना नंबर के वाहनों से अवैध खनन होने के साक्ष्य उपलब्ध कराए थे। रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने 26 मई को हुई सुनवाई में मध्य प्रदेश सरकार के एएसजी एसवी राजू को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे।