
नरसिंहपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में मच्छरजनित रोग पैर पसार रहे हैं। दर्जन भर से ज्यादा गांव किसी न किसी तरह की बुखार की चपेट में हैं। गत दिवस बुखार शायद डेंगू से एक और महिला की मौत हो गई। पिछले एक
पखवाड़े में बुखार से मरने वालों की संख्या बढ़कर 5 हो गई है। अब तक एक दर्जन से ज्यादा गांवों में रैपिड फीवर सर्वे कराया गया है, जिनमें कई जार कंटेनरों के निरीक्षण में सैंकड़ों कंटेनरों में लार्वा पाए गए, उनका विनष्टीकरण किया गया। बावजूद इसके बीमारी की रोकथाम के प्रयास नाकाफी हैं।
बुखार शायद डेंगू से एक और मरीज की मौत हो गई है। मरीज धुवघट निवासी उत्तराबाई पति बसंत पटैल 55 वर्ष बताई गई हैं, जिसका उपचार नागपुर में चल रहा था, 25 सितंबर को उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। मृतिका के देवर मनमोहन उर्फ भोला जाट के अनुसार उनको डेंगू था, जिसका इलाज नागपुर में चल रहा था। श्री जाट के अनुसार घुवघट में कई लोग बीमारी से परेशान हैं, इनमें से कई को बुखार के अलावा पीलिया, मोतीझिरा की शिकायते हैं।
जिले में मच्छरजनित रोग ग्रामीण क्षेत्रों में पैर पसार रहा है। अब तक सालीचौका, गोटीटोरिया, गांगई, धुवघट, महगुवांकला, उमरिया, सागौनी, मुराछ, मेख, लिलवानी, करहैया, नयाखेड़ा, गोलगांव, घाटपिंडरई, बिलौनी,
मुर्गाखेड़ा आदि ग्रामीण क्षेत्रों में किसी न किसी तरह के बुखार से पीड़ितों की संख्या बढ़ी है। ग्राम मुराछ और सागौनी, सालीचौका में तो स्थिति इतनी बिगड़ी कि कहीं न कहीं मौत हुई है।
गांवों में बढ़ती बीमारी से स्वास्थ्य महकमे के उपाय नाकाफी हैं। यहां स्वास्थ्य महकमे ने सैंकड़ों घर के सर्वेक्षण में लगभग 5 से 6 हजार कंटेनरों का निरीक्षण किया और कई हजार कंटेनर में लार्वा पाया। सागौनी में तो 5 दलों ने लार्वा व एक्टिव फीवर सर्वे किया कि कई कंटेनरों में लार्वा पाया गया। बीते दिवस 957 कंटेनर में से 129 में लार्वा मिले।
डीडीटी बेअसर
मलेरिया माह जून में स्वास्थ्य महकमे के मलेरिया अमले ने हाईरिस्क वाले गांवों में डीडीटी का छिड़काव कराया, ग्रामीणों की शिकायत है कि वह बेअसर रहा है। न तो मच्छर मरे और न ही अन्य तरह के कीट। सितंबर माह में दूसरे चरण का छिड़काव हो रहा है, लेकिन छिड़काव में प्रयुक्त पाउडर के रसायनिक तत्व निष्प्रभावी हैं।
80 से ज्यादा मरीजों को डेंगू की शिकायत
जिले में बुखार पीड़ित इलाज के लिए नरसिंहपुर के अलावा जबलपुर और नागपुर जा रहे हैं। जबलपुर-नागपुर पहुंचने वाले मरीजों में डेंगू प्रभावित मरीजों में सर्वाधिक संख्या नरसिंहपुर जिले की ही है। स्वास्थ्य महकमे के रिकार्ड में भी 80 से ज्यादा मरीजों का रिपोर्ट कार्ड डेंगू बता रहा है। यह आंकड़े वैसे 1 जनवरी से सितंबर के पहले पखवाड़े तक के हैं। अभी भी शिवानी पटैल 26 वर्ष ग्राम मुराछ बाम्बे अस्पताल में, घाट पिंडरई की मोहिनी पटैल 11 वर्ष नेशनल अस्पताल में और ग्राम गोटीटोरिया की आयुष नागवंशी आयुषमान अस्पताल जबलपुर में भर्ती है, इन्हें भी डेंगू की शिकायत है। जिले में बीते वर्ष मलेरिया प्रभावित हाईरिस्क वाले 90 ग्राम चिन्हित किए गए थे, जिनमें करेली-चांवरपाठा में 19-19, सालीचौका में 20 व गोटेगांव ब्लॉक में 31 गांव हैं। हाईरिस्क वाले इन गांवों में बहुत से गांव में अब भी बुखार का प्रकोप है।
एक पखवाड़े में मृतक यह
-उत्तराबाई पति बसंत पटैल 55 वर्ष धुवघट। नागपुर में इलाज के दौरान 25 सितंबर को मृत, शिकायत डेंगू की।
-बसंतीबाई पति राजू लोधी, 35 वर्ष सालीचौका, नागपुर में इलाज के दौरान मृत।
-चोखेलाल पिता सुखलाल लोधी, उम्र 35 वर्ष, मुराछ।
-सुनील पिता महेश लोधी 27 वर्ष मुराछ।
-कल्याण पिता मुन्नालाल लोधी 16 वर्ष, मुराछ।
डेंगू से मौत नहीं
प्रश्न- जिले में बुखार से पीड़ित गांव की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके नियंत्रण के लिए क्या उपाय विभाग द्वारा किए गए हैं।
-ऐसे सभी गांवों की सूची तैयार की गई है, वहां नियंत्रण के लिए टीम भेजी गई है। यह भी देखा जा रहा है कि कहां पॉजीटिव केश आ रहे हैं, वहां विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ब्लाक मेडिकल की टीम भी गांव में जा रही है।
प्रश्न- डेंगू से अब तक 4 लोगों की मौत की खबर है?
-डेंगू से अधिकांश तौर पर मौत नहीं होती, डेंगू तीन प्रकार का होता है, कई बार बुखार के साथ दूसरी बीमारियां होती हैं, जो मौत की कारण बन सकती हैं, आमतौर पर ऐंसा ही देखा जा रहा है।
प्रश्न- बुखार, मलेरिया, डेंगू से निपटने और क्या ऐहतिहयाती कदम रहे है?
-लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है, लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि अपने आसपास पुराना पानी एकत्रित न करें, आशा कार्यकर्ताओं को भी लार्वा के सर्वेक्षण के लिए कहा गया है पर ग्रामीणों क्षेत्रों में देखा जा रहा है कि पानी जमा किया जाता है जो मच्छरों के पनपने का कारण बनता है।
प्रश्न- मलेरिया विभाग में अमले की कमी से कितना कार्य प्रभावित हो रहा है?
-कार्य तो प्रभावित हो रहा है,हमारे यहां मलेरिया निरीक्षक के पांचों पद रिक्त पड़े हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में एमपीडब्ल्यू अर्थात स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की संख्या भी कम हो रही है। एएनएम दूसरे कार्यों में व्यस्त हैं, इस वजह से कहीं न कहीं कार्य प्रभावित हो रहा है।
प्रश्न- पिछले वर्ष मलेरिया से संबंधित चिन्हित हाईरिस्क वाले गांव में ही यह समस्या हो रही है?
-नहीं ऐंसा नहीं है, वहां तो निदानात्मक उपाय पहले ही किए जा चुके हैं। वहां ऐंसी शिकायत नहीं है।
-डॉ. एआर मरावी, जिला मलेरिया अधिकारी, नरसिंहपुर