
नईदुनिया प्रतिनिधि, नरसिंहपुर। जिला मुख्यालय के समीपी ग्राम मुड़िया में शनिवार को 160 से भी अधिक वर्षों पुरानी अनूठी और ऐतिहासिक परंपरा का अपार जनउत्साह के साथ निर्वहन किया गया। दशहरे पर रावण दहन की तर्ज पर मुड़िया में बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक रूप में 'कंस वध' का भव्य आयोजन किया जाता है। यह आयोजन बीते दिवस भी देखने को मिला, जिसमें भगवान कृष्ण और कंस के दल जब आमने-सामने आए, तो पूरा क्षेत्र जयकारों से गूंज उठा।
आयोजन से जुड़े डा. विवेक सक्सेना और मनीष पटेल ने बताया कि लगभग 160 वर्ष पूर्व गांव में भीषण महामारी फैली थी, जिससे व्यापक जनहानि हुई थी। उस समय महामारी के संकट से मुक्ति पाने के लिए ग्रामवासियों ने इस परंपरा की शुरुआत की थी। लोक मान्यता है कि जब से इस परंपरा का निर्वहन शुरू हुआ है, तब से गांव में कभी कोई महामारी या आपदा नहीं आई।
परंपरा के अनुसार ग्रामीणों ने अपने खेतों व घरों की पवित्र मिट्टी एकत्र कर गांव के बाहर कंस की विशाल प्रतिमा निर्मित की, जिसके मुकुट पर कांस की कलगी (विशेष सफेद फूल) सुसज्जित की गई। इसके बाद गांव के ही लोग दो दलों में बंट गए।
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एक ओर भगवान कृष्ण का दल तो दूसरी ओर कंस का दल, जिसमें राक्षस रूप में बच्चे और बड़े शामिल हुए। सांकेतिक युद्ध शुरू हुआ, जो करीब 2 से 3 घंटे चला। इस रोमांचक युद्ध के अंत में भगवान कृष्ण के स्वरूप ने कंस के मुकुट से कांस की कलगी उखाड़कर उसका सांकेतिक वध किया। कंस वध होते ही कृष्ण के दल की विजय हुई और पूरे गांव ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाना शुरू कर दिया।