नीमच (नईदुनिया प्रतिनिधि)। देशभर के साथ नीमच जिले में भी 22 मार्च 2020 रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आव्हान पर जनता ने कर्फ्यू लगाया था। इस रविवार की सुबह रोज से जैसे कुछ अलग थी। जैसे-जैसे सूरज की रोशनी बढ़ी, उजाला बढ़ा, लेकिन सड़कों की चहल-पहल जैसे रात के आगोश से नहीं उठी थी। सबकुछ शून्य था। इस शहर का फव्वारा चौक हो या कमल चौक। टैगोर मार्ग हो या आंबेडकर मार्ग। रेलवे स्टेशन हो या बस स्टैंड...। सबकुछ थमा हुआ था। बावजूद जनता के इस कर्फ्यू में उपजे सन्नााटे में एक गजब का सुकून दिखाई दिया था। उस दौरान लोगों ने कहा था कि कोरोना को ललकारा है, हम रहेंगे घर में तो वायरस हारा है। जिले में कोरोना संक्रमण का पहला पाजिटिव केस मई 2020 में सामने आया। लाकडाउन की अवधि में जिला प्रशासन ने राजस्थान-मप्र की बार्डर पर स्थित नयागांव से राजस्थान सहित अन्य प्रांतों में फंसे नागरिकों को सुरक्षित घर पहुंचाया था। इस दौरान जिला प्रशासन की पहल से सामाजिक संस्थाओं ने इन नागरिकों के ठहरने व भोजन की व्यवस्था भी की थी। जिले की नयागांव बार्डर से प्रदेश के कई नागरिकों को बसों के माध्यम से घर तक पहुंचाया गया था।
चाइल्ड रिलीफ मिशन फाउंडेशन व रोटरी डायमंड ने की जरूरतमंदों की मदद-
शहर की सामाजिक संस्थाओं ने कोरोना वायरस के खौफ के बीच जरूरतमंदों तक हरसंभव मदद पहुंचाई। चाइल्ड रिलीफ मिशन फाउंडेशन व रोटरी डायमंड क्लब के पदाधिकारी व सदस्यों ने लाकडाउन के बीच शहर की झुग्गी-झोपड़ी व गरीब बस्तियों तक पहुंचकर जरूरतमंदों को भोजन के पैकेट, फल-फ्रूट व बिस्किट सहित अन्य जरूरी वस्तुएं उपलब्ध कराईं। इसी प्रकार रोटरी डायमंड क्लब के पदाधिकारियों व सदस्यों ने भी गरीब बस्तियों तक पहुंचकर खाद्य सामग्री का वितरण किया था। शहर के अन्य समाजसेवियों ने भी बढ़-चढ़कर नागरिकों की मदद की थी।
मुसीबत देखी तो बना दिए सैकड़ों मास्क, ग्रामीणों को निशुल्क वितरित भी किए
शहर के समीप स्थित ग्राम जमुनिया कलां की एक गृहिणी ने लाकडाउन की अवधि में अपने ही घर में सैकड़ों मास्क का निर्माण कर निशुल्क वितरण किया। इस गांव की गृहिणी प्रेमलता खारोल ने घर पर रहकर सैकड़ों मास्क बनाए थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि पूरी दुनिया में कोरोना वायरस को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। इससे देश भी अछूता नहीं रहा है। देश के साथ-साथ संक्रमण का खतरा जिले पर भी बना हुआ है। इसका बचाव ही सावधानी है। सावधानी में लोगों को चेहरे पर मास्क लगाना, हाथों को धोना व भीड़भाड़ वाली जगह में जाने से बचना बहुत आवश्यक है।
सूने आंगन में हुई थी देवी मां भादवा की घट स्थापना
महामाया भादवा माता मंदिर परिसर में यह पहला मौका था जब नवरात्र की शुरुआत में सूने आंगन में मां भादवा की घट स्थापना की गई थी। लाकडाउन का यहां भी गहरा असर दिखाई दिया था। पहली बार श्रद्धालुओं के बिना 25 मार्च 2020 को विधि-विधान से मां भादवा को विराजित किया गया था। घट स्थापना के बाद मंदिर के पुजारियों की देखरेख में ही महामाया भादवा राणी की सुबह व शाम को महाआरती की गई थी। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर पाबंदी लगाई गई थी।
शहर से निकलने वाले कचरे में आई थी 13 प्रतिशत की कमी
लाकडाउन लागू होने के साथ ही शहरवासियों के लिए एक अच्छी खबर भी आई थी। शहरवासियों ने नियमों को निभाते हुए स्वयं को अपने घरों में सीमित किया था। इसका असर शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर दिखाई दिया था। लाकडाउन की अवधि के महज चार दिन में ही शहर से निकलने वाले कचरे में सामान्य दिनों की तुलना में 13 प्रतिशत की कमी दिखाई दी थी। सड़कों पर निकलने वाला कचरा तुलनात्मक कम था। जबकि रहवासी कालोनियों से कचरा संग्रहण के लिए कचरा वाहन नियमित सेवाएं दे रहे थे।
जागरूकता के असर से हाथ धोने पर बढ़ी थी पांच फीसदी पानी की मांग
लाकडाउन का असर शहर की जल प्रदाय व्यवस्था पर भी दिखाई दिया था। कोरोना वायरस से बचाव के लिए किए गए आह्वान के बाद नागरिक लगातार अपने हाथ धो रहे थे। इस प्रक्रिया में केवल शहर में ही पांच फीसद पानी की मांग अचानक बढ़ गई थी। इसे प्रशासन ने जागरूकता की दृष्टि से देखा था। जिला प्रशासन व स्वास्थ्य प्रबंधन ने कोराना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए सैनिटाइजर व साबुन से अच्छी तरह हाथ धोने का सुझाव दिया था। इसके बाद कुछ ही दिनों में पानी की अचानक खपत बढ़ी थी। इससे यह भी स्पष्ट हुआ था कि शहर में प्रशासन की अपील व सुझाव का नागरिकों ने पालन किया था।
सब्जी मंडी की जगह बदलते ही दिखी थी शारीरिक दूरी
लाकडाउन में दो दिन की कसावट के बाद पुनः ढील दी गई। नागरिकों की सुविधा के लिए सब्जी और किराना दुकानों को खोलने की इजाजत दी गई थी। थोक सब्जी विक्रेताओं की सुविधा के किए गए बदलाव का असर शारीरिक दूरी के रूप में देखने को मिला था। जिला प्रशासन ने थोक सब्जी मंडी का स्थान बदलकर शासकीय हायर सेकेंडरी क्रमांक दो के मैदान पर किया था। यहां ग्राहकों के खड़े रहने के लिए तय दूरी पर गोले भी बनाए गए थे। इसके अतिरिक्त लाकडाउन की डेढ़ माह की अवधि में वायु प्रदूषण भी आधा रह गया था। शोरगुल में भी कमी आई थी।