नईदुनिया प्रतिनिधि, पन्ना(Panna Diamond Mining)। रातों रात किस्मत चमकाने वाला हीरा सबकी किस्मत में नहीं होता। रत्नगर्भा धरती पन्ना में ऐसे कई परिवार हैं, जिन्होंने हीरे की चाहत में खदान लीज पर ली और दो महीने में ही हीरा मिल गया।
बुधवार की नीलामी में इसका उदाहरण भी देखने को मिला। वहीं कुछ पट्टाधारक ऐसे हैं जो वर्षों से खोदाई कर मिट्टी को ही छान रहे हैं। पांच वर्ष का औसत निकालें तो करीब 250 लोगों को ही हीरे मिले हैं। वहीं 400 से ज्यादा ने हीरा पाने की चाहत में अपनी आर्थिक स्थिति बदहाल कर ली।
पन्ना की धरती की उथली हीरा खदानों में 40 से 45 किलोमीटर लंबाई और चार से पांच किमी चौड़ाई में पन्ना से पहाड़ीखेड़ा तक हीरे अक्सर निकलते हैं। बता दें कि हीरा खदानों के पट्टे राजस्व या निजी भूमि में दिए जाते हैं। इसके अलावा शेष 35 हेक्टेयर का हिस्सा नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कारपोरेशन यानी एनएमडीसी को दिया गया है। यहां मशीन से खोदाई की जाती है।
शासकीय हीरा कार्यालय में हीरा पारखी का पद प्रदेश का एकमात्र है। इस पर तैनात अनुपम सिंह ही अपनी पारखी नजरों से तय करते हैं कि हीरा किस गुणवत्ता का है और इसकी अनुमानित कीमत क्या हो सकती है। जानकारों के अनुसार, यह पद वर्ष 1961 से सृजित है।
खदान लेते ही दो महीने में मिला पहला हीरा
पन्ना में रहने वाले हर व्यक्ति को एक बार जरूर लगता है कि क्यों न किस्मत को आजमा लिया जाए। इसी क्रम में जिला मुख्यालय निवासी राजेश कुमार जैन ने हीरा खदान का पट्टा लिया और दो महीने के अंदर ही पहला हीरा मिल गया। वह बताते हैं कि हीरे मिलने का खेल किस्मत का है।
पहली बार जब पट्टा जारी करवाया था, तब दो महीने के अंदर हीरा मिल गया। उसके बाद लगातार हीरे मिलते रहे अब तक इनकी संख्या आठ से 10 हो चुकी है। मजदूर से मालिक बन गया हूं 19.22 कैरेट का हीरा उथली खदान से निकालने वाले चुनवाद आदिवासी बुधवार को बेहद खुश नजर आए।
दरअसल, नीलाम के पहले दिन उनका हीरा करीब 94 लाख रुपये में बिका है। वे कहते हैं कि बहुत लंबे समय से मजदूरी कर रहा हूं। लंबी मेहनत के बाद यह हीरा मुझे खदान से मिला। 19 कैरेट का यह हीरा शासकीय कार्यालय में चार माह पहले जमा कराया था।
इतनी बड़ी राशि में मिलने के बाद मैं अब मजदूर से मालिक बन गया हूं। यह राशि स्वजन की खुशहाली व बच्चों की शिक्षा पर खर्च करूंगा। पांच साल से हर रहे खदान, एक भी हीरा हाथ नहीं लगा पन्ना के ही सौरभ साहू कहते हैं कि वह बीते पांच सालों से हीरा खदान लेकर मेहनत कर किस्मत आजमा रहे हैं पर अब तक सिवाय मेहनत के कुछ हाथ नहीं लगा है।
कई बार खदान का स्थान भी बदला पर उससे किस्मत नहीं बदली। हीरा मिलने में मजदूरी पर होने वाले खर्च से कर्जा अलग हो गया है। बता दें कि आठ मीटर लंबाई और चौड़ाई वाली हीरा खदान 200 रुपये प्रति वर्ष के मान से शुल्क देकर ली जा सकती है। यह खदान एक जनवरी से 31 दिसंबर तक मान्य होती है।