
नईदुनिया न्यूज, पन्ना। जिले में देवेंद्रनगर कस्बा स्थित मेसर्स देवनाथ फार्मा के खिलाफ कफ सीरप की असामान्य खरीद और दवा कारोबार से जुड़ी अनियमितताओं की जांच के बीच खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई आगे बढ़ी है।
जुलाई में जांच के दौरान सील किए गए एजेंसी और मकान को 10 सितंबर को खोलकर शुरू की गई कार्रवाई 13 सितंबर तक चली। इस दौरान जांच दल ने एक करोड़ 30 लाख रुपये से अधिक मूल्य की दवाएं और मेडिकल डिवाइस जब्त किए।
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यह कार्रवाई उस जांच की अगली कड़ी है, जिसकी शुरुआत जुलाई में देवनाथ फार्मा समेत जिले की दो दवा एजेंसियों में बड़ी मात्रा में ऑनरेक्स कफ सीरप की खरीद की पड़ताल से हुई थी। जांच के दौरान कफ सीरप की बिक्री और वितरण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके थे।
देवनाथ फार्मा में जांच आगे बढ़ने के बीच एजेंसी और संबंधित मकान पर ताला लगा मिला तथा प्रोप्राइटर और मकान मालिक परिवार सहित गायब हो गए थे। इसके बाद परिसर को सील कर दिया गया था।

नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, भोपाल के निर्देश और पन्ना कलेक्टर के मार्गदर्शन में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने 3 से 5 जुलाई 2026 तक जिले में कफ सीरप की खरीद-बिक्री की जांच की थी। इस कार्रवाई में ग्राम कटन की मेसर्स बागरी ड्रग एजेंसी और देवेंद्रनगर की मेसर्स देवनाथ फार्मा की जांच की गई।
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जांच में दोनों एजेंसियों द्वारा महज कुछ महीनों में लगभग 1 लाख 34 हजार बोतल ऑनरेक्स कफ सीरप खरीदे जाने की जानकारी सामने आई थी। बागरी एजेंसी में करीब 45 हजार और देवनाथ फार्मा में करीब 89 हजार बोतल की खरीद का रिकॉर्ड पाया गया था।

इतनी बड़ी मात्रा में खरीदे गए कफ सीरप की बिक्री अथवा वितरण से संबंधित आवश्यक अभिलेख और चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन रिकॉर्ड जांच दल के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जा सके। यही तथ्य पूरे मामले की जांच का प्रमुख आधार बना। देवनाथ फार्मा की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि फर्म अपने औषधि लाइसेंस में दर्ज स्वीकृत स्थल के बजाय अन्य स्थान से संचालित हो रही थी।
जांच दल ने लगातार दो दिनों तक दस्तावेजों की जांच और अन्य औषधियों से संबंधित कार्रवाई की। तीसरे दिन जब जांच दल दोबारा पहुंचा तो प्रतिष्ठान पर ताला लगा मिला। मकान मालिक और दुकान संचालक परिवार सहित वहां मौजूद नहीं थे। इसके बाद नियमानुसार परिसर को सील कर दिया गया।
उपलब्ध कार्रवाई विवरण के अनुसार 5 जुलाई को तहसीलदार के समक्ष परिसर सील किया गया था। इस घटनाक्रम के बाद देवनाथ फार्मा की भूमिका और उसके दवा कारोबार के रिकॉर्ड को लेकर जांच और महत्वपूर्ण हो गई।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने बागरी एजेंसी में कफ सीरप खरीदी एवं बिक्री की जांच उपरांत एजेंसी को सील कर दिया। उल्लेखनीय है कि देवनाथ फार्मा एजेंसी के संचालन में गड़बड़ी पाए जाने पर ड्रग लाइसेंस पूर्व में निरस्त कर दिया गया था। औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा संबंधित नियमों के उल्लंघन के आधार पर औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी, पन्ना द्वारा फर्म का ड्रग लाइसेंस 20 जुलाई 2026 को ही निरस्त किया जा चुका था।
लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई फर्म के लाइसेंस में स्वीकृत स्थल बिरवाही रोड गल्ला मंडी के पास के बजाय दूसरे स्थान (मड़ैयन पंचायत रेलवे पुल के आगे देवेंद्रनगर) से संचालन और जांच के दौरान संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने के आधार पर हुई थी। इसी तरह जुलाई की जांच में शामिल ग्राम कटन स्थित बागरी ड्रग एजेंसी का लाइसेंस भी बिक्री अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने और अन्य अनियमितताओं के बाद 14 जुलाई 2026 को निरस्त किया जा चुका है।
देवनाथ फार्मा के प्रोपराइटर द्वारा कार्यालय में आवेदन दिए जाने के बाद जांच दल ने 10 सितंबर को सील परिसर को खोलकर कार्रवाई आगे बढ़ाई। पन्ना, छतरपुर और सतना के औषधि निरीक्षकों ने पुलिस बल की मौजूदगी में 10 से 13 सितंबर तक परिसर की जांच की। कार्रवाई में करीब एक करोड़ 30 लाख रुपये से अधिक मूल्य की दवाएं और अन्य सामग्री जब्त की गई। इनमें 201 कार्टून एलोपैथिक दवाएं, 13 कार्टून मेडिकल डिवाइस तथा एक्सपायर दवाओं के दो कार्टून और तीन बोरियां शामिल थीं।
इस बरामदगी से जांच का दायरा केवल कफ सीरप की खरीद तक सीमित नहीं रहा है। अब एजेंसी में उपलब्ध अन्य दवाओं की खरीद, बिक्री, स्टॉक और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच महत्वपूर्ण हो गई है। बड़ी मात्र में दवाएं एवं मेडिकल डिवाइस एवं जब्त करने की कार्यवाही पन्ना की औषधि निरीक्षक महिमा जैन, छतरपुर के औषधि निरीक्षक अजीत जैन, सतना की औषधि निरीक्षक प्रियंका चौबे की टीम द्वारा की गई।
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल बड़ी मात्रा में खरीदे गए कफ सीरप की बिक्री और वितरण को लेकर है। दोनों एजेंसियों की जांच में कफ सीरप की बड़ी खरीद का रिकॉर्ड सामने आया, लेकिन उसके बाद की बिक्री या वितरण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके।
ऐसे में जांच का प्रमुख बिंदु यह है कि करीब 1.34 लाख बोतल ऑनरेक्स कफ सीरप आखिर किन लोगों, मेडिकल प्रतिष्ठानों या अन्य खरीदारों तक पहुंचा। इसके लिए खरीद-बिक्री बिल, स्टॉक रजिस्टर, वितरण संबंधी रिकॉर्ड और चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन समेत उपलब्ध दस्तावेजों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।
जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि फर्म का वास्तविक कारोबार किस स्तर पर था और उसका रिकॉर्ड कितना व्यवस्थित था। फिलहाल खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई जारी है। कफ सीरप की खरीद और बिक्री से जुड़े दस्तावेज, जब्त दवाओं का विवरण और अन्य वैधानिक पहलुओं की जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी।
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