
झाडला। भारत जैसे विकासशील देश में आजादी के 79 साल बीत जाने के बाद भी राजगढ़ जिले के झाडला क्षेत्र के कई गांव पक्की सड़क के इंतजार में हैं। झाडला से जुड़ने वाले तीन अति-महत्वपूर्ण ग्रामीण मार्ग आज तक नहीं बन सके हैं, जिससे सात गांवों के हजारों ग्रामीणों को रोजाना कीचड़ और गहरे गड्ढों से भरी सड़क पर चलने को मजबूर होना पड़ रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में तो यह रास्ता पूरी तरह नरक बन जाता है। गड्ढों में पानी भर जाने से निकलना दूभर हो जाता है, लेकिन शासन-प्रशासन में बैठे जिम्मेदारों को आम जनता की इस पीड़ा की कोई परवाह नहीं है।
1.झाडला से मेंगलादीप मार्ग (दूरी 7 किलोमीटर) रू यह सबसे व्यस्त मार्ग है। झाडला से जानुखेड़ी तक तो मुख्यमंत्री सड़क बनी हुई है, लेकिन वहां से आगे मस्तुखेड़ी, कलाली, मुंडला बरोल और मेंगलादीप तक आज तक एक पत्थर भी नहीं डला है। इस मार्ग से प्रतिदिन झाडला के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने सैकड़ों बच्चे आते-जाते हैं। साथ ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में रोजाना झाडला के बाजार से सामान खरीदने, मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक में काम से और झाडला सहकारी संस्था में खाद, बीज, दवा और उचित मूल्य की दुकान से राशन लेने आते हैं। खराब सड़क के कारण सभी को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
2. झाडला से बीजोरी-अगवानी मार्ग (दूरी 4 किलोमीटर) रू झाडला से बीजोरी की दूरी महज 4 किलोमीटर है, बीच में अगवानी गांव भी पड़ता है। यह छोटा सा गांव है। इस सड़क के नहीं बनने से दोनों गांवों के किसानों को अपने खेतों में आने-जाने और खेती करने में भारी दिक्कत होती है। रोजाना मवेशियों को खेत पर ले जाने में भी किसानों को कीचड़ से जूझना पड़ता है। सड़क बन जाने से किसानों का जीवन आसान हो जाएगा।
3. झाडला से जामोनिया गणेश मार्ग (दूरी 5 किलोमीटर) , यह मार्ग सबसे ज्यादा बदहाल है। ग्रामीणों के अनुसार लगभग 10-15 वर्ष पूर्व इस सड़क को आधी दूरी तक मनरेगा योजना के तहत बनाया गया था, लेकिन अब उसकी हालत और भी ज्यादा खराब हो चुकी है। सड़क में गहरे गड्ढे हैं और बारिश में उनमें पानी भर जाता है। इसी मार्ग से सैकड़ों किसान अपनी खेती करने जाते हैं और सैकड़ों बच्चे झाडला के निजी व शासकीय विद्यालयों में पढ़ने आते-जाते हैं, जिन्हें रोजाना जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है।
सात गांवों के सैकड़ों लोग रोज होते हैं परेशान- इन तीनों मार्गों से सात गांवों के सैकड़ों लोग प्रतिदिन काम-काज के लिए गांव से बाहर जाते हैं। बरसात में कीचड़ से गुजरना उनकी रोजमर्रा की मजबूरी बन गई है। विद्यार्थियों की पढ़ाई, किसानों की खेती और आम लोगों का बाजार से संपर्क, सब कुछ इस बदहाल सड़क की वजह से प्रभावित हो रहा है।ग्रामीणों ने शासन से उक्त तीनों सड़कों के शीघ्र निर्माण की मांग की है।
इस संबंध में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, नरसिंहगढ़ के इंजीनियर राकेश भटेला का कहना है कि, मैं उक्त तीनों सड़कों को दिखवाता हूं। अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों की इस वर्षों पुरानी मांग पर प्रशासन कब तक अमल करता है और कब तक झाडला को कीचड़ से मुक्ति मिलती है।