राजगढ़ (नवदुनिया प्रतिनिधि)। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को राजस्थान व गुजरात के कर्मचारियों की अपेक्षा कम ग्रेड-पे भुगतान किया जा रहा है। इसको लेकर कैबिनेट से 2018 में अनुमोदन मिल चुका है, लेकिन वित्त विभाग ने कोई संज्ञान नहीं लिया। अनदेखी के चलते अनिश्चितकालीन हड़ताल का रूख अख्तियार करना पड़ रहा है। इसी मांग को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी व पर्यवेक्षकों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया कि महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों में लंबित मांगों को पूरा न किये जाने के विरोधस्वरूप विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। इसी तारतम्य में महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी और पर्यवेक्षक 21 मार्च से प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे। इस हड़ताल में राजगढ़ जिले के समस्त परियोजना अधिकारी एवं पर्यवेक्षक भी शामिल रहेंगे। ज्ञापन में कहा गया कि प्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग का अमला लंबे समय से अपनी मांगों को शासन के विभिन्ना स्तरों पर रखता आया है, लेकिन कई वर्षों के बाद भी उनकी मांगों के संबंध में विभाग द्वारा लगातार अनदेखी की जा रही है। प्रदेश के परियोजना अधिकारियों का ग्रेड पे पूरे देश मे सबसे कम है। जहां छत्तीसगढ़, राजस्थान और गुजरात जैसे प्रदेशों में परियोजना अधिकारियों का ग्रेड-पे 5400 रुपये है वहीं मध्यप्रदेश में यह ग्रेड-पे केवल 3600 रुपए है। जिसे बढ़ाकर 4800 रुपए की जाने की मांग तथा पर्यवेक्षको का ग्रेड पे 2400 से बढ़कर 3600 किये जाने की मांग भी परियोजना अधिकारी एवं पर्यवेक्षक संयुक्त मोर्चा द्वारा की जा रही है। ज्ञापन में कहा कि उक्त मांग के संबंध में कैबिनेट द्वारा अनुमोदन 2018 में ही मिल चुका है, लेकिन पिछले 4 वर्षों से वित्त विभाग द्वारा इस विषय में कोई संज्ञान नहीं लिया गया। जिसके कारण भी विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है। इस मांगो के साथ-साथ परियोजना अधिकारियों के आहरण वितरण अधिकार, संविदा पर्यवेक्षकों के नियमितीकरण जैसी 7 सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम तैयार करके 21 मार्च को जिला अध्यक्ष परियोजना अधिकारी संघ- हरीश हरदेनिया तथा जिला अध्यक्ष पर्यवेक्षक संघ-श्रीमती निर्मला अलावे द्वारा संयुक्त रूप से कलेक्टर महोदय को सौंपा गया।