
नवदुनिया न्यूज, सारंगपुर। शिक्षा विभाग द्वारा लागू की जा रही ई-अटेंडेंस व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है। राज्य शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि 1 जुलाई 2026 से स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत सभी शिक्षक, अतिथि शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी हमारे शिक्षक ऐप के माध्यम से अनिवार्य रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे।
नई व्यवस्था के तहत ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होने पर नियमित शिक्षकों का वेतन तथा अतिथि शिक्षकों का मानदेय रोका जा सकता है।
शासन का उद्देश्य विद्यालयों में कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करना और फर्जी हाजिरी पर अंकुश लगाना बताया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था शिक्षकों के लिए नई परेशानियां खड़ी करती दिखाई दे रही है। विकासखंड में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर सैकड़ों शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि आगामी सत्र में अतिथि शिक्षकों की नियुक्तियां भी प्रस्तावित है।
ऐसे में हजारों कर्मचारियों को प्रतिदिन मोबाइल ऐप के माध्यम से जियो-फेंसिंग आधारित उपस्थिति दर्ज करनी होगी। ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों का कहना है कि कई विद्यालयों में इंटरनेट नेटवर्क बेहद कमजोर है।
कई बार विद्यालय परिसर में मौजूद रहने के बावजूद ऐप लोकेशन स्वीकार नहीं करता और शिक्षक को विद्यालय से बाहर दर्शाता है। सर्वर डाउन, ऐप क्रैश, जीपीएस की त्रुटियां और मोबाइल डेटा की बढती खपत जैसी समस्याएं भी लगातार सामने आ रही हैं।
संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराएं। विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने अधीनस्थ सभी प्राचार्यों, शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा ई-अटेंडेंस का उपयोग सुनिश्चित करें। प्राचार्यों को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि वे ई-अटेंडेंस के सही ढंग से दर्ज होने का ध्यान रखें।
यदि ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्राचार्य की होगी। संचालनालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो शिक्षक हमारे शिक्षक एप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करेंगे, उन्हें उस दिन अनुपस्थित माना जाएगा। ऐसे शिक्षकों को उस दिन का वेतन भी नहीं दिया जाएगा। यह निर्देश 1 जुलाई से सख्ती से लागू हो जाएगा।
शिक्षक संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि पिछली बार भी ई-अटेंडेंस व्यवस्था तकनीकी समस्याओं से घिरी रही थी और इस बार भी स्थिति में विशेष सुधार नहीं दिख रहा है। ऐप के बार-बार हैंग होने, सर्वर नहीं चलने, मोबाइल डेटा और बैटरी की अधिक खपत जैसी समस्याओं से शिक्षक परेशान है। कई बार शिक्षक विद्यालय में उपस्थित रहता है, लेकिन ऐप लोकेशन के आधार पर पूछता है कि वह स्कूल से दूर क्यों है।
संगठन ने फेस रीडिंग या बायोमेट्रिक मशीन जैसी वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने की मांग की है। वहीं दूसरी तरफ शिक्षक संगठन ने ई-अटेंडेंस के विरोध में दायर याचिका को उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त किए जाने के बाद अब शासन से व्यावहारिक समाधान की मांग तेज कर दी है।
जियो-फेंसिंग एक लोकेशन आधारित डिजिटल तकनीक है, जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति की निर्धारित स्थान पर मौजूदगी की पुष्टि की जाती है। शिक्षक का मोबाइल जीपीएस चालू होने पर ऐप उसकी वर्तमान लोकेशन को विद्यालय की निर्धारित सीमा से मिलाता है। यदि शिक्षक तय दायरे में है तो उपस्थिति दर्ज हो जाती है, अन्यथा नहीं।
इससे फर्जी उपस्थिति पर रोक लगाने और निगरानी मजबूत करने का दावा किया जा रहा है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर नेटवर्क, जीपीएस त्रुटि, गलत लोकेशन मैपिंग और ऐप की तकनीकी खामियां शिक्षकों के लिए बडी समस्या बन रही हैं। कई बार स्कूल परिसर में मौजूद रहने के बावजूद उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती।