पचोर में लगे मेले में 2005 में युवती से किया था दुष्कर्म, जमानत पर बाहर आने के बाद हो गया था फरार, 21 साल बाद गिरफ्तार
पिछले 21 साल से पुलिस से बचने के लिए कई राज्यों की खाक छानता रहा। पुलिस ने राजस्थान के कोटा से आरोपित को धर दबोचा।
Publish Date: Tue, 29 Sep 2026 08:25:07 PM (IST)Updated Date: Tue, 29 Sep 2026 08:26:56 PM (IST)
प्रतीकात्मक।HighLights
- सर्कस टीम के साथ कोटा से पचोर आया था
- पत्नी बच्चे रहते हैं पैतृक गांव, 2009 से नहीं पहुंचा
- मोबाइल नंबर मिला, फोन कर पुलिस ने पकड़ा
नईदुनिया प्रतिनिधि, राजगढ़। 21 साल साल पहले 22 वर्ष की आयु में एक युवक ने पचोर में आयोजित हुए मेले में युवती के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था। इसके बाद मामला न्यायालय पहुंचा और कोर्ट ने सात साल की सजा सुनाई। लेकिन आरोपित युवक जमानत पर जब बाहर आया तो गायब हो गया।
पिछले 21 साल से पुलिस से बचने के लिए कई राज्यों की खाक छानता रहा। पुलिस ने राजस्थान के कोटा से आरोपित को धर दबोचा।
सर्कस टीम के साथ कोटा से पचोर आया था
पुलिस के मुताबिक पहले पचोर में मेला लगाता था, जिसमें सर्कस आते थे। ऐसे में ग्राम पेगमपुर, थाना मलवा, जिला फतेपुर का रहने वाला चंद्रशेखर साहू 2005 में राजस्थान के कोटा के उद्यौगनगर थाना क्षेत्र के गोविंद नगर में रहता था। वह मार्च 2005 में तत्कालीन एक सर्कस टीम के साथ कोटा से पचोर आया था, जबकि दूसरी टीम में एक युवती थी।
हाई कोर्ट से जमानत पर बाहर आ गया
तब चंद्रशेखर व एक अन्य युवक द्वारा युवती के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दे दिया। घटना के बाद एफआईआर हुई व मामला कोर्ट पहुंचा तो न्यायालय ने उसी वर्ष दोनों आरोपितों को सात साल की सजा सुनाई।सजा के बाद चंद्रशेखर ने हाईकोर्ट की शरण ली तो जमानत पर बाहर आ गया। लेकिन बाहर आने के बाद वह लापता हो गया।
पुलिस से बचने के लिए कई प्रदेशों में घूमता रहा
वह पुलिस से बचने के लिए जम्मू कश्मीर, उप्र, उत्तराखंड, राजस्थान सहित कई प्रदेशों में घूमता रहा। पुलिस से बचने के लिए वह राजस्थाल, उप्र, जम्मीकशमीर सहित अलग-अलग प्रदेशों व शहरों में मजदूरी करता रहा। पुलिस उसे खोजने के लिए कोटा व उसके पैतृक गांव भी पहुंची लेकिन नहीं मिला।
पत्नी बच्चे रहते हैं पैतृक गांव, 2009 से नहीं पहुंचा
पुलिस के मुताबिक आरोपित विवाहित है और उसके दाे बच्चे भी हैं। लेकिन विवाह घटना को अंजाम देने के पहले हुआ या बाद में यह स्पष्ट नहीं है। उसकी पत्नी व बच्चे लंबे समय से पैतृक गांव पेगमपुर उप्र में रहते हैं। पुलिस के मुताबिक उसे खोजने के लिए वह पैतृक गांव भी पहुंची। लेकिन परिजनों ने बताया कि वह आखरी बार घर 2009 में पहुंचा था। इसके बाद से नहीं लौटा।
मोबाइल नंबर मिला, फोन कर पुलिस ने पकड़ा
पुलिस के मुताबिक वह मजदूरी करता था। इसलिए उसे कोटा में भी काफी लोग जानते थे। जैसे-तैसे उसका मोबाइल नंबर प्राप्त किया। इसके बाद उसकी तकनीकी टीम की मदद से लोकेशन निकाली गई। जब लोकेशन कोटा की मिली तो टीम सिविल ड्रेस में पहुंची। एक चौराहे पर वह मौजूद था। वहां पहुंचकर जैसे ही फोन किया तो चंद्रशेखर का फोन बजा। तब इसको भांपकर पकड़ लिया।
घटना के समय वह 22 वर्ष का था। मूल रूप से उप्र का रहने वाला है। घटना के समय कोटा में रहता था और सर्कस टीम के साथ पचोर आया था। हमने इसे कई प्रदेशों में तलाशा, लेकिन नहीं मिला। फिर कोटा से उसे मोबाइल के जरिए पकड़ा है।
-गोविंद गोयल, विवेचना अधिकारी पुलिस।