
राजेश शर्मा, नईदुनिया, राजगढ़। मध्य प्रदेश के ब्यावरा से गुजरने वाली अजनार नदी पिछले चार दिनों से इंटरनेट मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इसकी वजह एक हैरान करने वाला दावा है, जो ब्यावरा के छात्र सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ 'बिट्टू तबाही' ने किया। बिट्टू का कहना है कि उसने अकेले छह महीने की मेहनत से नदी को साफ कर दिया है। बिट्टू की रील इंटरनेट मीडिया पर सराहना बटोर रही है, लेकिन स्थानीय लोग और प्रशासन के अधिकारी इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं।
राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ के ऊंचे पठार से निकलने वाली अजनार नदी मध्य प्रदेश में लगभग 52 किलोमीटर बहकर ब्यावरा पहुंचती है। इसके बाद नराहेड़ा के पास राजस्थान में प्रवेश करती है और मनोहरथाना के निकट घोड़ा पछाड़ नदी में मिल जाती है। संगम के बाद दोनों नदियों की संयुक्त धारा परवन नदी कहलाती है, जो अंततः कालीसिंध नदी में मिल जाती है।
छात्र बिट्टू ने इंस्टाग्राम पर नदी की सफाई करते हुए कुछ वीडियो पहले के और अब की तस्वीरें साझा की हैं। दावा किया है कि 26 जनवरी 2026 को उसने अजनार की सफाई का संकल्प लिया था। उसने अकेले नदी के तीन घाटों- रामेश्वर घाट, विसर्जन घाट और अंजनीलाल मंदिर के पीछे से कचरा निकाला और स्कूटी पर रखकर नदी से करीब चार किलोमीटर दूर अरन्या गांव स्थित डंप साइड पर फेंका।
स्थानीय लोगों ने इस दावे को झुठलाते हुए कहा कि कहा कि बिट्टू कभी-कभी कचरा निकालता रहा है, लेकिन इससे नदी का कोई हिस्सा साफ नहीं हुआ। बाढ़ के पानी की वजह से नदी कुछ साफ दिख जरूर रही है, लेकिन गंदगी अभी बरकरार है।
स्थानीय नागरिक रचना भार्गव ने कहा कि वह प्रतिदिन अस्पताल रोड के पुल से गुजरती हैं, जहां गंदगी फैली रहती है। एक अन्य स्थानीय निवासी कल्याण सिंह तोमर का कहना है कि अजनार नदी काफी गंदी है और इसे साफ करवाने के लिए सरकार को आगे आना चाहिए।
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बता दें कि अजनार नदी की सफाई के लिए अजनार बचाओ संगठन ने भी अभियान चलाया था, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि नदी इतनी गंदी है कि इसे संगठनों के माध्यम से साफ करना संभव नहीं है। सरकार ही प्रयास करे तो ही सफाई संभव है। अजनार बचाओ समिति के सदस्य रामभील ने कहा कि जब तक सरकार गंदे नालों को नदी में मिलने से नहीं रोकेगी और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बनाएगी, तब तक नदी को साफ करना संभव नहीं है।
अजनार बचाओ समिति द्वारा कुछ प्रयास किए गए थे, लेकिन नदी में इतनी गंदगी है कि इसे सहज प्रयासों से साफ करना संभव नहीं हो सका। ऐसे में, इंटरनेट मीडिया पर जो लोग नदी साफ करने का दावा कर रहे हैं, वह पूरी तरह फर्जी है। हालांकि अभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 14.77 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं, जिससे गंदे नालों का निस्तारण किया जाएगा। -इकरार अहमद, सीएमओ, नपा ब्यावरा।