
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम। ग्राम जड़वासा कला में फूड प्वाइजनिंग से एक परिवार के पांच लोगों की तबीयत बिगड़ गई। इनमें से चार को मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया, जहां पांच वर्षीय बालक की मौत हो गई। सभी ने दो दिन पहले बालम ककड़ी खाई थी। उसके बाद ही उनकी तबीयत बिगड़ी। माना जा रहा है कि ककड़ी से प्वाइजनिंग हुई होगी।
जानकारी के अनुसार 36 वर्षीय मांगीलाल पाटीदार निवासी ग्राम जड़वासा कला, उनकी पत्नी 33 वर्षीय कविता, पुत्र पांच वर्षीय क्रियांश, पुत्री 11 वर्षीय दक्षिता व आठ वर्षीय साक्षी ने एक अक्टूबर की शाम बालम ककड़ी खाई थी।
बुधवार सुबह करीब पांच बजे उन्हें उल्टियां होने लगी तो पांचों को शहर के एक निजी अस्पताल में ले जाकर भर्ती कराया गया। तबीयत ठीक होने पर कुछ समय बाद सभी लोग घर चले गए थे।
पडोसी सत्यनारायण पाटीदार ने बताया कि बुधवार व गुरुवार की दरमियानी रात करीब दो से तीन बजे के बीच कविता, क्रियांश, दक्षिता व साक्षी की पुन: तबीयत बिगड़ी तो उन्हें मेडिकल कालेज ले जाकर भर्ती कराया गया।
जहां कुछ देर बाद क्रियांश की मौत हो गई। कविता, दक्षिता व साक्षी का असीयू में इलाज चल रहा है। सभी की तबीयत बालम ककड़ी खाने से ही बिगड़ी थी।
बालम ककड़ी मध्य भारत का मौसमी विशेष खीरा है। मध्य भारत के कुछ हिस्सों में आम तौर पर पाई जाने वाली विशाल ककड़ी की मौसमी किस्म, बालम ककड़ी एक ताज़ा देशी सामग्री है जो हाइड्रेटिंग है और कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती है
खीरा दिन या रात के किसी भी समय खाया जा सकता है क्योंकि यह शरीर को संतुलित करने में मदद करता है और शरीर में पानी की मात्रा को बनाए रखने में मदद करता है। अगर आपका पाचन कमजोर या खराब है तो आपको रात में इसका सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि खीरे के बीज पचने में भारी होते हैं।