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एमपी में BJP विधायक का तंज... बोले- IAS अफसरों की मुट्ठी में आया सिस्टम, नेताओं को तवज्जो नहीं!

रतलाम की आलोट सीट से भाजपा विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय ने रविवार को अपने यूट्यूब चैनल, फेसबुक अकाउंट पर वीडियो बयान जारी कर मध्य प्रदेश में शक्ति का के...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Sun, 31 May 2026 10:43:42 PM (IST)Updated Date: Sun, 31 May 2026 10:43:42 PM (IST)
एमपी में BJP विधायक का तंज... बोले- IAS अफसरों की मुट्ठी में आया सिस्टम, नेताओं को तवज्जो नहीं!
भाजपा विधायक डॉ. चिंतामणि मालवी

नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम। रतलाम की आलोट सीट से भाजपा विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय ने रविवार को अपने यूट्यूब चैनल, फेसबुक अकाउंट पर वीडियो बयान जारी कर मध्य प्रदेश में शक्ति का केंद्र कार्यपालिका के बनने की बात कही। उन्होंने प्रशासनिक ढांचे की व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी को लेकर सवाल खड़े करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सारी शक्ति जनता के पास है, लेकिन व्यावहारिक तौर पर ऐसा नहीं है।

विधानसभा कम चलती है तो सवाल नहीं पूछ पाते तो सारी ताकत अधिकारियों के पास आ गई है। लोकतांत्रिक व्यवस्था अप्रत्यक्ष रूप से कॉर्पोरेट मॉडल में बदल रही है। आईएएस अधिकारियों पर दंड की कोई व्यवस्था नहीं है। जनप्रतिनिधियों की बातों को तवज्जो नहीं दी जा रही। भ्रष्टाचार आदि पर कार्रवाई के लिए सरकार से अनुमति लेना पड़ती है।


डॉ. मालवीय ने कहा कि राज्य में कार्यपालिका के पास अत्यधिक शक्तियां हो गई हैं। कानून-व्यवस्था, आपदा प्रबंधन, विकास, भू-प्रबंधन, राजस्व, मजिस्ट्रेट संबंधी अधिकार एक ही अधिकारी के पास होने से व्यवस्था बिगड़ रही है।

जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के मामले गिनाए

मालवीय ने मंदसौर की महापौर रमा देवी गुर्जर से कलेक्टर के चैंबर में नहीं मिलने, रतलाम जिला पंचायत अध्यक्ष लालाबाई को कलेक्टर से मिलने के लिए सीढ़ियों पर धरना देने, पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी के एसपी ऑफिस में धरना देने आदि का उल्लेख किया।

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मालवीय ने कहा कि केंद्र सरकार में कैबिनेट सचिव के बाद विभाग का एक सचिव होता है, जबकि राज्यों में मुख्य सचिव के अलावा कई अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव होते हैं। अधिकारी के पास पांच से सात विभाग जबकि मंत्री के पास एक ही विभाग होता है। इससे अधिकारियों का प्रभाव बढ़ता है और जनप्रतिनिधियों को पर्याप्त महत्व नहीं मिल पाता।

कलेक्टर की व्यवस्था अंग्रेजों की देन

मालवीय ने कहा कि ब्रिटिश काल में हर जिले में डीएम की व्यवस्था लागू की गई, लेकिन वर्तमान हालात में प्रशासनिक ढांचे की समीक्षा और पुनर्गठन की आवश्यकता है।