
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम। नकली सोने-चांदी के आभूषण असली बताकर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के छह सदस्यों को माणकचौक पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनमें तीन पुरुष और तीन महिलाएं शामिल हैं। आरोपित पिछले 11 दिन से स्टेशन रोड थाना क्षेत्र के महावीर नगर में किराये के मकान में रह रहे थे। पुलिस मकान मालिक की संलिप्तता की भी जांच करेगी।
आरोपितों के कब्जे से 11.80 किलोग्राम नकली सोने के आभूषण व मूर्ति, 2.20 किलोग्राम नकली चांदी के आभूषण, 400 ग्राम वजन के चांदी के नौ सिक्के, 30 हजार रुपये और एक इलेक्ट्रिक तौल कांटा जब्त किया है। गिरोह के सदस्य हरियाणा के फरीदाबाद से रतलाम आए थे। वे नकली आभूषणों को असली बताकर व्यापारियों और आमजन को ठगी का शिकार बनाने की फिराक में थे। गिरोह के साथ एक दुधमुंहा बच्चा भी था।
एसपी अमित कुमार ने रविवार दोपहर पुराने कंट्रोल रूम में मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 16 अक्टूबर को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ महिला और पुरुष रतलाम में नकली सोने-चांदी के आभूषण बेचने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद माणकचौक पुलिस की विशेष टीम ने कार्रवाई की।
पूछताछ में आरोपितों ने 16 अक्टूबर को फरियादी मुस्तफा तांबावाला की बर्तन की दुकान पर नकली सोने का टुकड़ा असली बताकर ठगी करना स्वीकार किया है। आरोपितों ने उत्तर प्रदेश और बिहार में भी ठगी की घटनाओं में शामिल होना स्वीकार किया है। अन्य वारदातों, गिरोह के काम करने के तरीके और उसकी गतिविधियों की जानकारी जुटा रहे हैं।
गिरफ्तार आरोपितों में 29 वर्षीय सागर पुत्र गणेश राठौर, 55 वर्षीय गणेश पुत्र गंगाराम राठौर और 36 वर्षीय मानसिंह पुत्र वीरचन्द राय शामिल हैं। सागर और गणेश हरियाणा के जिला फरीदाबाद के बल्लभगढ़ स्थित आदर्श नगर के निवासी हैं, जबकि मानसिंह लखनऊ उत्तर प्रदेश के थाना सरोजनी नगर क्षेत्र के बदालीखेड़ा का निवासी है। तीन महिला आरोपितों में 42 वर्षीय रामादेवी पत्नी लक्ष्मण राठौर, 20 वर्षीय सोनिया पत्नी दशरथ राठौर और 21 वर्षीय डोली पत्नी दीपक राठौर शामिल हैं। तीनों हरियाणा के जिला फरीदाबाद के बल्लभगढ़ स्थित आदर्श नगर क्षेत्र की निवासी हैं।
एएसपी ग्रामीण विवेक कुमार लाल, एएसपी शहर राकेश पंद्रो और सीएसपी सत्येंद्र घनघोरिया के मार्गदर्शन में की गई कार्रवाई में थाना प्रभारी विक्रमसिंह चौहान, एसआइ लोकेन्द्रसिंह डाबर, एएसआइ गौरचन्द परमार, प्रधान आरक्षक राजसिंह, जितेंद्र जायसवाल, आरक्षक अविनाश मिश्रा, हेमंत यादव, सुरेन्द्रसिंह, पंकज, कुलदीप जाट, महेश, जीवन विश्वकर्मा, धीरज यादव, महिला आरक्षक वर्षा पाटीदार, मेघा, भारती पंवार, प्रवीणा सोलंकी, वर्षा कैथवास की भूमिका रही।
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गिरोह ऐसे व्यापारियों को निशाना बनाता था, जो उम्रदराज होने के साथ सोने-चांदी की पहचान और ठगी के तरीकों से कम परिचित हों। आरोपित परिवार बनकर पहुंचते थे। उनका पहनावा और व्यवहार ऐसा होता था कि आसानी से संदेह न हो। वे अपने साथ पोटली लेकर जाते और घर की खुदाई या किसी अन्य स्थान पर गड़ा धन मिलने की बात कहकर उसे बेचने का झांसा देते थे।
आरोपित पोटली में रखे पूरे माल को तौलकर एकमुश्त सौदा करने की शर्त रखते थे। वे बाजार भाव से करीब आधी कीमत पर सोना बेचने की बात कहते और रुपयों की जरूरत का हवाला देकर व्यापारियों को विश्वास में लेने का प्रयास करते थे। इसके बाद नकली सोने को असली बताकर ठगी की कोशिश करते थे।
मुस्तफा तांबावाला को ठगने के लिए भी आरोपित दो-तीन बार उसकी दुकान पर पहुंचे थे। गिरोह का मास्टरमाइंड सागर है। रामादेवी गणेश की भाभी, सोनिया गणेश की बहू और डोली गणेश के भतीजे की पत्नी है। रिश्तेदारों के साथ परिवार बनकर पहुंचना गिरोह के ठगी करने के तरीके का हिस्सा था। सभी को एक दिन के रिमांड के बाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।