नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम। अचानक प्लान बनाकर सफर करने वालों के लिए रेलवे के नए नियम में वेटिंग टिकट मिलना भी मुश्किल भरा हो गया है। हालात यह है कि मुंबई, दिल्ली, पुणे सहित अन्य शहरों के लिए सप्ताह भर आगे भी वेटिंग टिकट नहीं मिल रहा है। दरअसल, रेलवे में 16 जून से लागू हुआ नया नियम पीक सीजन में उन यात्रियों पर भारी पड़ गया है, जिन्होंने अपनी यात्रा का प्लान अचानक बनाया है या जिनको इमरजेंसी में सफर करना पड़ रहा है।
मुंबई, पुणे, दिल्ली सहित देश के अधिकांश रूटों की ट्रेनों में इस माह के अंत तक रिग्रेट की स्थिति होने के कारण वेटिंग लिस्ट के टिकट नहीं बन पा रहे हैं। रेलवे ने 16 जून से स्लीपर और एसी सहित सभी प्रकार की आरक्षित श्रेणी में सीटों के सापेक्ष वेटिंग लिस्ट के टिकट जारी करने की सीमा 25 प्रतिशत कर दी है।
पुणे निवासी संदीप पंड्या व जया पंडया को 27 जून को रतलाम से पुणे जाना है। इंदौर-दौड़ एक्सप्रेस की स्लीपर श्रेणी का आरक्षण का प्रयास किया तो स्थिति रिग्रेट निकली। एसी थर्ड, एसी थर्ड इकोनोमी, एसी सेकेंड तक में टिकट बनाने की कोशिश की, लेकिन सभी में रिग्रेट के कारण वेटिंग लिस्ट के टिकट अब नहीं बन रहे हैं। यह स्थिति आगे के दिनों में भी समान ही दर्शाई जा रही है।
अब जिस श्रेणी में जनरल कोटा, रिमोट लोकेशन कोटा और पूल कोटा में जितनी सीटें होंगी, उसका 25 प्रतिशत तक ही वेटिंग लिस्ट के टिकट जारी होंगे। वेटिंग लिस्ट 25 प्रतिशत से अधिक बढ़ते ही स्थिति रिग्रेट हो जाएगी। सेंटर आफ रेलवे इन्फारमेशन सिस्टम ने यात्री रिजर्वेशन सिस्टम में यह बदलाव भी कर दिया है।
इसका असर यह हो रहा है कि प्रमुख ट्रेनों में टिकट नहीं मिल पा रहा है। हालांकि मुंबई, पुणे की ओर जाने के लिए रतलाम के पीछे उज्जैन, इंदौर से टिकट लेने पर कुछ ट्रेनों में वेटिंग टिकट मिल रहा है, लेकिन इसके लिए ज्यादा किराया देना पड़ रहा है। यही स्थिति दिल्ली की ओर जाने वाली ट्रेनों की भी है। कुछ ट्रेनों में तो 20 से 22 वेटिंग में ही रिग्रेट आप्शन आ रहा है।
ऐसे यात्री जिनके पास कंफर्म टिकट हैं, उनको वेटिंग लिस्ट की सीमा तय होने पर राहत मिल सकती है, हालांकि कोच अटेंडेंट और टीटीई वेटिंग व बेटिकट यात्रियों को आरक्षित बोगियों में सफर कराते हैं। इसकी शिकायतें भी लगातार आ रही हैं।