
रतलाम। आईएनएस विक्रमादित्य( INS Vikramaditya Fire) में शुक्रवार को लगी आग को बुझाने में रतलाम के लेफ्टिनेंट कमांडर डीएस चौहान शहीद हो गए। इस दौरान उन्होंने अपने पांच साथियों की भी जान बचाई। अपने इकलौते बेटे की शहादत की खबर जब से मां टमाकुंवर को मिली है, तब से वो बेसुध हो गई हैं। आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। रह-रहकर बेटे का चेहरा उनकी आंखों के सामने आ रहा है। लेकिन इस हाल में भी मां को बेटे पर फक्र है, तभी तो रोते-रोते भी उन्होंने कहा कि, मेरा रियल हीरो चला गया। मां ने बताया कि पांच लोग आग में फंसे हुए थे। लेकिन बेटे ने अपनी जान की परवाह किए बगैर उनको बाहर निकाला। लेकिन इस फर्ज को निभाने में वो शहीद हो गए। आज उनका पार्थिव देह रतलाम पहुंचेगा। जहां पूरे सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार होगा।
पिता लंबे वक्त से परिवार के साथ नहीं रह रहे थे। ऐसे में मां ने काफी संघर्षों के बाद बेटे को इंजीनियर बनाया था। तभी तो अपने कलेजे के टुकड़े को खोने का गम़ उनकी आंखों से बरसता रहा। वो बार-बार यही कहती रहीं कि मेरे बेटा रियल होरा था। लेकिन भगवान ने एक झटके में मेरा सबकुछ छिन लिया। भगवान को मुझपर दया नहीं आई। ये मंजर जिसने भी दिखा उसका दिल भी भर आया।
शुरू से ही वर्दी के प्रति लगाव की वजह से इंजीनियर के बाद भी बेटे ने भारतीय नौसेना में जाने का फैसला किया और एक दिन अपने इस सपने को पूरा किया। लेफ्टिनेंट कमांडर डीएस चौहान को नेवी में 6 साल हो गए थे और वो फिलहाल कर्नाटक के कारवार में आईएनएस विक्रमादित्य पर तैनात थी। शुक्रवार को अचानक इस विमानवाहक पोत में आग लग गई। ऐसे में साथियों के साथ वो आग बुझाने के काम में जुट गए। वो आग बुझाने में तो कामयाब हो गए। लेकिन फेफडों में धुआं भर जाने की वजह से वो बेहोश हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
बता दें कि लेफ्टिनेंट कमांडर डीएस चौहान की पिछले महीने 10 मार्च को ही आगरा में शादी हुई थी। वो 23 मार्च को छुट्टी पूरी करने के बाद शिप पर लौटे थे। उनकी पत्नी आगरा में प्रोफेसर हैं।