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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 10, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

गिरोह का पर्दाफाश : दिन में रैकी और रात में वारदात

चोरी और लूट की वारदातें करने वाले जिस गिरोह का पर्दाफाश किया है, वह दरअसल ऑन व्हील्स गिरोह है।

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Publish Date: Thu, 10 Jul 2014 01:08:20 AM (IST)Updated Date: Thu, 10 Jul 2014 12:59:36 PM (IST)
गिरोह का पर्दाफाश : दिन में रैकी और रात में वारदात

रतलाम। पुलिस ने जिले में चोरी और लूट की वारदातें करने वाले जिस गिरोह का पर्दाफाश किया है, वह दरअसल ऑन व्हील्स गिरोह है, जो चार पहिया वाहन का उपयोग वारदात में करता है। गिरोह के सदस्य पहले मंदसौर व नीमच के पास किसी जगह एकत्र होते व कार से रतलाम पहुंच वारदात को अंजाम देते थे। शहर के अलावा हाईवे से लगे गांवों व कस्बों में दिन या शाम को रैकी कर वारदात स्थान का चयन चले जाते। रात में किसी ढाबे में भोजन करते और 12 बजे बाद धावा बोलकर जेवर, रुपए, घरेलू सामान समेट कर कार से भाग निकलते थे। पुलिस जांच में पता चला कि मंदसौर व रतलाम जिले के बांछड़ा गिरोह का इन वारदातों में हाथ है। इस पर गिरोह के दो सदस्यों आरोपी राहुल और अजय को दबोच लिया गया।

एसपी डॉ. जीके पाठक ने बुधवार को पत्रकारवार्ता में गिरोह के दो सदस्यों व उनसे 25 लाख रुपए का माल जब्त करने की जानकारी देते हुए बताया कि विवचेना में पता चला कि नीमच जिले के मनासा क्षेत्र में बांछड़ा गिरोह का कुछ माह से रतलाम जिले में मूवमेंट बना हुआ है। गिरोह के सदस्य कभी सिल्वर तो कभी काले रंग की मारुति वेन में जिले में आते-जाते हैं।


हाईवे स्थित टोलनाकों के सीसीटीवी कैमरों के फुटैज खंगाले तो कई बार उक्त वाहनों की आवाजाही घटना वाले दिन व रात में पाई गई। सूचना की पुष्टि होने पर उक्त कारें इस्तेमाल करने वालों की जानकारी निकालकर गिरोह के सदस्य राहुल व अजय को गिरफ्तार किया गया। चार सदस्य हाथ नहीं आए, उनकी तलाश जारी है। राहुल और अजय बुधवार को न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने उन्हें 14 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर रखने के आदेश दिए। आरोपी लूट व चोरी में मिले जेवरों को जल्दी नहीं बेचते हैं। उन्होंने कुछ जेवर अपने तो कुछ रिश्तेदारों के घर रखे थे। मनासा क्षेत्र के एक व्यापारी को भी कुछ जेवर बेचने की जानकारी मिली है। व्यापारी से पूछताछ की जा रही है।

दूर खड़ी करते थे कार

आरोपी वारदात करने जिस कार से जाते थे, उसे वारदात स्थल से आधा या एक किलोमीटर दूर खड़ा करते। चालक वाहन के पास ही रहता और अन्य सदस्य वारदात स्थल पहुंचते। घरों की छत पर या ताले, नकूचे तोड़कर घरों में घुसते और जेवर व रुपए चुराते। यदि कहीं लोग जाग कर विरोध करते तो हथियारों से डरा-धमकाकर उन्हें घरों में कैद कर देते थे। वारदात करने के बाद जिस रास्ते से आते उसी रास्ते से न भागते हुए अन्य रास्तों से कार तक पहुंच कर निकल जाते थे, ताकि किसी के देखने पर पुलिस को उनके भागने के रास्ते का पता न चल सके।

मारपीट में सावधानी

पूछताछ में आरोपी राहुल व अजय ने बताया कि वे व गिरोह के सदस्य लोगों के जागने या पीछा करने पर गंभीर चोट पहुंचाने से बचते थे। क्योंकि ऐसी स्थिति में बवाल होने व पुलिस द्वारा ज्यादा छानबीन करने की आशंका रहती है। इसलिए वे विरोध करने या शोर मचाने वालों के साथ छिटपुट मारपीट और भयभीत कर भागने का प्रयास करते थे। 28 मई 2014 की ग्राम सेमलिया में महेश उर्फ नाना गुर्जर के परिवार के सदस्यों के जागने व विरोध करने पर उनके साथ मारपीट कर नाना को कमरे में बंद कर दिया था। इसी प्रकार भाटी बड़ौदिया में कमलेश पाटीदार व उनकी पत्नी घर के बाहर सो रहे थे। दोनों पर टार्च की रोशनी डाली थी ताकि वे चेहरे न पहचान सकें। उन्हें डरा-धमका कर माल ले उड़े थे।

शक न हो इसलिए...

पुलिस सूत्रों के अनुसार पारदी गिरोह घटनास्थल के पास गंदगी फैलाते हैं तथा आदिवासी गिरोह के सदस्य लोगों के विरोध करने पर पत्थर बरसाते हैं। बांछड़ा गिरोह जिले में पहली बार इतनी वारदातें करने के मामले में पकड़ में आया है। गिरोह पर शक न हो इसलिए उन्होंने कई जगह पारदी गिरोह की पहचान छोड़ी। इस पर पुलिस को वारदात में पारदी गिरोह का हाथ होने की शंका हुई। पुलिस ने पारदी, आदिवासी, कालबेलिया, कंजर, बाछडा व मेवाती गिरोह पर ध्यान केन्द्रित किया और पूर्व में गिरफ्तारों बदमाशों की जानकारी लेने के साथ उन पर नजर भी रखी। इस दौरान कालबेलिया गिरोह द्वारा पिपलौदा थाना क्षेत्र में पेट्रोल पम्प पर लूट की वारदात का खुलासा हुआ। इसके बाद बांछड़ा गिरोह पकड़ में आया। एसपी ने बताया कि विनोबानगर में हुई लूट के मामले के आरोपियों का सुराग नहीं मिला है। विवेचना की जा रही है।

एशो-आराम के लिए

पूछताछ में राहुल व अजय ने बताया कि वे रईसों की तरह जीवन जीने व एशो-आराम से रहना चाहते थे। धन कमाने का शार्टकट रास्ता उन्हें यही लगा, और उन्होंने वारदातें करना शुरू कर दिया। पुलिस ने जब उनके घरों पर पहुंची, तो घर पक्के बने थे और वहां सुख-सुविधा के एलईडी, कूलर, फ्रीज आदि सामान पाए गए। अच्छे जेवरात अपने घरों की महिलाओं को पहनने के लिए देने व शेष बेचकर रुपया कमाने की उनकी योजना थी।

ऐसे आए पकड़ में

आरोपियों का सुराग मिलने पर पुलिस ने उन्हें पकड़ने की योजना बनाई। बिलपांक टीआई आरसी कोली दल के साथ सादी ड्रेस में आरोपियों के निवास स्थल बांछड़ा डेरे पहुंचे। वहां उन्होंने वूमन ट्रेफिंकिंग के संबंध में लोगों से बातचीत कर जानकारी लेने का प्रयास किया। आरोपियों के वहां होने की पुख्ता जानकारी मिलने पर घेराबंदी कर राहुल व अजय को पकड़ लिया। उनके पकड़े जाने की सूचना से डेरों में अन्य लोग भाग निकले।

गैस सिलेंडर, कार व बर्तन भी मिले

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से विभिन्ना स्थानों से चुराए 15 लाख रुपए के सोने के जेवर (टॉप्स, अंगूठियां, कंगन, मंगलसूत्र, लॉकेट, चूड़िया, पेंडल, बालियां आदि), 6 लाख रुपए कीमत के चांदी के जेवर (पायजब, कंदौरा, छत्र, मुकुट, नारियल, पौची, कड़े, सिक्के, हसली, बिछुड़ी आदि) के अलावा करीब चार लाख रुपए के बर्तन, कपड़े, गैस सिलेंडर आठ हजार रुपए व वारदातों के दौरान उपयोग में लाई गई मारुति वेन जब्त की है।

ये वारदातें कबूली आरोपियों ने

आरोपी ने रतलाम शहर के काटजूनगर, समतानगर, शेरानीपुरा, चांदनीचौक मेहताजी का वास, हाट रोड, वेदव्यास कॉलोनी, विनोबानगर, महेशनगर के अलावा जावरा की शास्त्री कालोनी के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के ग्राम लालाखेड़ा, रोजाना, नागदी, सादाखेड़ी, ग्राम धराड़, राजापुरा, जड़वासाकला, कांडरवासा, बदनारा, अमलेटा, भाटी बड़ौदिया, सेमलिया, बाजेड़ा, भाटी बड़ौदिया आदि स्थानों पर 31 नकबजनी, लूट व चोरी की वारदात करना कबूल किया है।

26 सदस्यीय पुलिस टीम

बांछड़ा गिरोह का पर्दाफाश करने में एसपी सहित 26 पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों की टीम ने काम किया। सभी ने लगातार मेहनत की और सूचना तकनीक का बेहतर उपयोग कर आखिरकार आरोपियों तक जा पहुंचे। गिरोह के अन्य सदस्यों के भी जल्दी पकड़ में आने की उन्होंने उम्मीद जताई है।

इन्हें मिलेगा इनाम

गिरोह का पर्दाफाश करने में एसपी डॉ. पाठक के मार्दगर्शन में एएसपी प्रशांत चौबे, एसडीओपी संजीव मूले, बिलपांक टीआई आरसी कोली, नामली थाना प्रभारी (प्रशिक्षु डीएसपी) चंचल नागर, जावरा शहर टीआई अजय सरवान, क्राइम ब्रांच प्रभारी अय्यूब खान, एएसआई अनिल आचार्य, आरक्षक योगेंद्रसिंह जादौन, हिमांशु यादव, गजेंद्र शर्मा, नारायण जादौन, लक्ष्मीनारायण, तेजसिंह, बिलपांक थाने के एएसआई जगदीश यादव, जेसी हाड़ा, प्रधान आरक्षक शिवनाथ, आरक्षण रणवीर, जुझार, कंजर स्क्वाड के प्रधान आरक्षक महेंद्रसिंह, आरक्षक धर्मेंद्र जाट, देवीदान, यूसुफ की सराहनीय भूमिका रही। वहीं सायबर सेल के आरक्षक मनमोहन शर्मा, हिम्मतसिंह व रितेश ने विशेष भूमिका निभाई। आईजी श्री मधुकुमार ने टीम में शामिल राजपत्रित अधिकारियों को पुलिस महानिदेशक भोपाल से प्रशंसा पत्र व टीम के अन्य कर्मचारियों को 25 हजार रुपए का इनाम दिलाने की घोषणा की है।