Ratlam Mandi: सोना, सेंव और साड़ी के लिए ख्यात रतलाम की मटरफली की महाराष्ट्र व गुजरात के विभिन्न शहरों में मांग बनी हुई है। मंडी में इन दिनों मटर का कारोबार 60 लाख रुपये से अधिक का हो रहा है। प्रतिदिन ढाई से तीन हजार क्विंटल की आवक हो रही है। नब्बे प्रतिशत मटर महाराष्ट्र, गुजरात व राजस्थान के विभिन्न शहरों में भेजी जा रही है। जिले के विभिन्न गांवों में मटर का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है। नवंबर माह के अंतिम सप्ताह से मटर की आवक होने लगी है। शुरू में दस-बीस क्विंटल की आवक होने से मटर 120 से 130 रुपये किलो थोक व 150 से 160 रुपये किलो फुटकर में बिकी। दिसंबर में आवक बढ़ने से दाम घटने लगते हैं। इन दिनों मंडी में प्रतिदिन पांच से साढ़े पांच हजार कट्टे (साठ किलो का एक कट्टा) की आवक हो रही है और दाम 2400 से 2800 रुपये क्विंटल है।
सर्वाधिक मांग महाराष्ट्र व गुजरात में
मटर की ज्यादा खपत महाराष्ट्र व गुजरात में हो रही है। मंडी से प्रतिदिन 15 से 20 ट्रक मटर महाराष्ट्र के मुंबई, नासिक, पुणे, कोल्हापुर तथा गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, बड़ौदा, आणंद आदि नगरों में भेजे जा रहे है। राजस्थान के बांसवाड़ा में भी दो-तीन ट्रक मटर भेजी जा रही है। शाम चार बजे से देर रात तक मंडी में ट्रकों में मटर की बोरियां भरने का काम चलता रहता है। रात दस बजे से ट्रक दूसरे राज्यों के नगरों के लिए रवाना किए जाते है।
यहां होता है सर्वाधिक उत्पादन
जिले में सर्वाधिक मटर धामनोद, रूपाखेड़ा व अन्य गांवों में होती हैं। जिले के विभिन्ना गांवों के अलावा मंडी में समीपस्थ उज्जैन जिले के खाचरौद, बड़नगर, ढोलाना व उनके आसपास के गांवों से भी मटर बेचने किसान आते है। मटर के कारोबार से जहां किसानों को लाभ हो रहा है, वहीं हम्मालों, होटल व्यवसायियों, ट्रांसपोर्ट से जुड़े व अन्य लोगों को भी लाभ मिल रहा है। व्यापारी मुकेश स्वामी ने बताया कि कुछ दिनों में आवक और बढ़ने की संभावना है।