Sharadiya Navratri 2021: सिमलावदा (रतलाम)। मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के सातरुंडा में विराजित है कंवलका माता की मूर्ति। वन विभाग के 256 हेक्टेयर भूमि में फैली करीब पांच सौ गज ऊंचे पहाड़ पर स्थित है मातारानी का यह मंदिर। यह मंदिर बिना नींव के पहाड़ी पर बना हुआ है। मंदिर निर्माण में उपयोग हुए शिलाएं एक के ऊपर एक रखी हुई हैं। इनके जोड़ के लिए किसी प्रकार का पदार्थ उपयोग में नहीं लिया गया है।

कोरोना के चलते भक्तों के लिए मंदिर बंद कर दिया गया था। केवल मंदिर पुजारी द्वारा ही माता की पूजाअर्चना की जाती थी। यहां शारदीय व चैत्र नवरात्र के अलावा वर्षभर भक्तों का आनाजाना लगा रहता है।

इतिहास

इस मंदिर का इतिहास द्वापरकालीन है। पांडवों के अज्ञातवास के दौरान इस क्षेत्र में महाबली भीम द्वारा अपनी गुम हुई गाय की खोज के लिए इस पहाड़ी का निर्माण किया गया था। इस पहाड़ पर चढ़कर भीम को अपनी गाय मांडू में दिखाई दी थी। कहा जाता है कि इसके बाद पांडवों द्वारा कंवलका माता मंदिर को अन्य जगह से उड़ाकर लाया गया व यहां पर माता की स्थापना की गई। संवत 1171 में उत्तमगिरी द्वारा कंवलका माता की आराधनातपस्या वटवृक्ष पर उल्टा लटक कर की गई। इसके बाद उन्हें माता की सेवा का सौभाग्य मिला था। यह वटवृक्ष आज भी यहां स्थित है।

यह भी है खास

संतान प्राप्ति के लिए निसंतान दंपतियों द्वारा मंदिर की दीवार पर उल्टा स्वस्तिक बनाकर मन्नत मांगी जाती है।। मन्नात पूरी होने पर दंपती द्वारा मंदिर पर सीधा स्वस्तिक बनाया जाता है।

सातरुंडा कंवलका माता जी को भक्तों द्वारा मदिरा पान कराया जाता है।

प्रतिवर्ष हरियाली अमावस्या पर यहां मेला लगता है। इसमें प्रदेश के कई जिलों के अलावा राजस्थान, गुजरात से भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं।

नवरात्र में मंदिर के पुजारियों द्वारा एक दिवसीय यज्ञ का आयोजन किया जाता है।

करीब पांच गज की पहाड़ी पर कंवलका माता के दर्शन के लिए जाने हेतु 350 सीढ़िया बनाई गई है।

पहाड़ी पर स्थित मंदिर पर जाने के लिए वर्तमान के सिंगल रोड कच्चे रास्ते का निर्माण भी किया गया है।

जिला प्रशासन ने सातरुंडा कंवलका माता मंदिर को ग्रामीण पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना भी बनाई है।

मंदिर के पुजारी रामेशगिरी गोस्वामी व अमितगिरी गोस्वामी ने बताया कि माता के चमत्कार व प्रसिद्धि आसपास के जिलों के अलावा कई प्रदेशों में भी है। भक्त दूरदूर से मनोकामनाएं लेकर माता के दरबार में आते हैं और कंवलका माता सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। नवरात्र के चलते प्रतिदिन शाम को माता का आकर्षक श्रंगार किया जा रहा है। नवरात्र के चलते भक्तों के दर्शन की चलित व्यवस्था की गई है। कोविड19 नियमों का पालन किया जा रहा है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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