
नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम : खरीफ सीजन की प्रमुख पीला सोना कहे जाने वाली सोयाबीन की कटाई शुरू होते ही जिले में श्रमिकों के पलायन के साथ ओवरलोड वाहनों का खतरा भी बढ़ गया है। रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में श्रमिक सोयाबीन कटाई के लिए मालवा के विभिन्न क्षेत्रों में जा रहे हैं, वहीं मूंगफली निकालने के लिए राजस्थान की ओर भी श्रमिकों का पलायन हो रहा है।
वाहनों में क्षमता से तीन से चार गुना अधिक सवारियां बैठाई जा रही हैं। कई श्रमिक छत, पायदान और अन्य हिस्सों पर लटककर जान जोखिम में डालकर यात्रा कर रहे हैं। अंचल से ऐसे वाहन बिना रोक-टोक फर्राटे भर रहे हैं। इससे हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है।

सैलाना के बोदीना बायपास पर वाहनों से आए मजदूर। -नितेश राठौड़
मध्यप्रदेश देश में सोयाबीन उत्पादन का प्रमुख राज्य है। इंदौर, उज्जैन, धार, देवास, सीहोर, शाजापुर, राजगढ़, रतलाम, मंदसौर, नीमच, हरदा और विदिशा सहित कई जिलों में खरीफ में बड़े पैमाने पर इसकी खेती होती है। रतलाम जिले में इस वर्ष करीब सवा तीन लाख हेक्टेयर में खरीफ बोवनी हुई है।
इसमें 2.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में केवल सोयाबीन बोई गई है। वर्षा की कमी के कारण इस बार सोयाबीन की कटाई समय से पहले शुरू हो गई है। कटाई शुरू होते ही श्रमिकों का अन्यत्र जाना भी तेज हो गया है।
पलायन का असर आदिवासी अंचल के गांवों में साफ दिखाई दे रहा है। गांव-गांव घरों में बुजुर्ग और एक-दो बच्चे ही रह गए हैं। इससे विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति भी कम हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार वर्षा कम होने और पंचायतों में रोजगार के काम नहीं मिलने से इस बार पलायन अधिक है। खेती में पानी नहीं होने से फसलें भी न के बराबर रहने की आशंका है। जो परिवार अब तक नहीं गए थे, वे अनंत चतुर्दशी पर्व मनाने के बाद काम की तलाश में निकल जाएंगे। ऐसे में श्रमिकों की आवाजाही और ओवरलोड वाहनों पर निगरानी की जरूरत बढ़ गई है।
सैलाना : सोयाबीन कटाई शुरू होते ही आदिवासी अंचल से बड़ी संख्या में मजदूर सैलाना पहुंचने लगे हैं। सुबह सात से 8:30 बजे तक पिपलौदा और बोदीना बायपास पर मजदूरों का जमावड़ा रहता है। किसान यहीं से मजदूरों को कटाई सहित अन्य कृषि कार्यों के लिए ले जाते हैं। भीड़ के कारण कई बार जाम की स्थिति बनती है। बायपास बनने से पहले मजदूर राजवाड़ा चौक पर जुटते थे, अब वहां संख्या कम है।
बाजना/सरवन : आदिवासी अंचल में एक सप्ताह से ग्रामीण सोयाबीन कटाई के लिए मालवा और मूंगफली निकालने राजस्थान की ओर जा रहे हैं। इससे गांवों में घरों पर बुजुर्ग या एक-दो बच्चे ही रह गए हैं और विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति कम हो गई है। वर्षा कम होने और पंचायतों में काम नहीं मिलने से पलायन बढ़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि खेती में पानी नहीं होने से फसलें नहीं के बराबर रहेंगी। जो परिवार नहीं गए हैं, वे अनंत चतुर्दशी मनाकर काम पर निकल जाएंगे।
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