
रीवा। जिले में इन दिनों बुखार व उल्टी दस्त में कई परिवारों को पस्त कर दिया है। इतना ही नहीं रहस्मयी बुखार से एक परिवार में मातम छा गया है। इस रहस्यमय बुखार ने जिला पंचायत सदस्य की दो बेटियां एवं पति को निगल लिया है। वहीं एक आदिवासी परिवार के एक दर्जन लोग उल्टी, दस्त से पस्त होकर अस्पताल में भर्ती हुए हैं। आशंका जताई जा रही है कि हैजा, कालरा जैसी बीमारी ने तो कहीं दस्तक नहीं दे दी।
जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग को सचेत रहने की जरूरत है। जिलेभर में स्वास्थ्य केन्द्र तो संचालित हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऐसी बीमारियों के पूर्व निपटने के लिए न तो कोई योजना बनाई जाती और न ही शिविर लगाकर समय से पूर्व लोगों को दवाईयां दी जाती हैं।
बड़ा गांव में मातम
जिले के त्योंथर क्षेत्र में स्थित बड़ा गांव में इन दिनों रहस्मय बुखार से मातम छा गया है। मिली जानकारी के मुताबिक इस बुखार से जिला पंचायत सदस्य आशा आदिवासी के पति श्यामबिहारी आदिवासी एवं उनकी दो पुत्रियों की मौत होना बताया जा रहा है। आशा आदिवासी जहां जिला पंचायत सदस्य है तो वहीं उनके पति श्यामबिहारी आदिवासी त्योंथर भाजपा झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ मंडल के अध्यक्ष थे। सूत्रों के अनुसार जिला पंचायत सदस्य आशा आदिवासी की दोनों बेटियां गत 12 अगस्त को बुखार से पीड़ित हो गई। स्थानीय स्तर पर इलाज कराने के बाद वे बेटियों को त्योंथर और चाकघाट अस्पताल भी ले गई। लेकिन हालात में सुधार नहीं हुआ और 13 अगस्त को उनकी बड़ी बेटी की मौत हो गई। जबकि 24 घंटे के भीतर ही 14 अगस्त को उनकी छोटे बेटी ने भी बुखार से दम तोड़ दिया। इसी दौरान उनके पति श्यामबिहारी आदिवासी को भी बुखार ने जकड़ लिया और उनकी हालत बिगड़ने पर चाकघाट अस्पताल ले जाया गया। सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने उन्हें इलाहाबाद के लिए रेफर कर दिया। जहां सरदार पटेल अस्पताल इलाहाबाद में उपचार के दौरान 17 अगस्त को श्यामबिहारी आदिवासी की भी मौत हो गई।
भय के साए में ग्रामीण
ग्रामीणोंके मुताबिक श्यामबिहारी आदिवासी और उसकी पुत्रियों को बुखार आने के बाद शरीर लाल पड़ गया था और तीनों की हालत देखते ही देखते बिगड़ गई थी और यह बुखार उनकी मौत का कारण बन गई। तो वहीं बड़ा गांव में कई अन्य लोग इसी तरह की बुखार से पीड़ित हैं। जिसके चलते ग्रामीणों में अब मौत का भय सताने लगा है।
गुहिया गांव में बीमारी की दस्तक
बैकुण्ठपुर थाना अंतर्गत ग्राम गुहिया बगढ़ा गांव में भी उल्टी, दस्त व बुखार ने दस्तक दे दी है और इस बीमारी से आदिवासी परिवार के एक दर्जन लोग बीमार हो गए हैं। जिन्हें सिरमौर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में ले जाया गया। हालत बिगड़ने पर कुछ मरीजों को संजय गांधी अस्पताल रेफर किया गया है। जिनमें से रमेश कोल पुत्र सूरज कोल उम्र 38 वर्ष, छेदी कोल, लाल कोल, 5 वर्षीय गुड्डी कोल, ज्ञानेन्द्र कोल को उपचार के लिए रीवा अस्पताल लाया गया है। जबकि अन्य बीमारों का उपचार सिरमौर में किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि सभी बीमार आदिवासी एक ही परिवार के हैं और वे उल्टी, दस्त एवं बुखार से पीड़ित हैं। आशंका जताई जा रही है कि बड़ा गांव जैसी घटना कहीं गुहिया, बगढ़ा गांव में भी तो कहीं न हो जाए।
वर्जन
मैं बहुत व्यस्त हूं। गांव ही जा रहा हूं। मुझसे कृपया कोई बात न करें। कैसी बुखार, कैसी बीमारी मैं नहीं जानता। मेरी टीम इस संबंध में बताएगी।
डॉ. आईएम शर्मा
मुख्य चिकित्सा अधिकारी, रीवा