
नीलांबुज पांडे, नईदुनिया, सीधी। सूर्या ने जो किया, उसने वन विभाग के अधिकारियों से लेकर मैदान में डटे वनकर्मियों तक को हैरान कर दिया। संजय टाइगर रिजर्व के हाथी रेस्क्यू प्रभारी अर्पित मेराल रेंजर व्यौहारी, कैलाश बामनिया रेंजर वस्तुआ ड्रोन प्रभारी की मैदान में डटे रहे।
दरअसल, जंगल में घूम रहा नर हाथी पिछले कई दिनों से गुस्से में था। बताया जा रहा है कि करंट लगने से उसकी साथी मादा हाथी की मौत हो गई थी। साथी की मौत के बाद से उसका स्वभाव आक्रामक हो गया था।
वह गांव की ओर आकर खेतों में लगी फसलों को रौंद रहा था और घरों में तोड़फोड़ कर रहा था। ग्रामीणों में दहशत थी। वन विभाग के लिए भी उसे नियंत्रित करना चुनौती बना हुआ था।
सोमवार शाम करीब पांच बजे रेस्क्यू की अंतिम कोशिश शुरू हुई। संजय टाइगर रिजर्व के प्रशिक्षित हाथी बापू और चित्रा पहले से ही मौके पर मौजूद थे।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से विशेष तौर पर हाथी सूर्या को भी बुलाया गया था। टीम को देखते ही जंगली हाथी करीब चार किलोमीटर तक जंगल में भागता रहा। वन अमला पीछे लगा रहा, लेकिन वह हाथ नहीं आ रहा था।
तभी टीम ने रणनीति बदली। सूर्या को आगे किया गया। इसके बाद जो हुआ, वह किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था। जंगली हाथी ने जैसे ही सूर्या को देखा, वह ठिठक गया। फिर धीरे-धीरे उसके नजदीक आ गया। कुछ ही देर में दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए। सूर्या की मौजूदगी से गुस्सैल हाथी शांत हो गया। दोनों की दोस्ती हो गई।
इस दोस्ती ने ही रेस्क्यू को आसान बना दिया। दोनों हाथियों के एक-दूसरे के करीब रहने का फायदा उठाकर डॉक्टरों की टीम ने मोर्चा संभाला। पूरी टीम पहले से ही तैयार थी ताकि किसी तरह की अनहोनी न हो।
चिकित्सकों ने सावधानी से औषधि का उपयोग किया और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद हाथी को नियंत्रित कर पहाड़ से नीचे सुरक्षित स्थान पर लाया गया। वन अधिकारियों के अनुसार हाथी को बांधवगढ़ भेज दिया गया है। स्थिति अब सामान्य है।
इस रेस्क्यू अभियान का असर संजय टाइगर रिजर्व के प्रस्तावित हाथी महोत्सव पर भी पड़ा था। 21 से 26 सितंबर तक दुबरी परिक्षेत्र के खैरी झील हाथी कैंप में छह दिवसीय कैंप प्रस्तावित था। यह कैंप हाथियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता, जहां चारों प्रशिक्षित हाथी बापू, भरत, चित्रा और शांभवी की टस्क ट्रिमिंग, नाखून कटिंग, स्वास्थ्य जांच, ब्लड सैंपल और पौष्टिक आहार की विशेष व्यवस्था की जाती है।
मऊगंज में हाथी की मौत और दूसरे हाथी के आक्रामक होने के बाद संजय टाइगर रिजर्व के बापू और चित्रा को रेस्क्यू में भेजना पड़ा। अब यह रेस्क्यू के लिए मैहर चले गए हैं। इस कारण महोत्सव को फिलहाल स्थगित करना पड़ा है।
संजय टाइगर रिजर्व की चित्र और बापू रेस्क्यू में शामिल रहे। अब यह मैहर रेस्क्यू टीम में शामिल हैं। इसके साथ दो रेंजर शामिल रहे है।
हृदय लाल सिंह एसडीओ संजय टाइगर रिजर्व सीधी
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