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सिरमौर में शिक्षा की नई रोशनी, अंधेरे में जुगनू की तरह चमक रहा 'भरोसा', पांच गांवों के बच्चों का संवार रहा भविष्य

रोज 15 मिनट नैतिक शिक्षा के लिए होते हैं, जहां ईमानदारी, अनुशासन, बड़ों का सम्मान, छोटों से प्यार, सहयोग, स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे संस्कारो...और पढ़ें

By Shyam MishraEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Thu, 24 Sep 2026 11:56:38 AM (IST)Updated Date: Thu, 24 Sep 2026 12:13:23 PM (IST)
सिरमौर में शिक्षा की नई रोशनी, अंधेरे में जुगनू की तरह चमक रहा 'भरोसा', पांच गांवों के बच्चों का संवार रहा भविष्य
एक साल से पांच गांवों में निःशुल्क कोचिंग केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।

HighLights

  1. सिरमौर नगर, पड़री, खैरहन, सुरवार और दुलहरा में केंद्र चलाए जा रहे हैं
  2. बच्चों ने खुद अपने केंद्र का नाम 'जुगनू कोचिंग सेंटर' रख दिया है
  3. बच्चों को सामान्य ज्ञान, व्यवहारिक ज्ञान और जीवनोपयोगी बातें सिखाई जाती हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, रीवा। कहते हैं एक दीया अंधेरे को नहीं मिटा सकता, लेकिन कई जुगनू मिल जाएं तो पूरी रात रोशन हो जाती है। कुछ ऐसी ही रोशनी रीवा जिले के सिरमौर ब्लॉक में भरोसा सेवा समिति के 'जुगनू अभियान' ने जगाई है। आर्थिक तंगी के कारण जो बच्चे पढ़ाई से दूर हो रहे थे, अब उन्हीं के गांव में शाम को कोचिंग की घंटी बज रही है।

भरोसा सेवा समिति सिरमौर द्वारा पिछले एक वर्ष से पांच गांवों में निःशुल्क कोचिंग केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। यह कोई सामान्य ट्यूशन नहीं है, यह भरोसे की पाठशाला है। समिति के अध्यक्ष रजनीश कुशवाहा बताते हैं कि उद्देश्य सिर्फ पास कराना नहीं, बल्कि बच्चों में सीखने का भरोसा जगाना है।


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बच्चों ने खुद रखा नाम - जुगनू कोचिंग सेंटर

समिति द्वारा सिरमौर नगर, पड़री, खैरहन, सुरवार और दुलहरा में केंद्र चलाए जा रहे हैं। बच्चों और शिक्षकों के बीच इतना अपनापन है कि उन्होंने खुद अपने केंद्र का नाम 'जुगनू कोचिंग सेंटर' रख दिया। समिति का दर्शन भी यही है- जैसे घने अंधेरे में जुगनू अपनी छोटी सी रोशनी से उजाला करता है, वैसे ही हम इन जरूरतमंद बच्चों के जीवन में शिक्षा की रोशनी पहुंचाना चाहते हैं।

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किताब के साथ संस्कार की भी पढ़ाई

यहां पढ़ाई का तरीका अलग है। बच्चों को गणित, विज्ञान, हिन्दी, अंग्रेजी के साथ-साथ सामान्य ज्ञान, व्यवहारिक ज्ञान और जीवनोपयोगी बातें भी सिखाई जाती हैं। रोज 15 मिनट नैतिक शिक्षा के लिए होते हैं, जहां ईमानदारी, अनुशासन, बड़ों का सम्मान, छोटों से प्यार, सहयोग, स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे संस्कारों पर चर्चा होती है।

समिति का मानना है कि अच्छे अंक से ज्यादा जरूरी है अच्छा इंसान बनना। इन केंद्रों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे मजदूर, किसान और दिहाड़ी परिवारों से आते हैं, जो महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते थे। अब शाम होते ही ये बच्चे बस्ता लेकर जुगनू सेंटर पहुंच जाते हैं और देर तक पढ़ाई करते हैं।

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आप भी बन सकते हैं किसी का जुगनू

इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए भरोसा सेवा समिति ने समाज से हाथ मिलाने की अपील की है। समिति का कहना है कि मदद सिर्फ पैसे से नहीं होती। आप एक पुरानी किताब, कॉपी-पेन, एक घंटे का समय देकर पढ़ाकर, या अपने जीवन के अनुभव साझा करके भी किसी बच्चे का भविष्य बदल सकते हैं।समिति का संदेश साफ है - पांच गांवों से शुरू हुई यह छोटी सी रोशनी पूरे सिरमौर को रोशन कर सकती है, बस जरूरत है समाज के सहयोग की।

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