रीवा । नईदुनिया प्रतिनिधि

गत दिनों शहर के बिछिया थाना अंतर्गत लक्ष्मण बाग में स्थित बापू भवन में रखी गई गांधी जी की तस्वीर में अज्ञात असामाजिक तत्वों द्वारा राष्ट्रद्रोही लिख दिया था । जिसके बाद कांग्रेसियों के विरोध के उपरांत पुलिस ने अज्ञात लोगों के विरुद्घ राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी थी । उक्त मामला जहां पुलिस के लिए चुनौती बना है । वहीं मंदिर के पुजारियों के लिए किसी आफत से कम नहीं है । रविवार की सुबह मौके का निरीक्षण करने पहुंचे आईजी के सामने पुजारियों का दर्द छलक पड़ा। पुजारी आई जी को बता रहे थे कि पुलिस बार-बार उन्हें बेवजह परेशान कर रही है। प्रत्येक दिन बुलाकर उन्हें सादे पन्ने में राष्ट्रद्रोही लिखने के लिए मजबूर किया जा रहा है, हालांकि मौके पर उपस्थित बिछिया थाना प्रभारी उक्त कार्रवाई के पीछे राइटिंग सैंपल लेने की बात कह रहे हैं। मौके पर उपस्थित आई जी चंचल शेखर ने पुजारियों को विश्वास दिलाया कि उनके साथ अन्याय नहीं होगा, हालाकी 2 घंटे चले निरीक्षण के बाद भी एक बार पुनः नगर कांग्रेस अध्यक्ष गुरमीत सिंह मंगू के उस आवेदन पर सवालिया निशान लग गए हैं। जिसमें उन्होंने गांधीजी के अस्थि कलश चोरी होने की शिकायत पुलिस को की थी । हालांकि मौके पर लिए गए पांच पंडितों के बयान के आधार पर यह सिद्घ होता नजर आ रहा है कि अस्थि कलश चोरी जाने की घटना पूरे तरह गलत है। जब कलश था ही नहीं तो चोरी जाने का प्रश्न ही नहीं उठता।

क्या था मामलाः बता दें कि बीते दिनो अज्ञात असामाजिक तत्वों द्वारा शहर के लक्ष्मण बाग स्थित बापू भवन में रखी हुई गांधी की तस्वीर पर राष्ट्रद्रोही शब्द लिख दिया था । जिसके बाद 2 अक्टूबर को कांग्रेस के पदाधिकारियों द्वारा प्रदर्शन किया गया। बल्कि एसपी व कलेक्टर से बात करके बिछिया थाने में अज्ञात लोगों के विरुद्घ राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज करा दिया गया था। उक्त कयमी को अभी 2 घंटे भी नहीं बीते थे कि शहर कांग्रेस अध्यक्ष गुरमीत सिंह बिछिया थाना प्रभारी को एक पत्र देकर महात्मा गांधी की अस्थि कलश चोरी होने का आरोप लगा दिया। जिसके बाद से ही पुलिस विभाग हरकत में आ गया था, हालांकि पुजारियों की माने तो महात्मा गांधी का अस्थि कलश उक्त भवन में था ही नहीं, हालाकी कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी द्वारा लगाए गए आरोप और सरकार के दबाव के बीच पुलिस में आवेदन पत्र लेकर मामले की जांच शुरू करने की बात कही थी लेकिन पुलिस अधिकारी लगातार यह कह रहे थे कि कायमी के बाद से लगाए गए आरोप निराधार हैं।

1970 शताब्दी समारोहः लक्ष्मण बाग मंदिर के पूजा पाठ प्रभारी एवं पुजारी दीनानाथ शास्त्री बताते हैं वह विगत 40 वर्षों से लक्ष्मण बाग की सेवा में जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि गांधीजी का अस्थि कलश वहां रखा गया था जिसके बाद श्रद्घांजलि अर्पित होने के बाद कलश वापस इलाहाबाद चला गया था।

अब रहते हैं पुलिस वालेः कार्यपालन अधिकारी के तौर पर पदस्थ डायरेक्टर सामाजिक न्याय विभाग के अनिल दुबे ने बताया कि कि गांधी भवन में पहले वैष्णो संस्कृत महाविद्यालय चला करता था हालाकि बाद में उसके बंद होने पर संस्कृत विद्यापीठ द्वारा कार्यालय खोलकर बच्चों को संस्कृत पढ़ाने का कार्य किया जा रहा था। 2004 में संस्कृत विद्यापीठ भी बंद हो गई। वर्तमान में वहां के सुरक्षा गार्ड के रहने के लिए ताला खोल दिया गया। इनसे हो रही पूछताछः रविवार की सुबह जैसे ही लक्ष्मण बाग रीवा रेंज के आईजी चंचल शेखर पहुंचे उस समय मंदिर में तैनात कुल 16 पुजारियों में से 5 पुजारियों ने अपनी बात उनके सामने रखी।

होगी निष्पक्ष जांचः रविवार की सुबह मौके का निरीक्षण करने पहुंचे रीवा रेंज के आईजी चंचल शेखर एवं डीआईजी अविनाश शर्मा ने आश्वस्त किया है कि निष्पक्ष जांच होगी ।

किसी निर्दोष को फंसाने का उद्देश्य पुलिस का नहीं होता है, लिहाजा आप लोग धैर्य रखें आपके विरुद्घ कार्रवाई नहीं होगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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