
नईदुनिया प्रतिनिघि, रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में दो प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के खिलाफ जल सत्याग्रह कर रही एक आदिवासी महिला की बीमार पड़ने के बाद कथित तौर पर मौत हो गई। स्थानीय खबरों के अनुसार, महिला ने अन्य लोगों के साथ मिलकर अपना सांकेतिक विरोध जारी रखा और वे सभी गांव के तालाब में ही डटे रहे।
महिला के पति और बेटे के साथ-साथ जिला प्रशासन ने इस दावे को खारिज कर दिया और जोर देकर कहा कि न तो उसने जल सत्याग्रह में हिस्सा लिया था और न ही उसकी मौत का इससे कोई लेना-देना था।
मृतक महिला के पति ने बताया कि बुधवार शाम को जल सत्याग्रह में शामिल होने के बाद वह घर लौट आई थीं। जल सत्याग्रह के दौरान महिला की मौत नहीं हुई है। वह स्वाभाविक तौर पर सुबह शौच के लिए गई थी, जिसके बाद उसकी मौत हुई। रिपोर्टों के अनुसार, सराय की रहने वाली विमला कोल चार दिनों से विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रही थीं।
प्रस्तावित परियोजना में 220 मेगावाट के दो परमाणु ऊर्जा संयंत्र शामिल हैं, जिन पर अनुमानित 28,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा। पास के लालगांव के निवासियों ने भी शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने जमीन, पानी, जनस्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर अपनी चिंताएं जताईं। जिला प्रशासन के अनुसार, यह परियोजना अभी शुरुआती मूल्यांकन के चरण में है और अब तक इसके लिए कोई जमीन आवंटित नहीं की गई है।
रीवा के कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने बताया, "मामला हमारे संज्ञान में आने के बाद हमने रिपोर्ट मांगी। हमने जांच की और पाया कि महिला न तो विरोध प्रदर्शन में शामिल थी और न ही उसकी मौत इसकी वजह से हुई। इसके अलावा, प्रस्तावित संयंत्रों पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है, क्योंकि फिलहाल साइट पर केवल व्यवहार्यता अध्ययन किया जा रहा है।"
सूत्रों ने बताया कि सराय कला पंचायत में शुरुआत में 220 मेगावाट की दो परमाणु इकाइयां लगाने का प्रस्ताव था, जिसके लिए लगभग 506 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होती। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि अभी केवल शुरुआती जांच चल रही है और अभी तक कोई जमीन अधिग्रहित नहीं की गई है।