
नईदुनिया प्रतिनिधि, रीवा। विंध्य की सियासी राजधानी रीवा आज एक बार फिर रणक्षेत्र में तब्दील हो गई। कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत के बाद उपजा आक्रोश आज ''न्याय सत्याग्रह'' के रूप में सड़कों पर फूट पड़ा। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के रीवा पहुंचते ही ठंडा पड़ रहा आंदोलन अचानक आग का गोला बन गया और सीधा उप-मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के बंगले तक जा पहुंचा।
पिछले कई दिनों से अग्रसेन चौराहे पर शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा धरना गुरुवार दोपहर बाद उस वक्त उग्र हो गया, जब मंच से जीतू पटवारी ने तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने कल्पना मिश्रा के पिता की 9 दिन से जारी भूख हड़ताल और स्वास्थ्य मंत्री की चुप्पी को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला। बस, उनके भाषण के बाद कार्यकर्ताओं में ऐसा जोश भरा कि हजारों की भीड़ ने धरना स्थल से ही स्वास्थ्य मंत्री के आवास घेराव का ऐलान कर दिया।
धरने का नेतृत्व कर रहे युवा विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया के नेतृत्व में हजारों कांग्रेसी कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए स्वास्थ्य मंत्री के बंगले की ओर बढ़ने लगे। लेकिन पुलिस खुफिया तंत्र पहले से ही अलर्ट था। रसिया मोहल्ला के पास पुलिस ने तीन लेयर की बैरिकेडिंग, बांस-बल्ली और भारी पुलिस बल के साथ मोर्चा संभाल लिया था।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और सीएसपी सहित कई थानों का बल मौके पर तैनात था। जैसे ही कांग्रेसियों का जत्था रसिया मोहल्ला पहुंचा, पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। पहले समझाइश, फिर तीखी नोकझोंक और देखते ही देखते धक्का-मुक्की और झड़प शुरू हो गई। कार्यकर्ता बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने पर अड़े थे, जबकि पुलिस किसी भी हालत में उन्हें मंत्री के बंगले तक नहीं पहुंचने देना चाहती थी।
भीड़ जब बेकाबू होने लगी तो पुलिस ने पहला हथियार वाटर कैनन को बनाया। प्रदर्शनकारियों पर पानी की तेज बौछारें मारी गईं, जिससे कई कार्यकर्ता गिर पड़े, लेकिन भीड़ पीछे हटने को तैयार नहीं थी। इसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए आंसू गैस के गोले दागने शुरू कर दिए।पुलिस ने रसिया मोहल्ला और मुख्य बाजार इलाके में एक के बाद एक 10 से 12 आंसू गैस के गोले छोड़े।
गोलों से निकले जहरीले धुएं से पूरा बाजार धुंध में घिर गया। इसका असर सिर्फ कांग्रेसियों पर ही नहीं, बल्कि वहां मौजूद आम दुकानदारों, महिलाओं और राहगीरों पर भी पड़ा। लोगों की आंखों में तेज जलन होने लगी, आंखों से लगातार आंसू निकलने लगे और सांस लेना भी मुश्किल हो गया। देखते ही देखते मुख्य बाजार में भगदड़ मच गई। दुकानदार शटर गिराकर भागने लगे और राहगीर इधर-उधर छिपने लगे। करीब 20 मिनट तक पूरा इलाका युद्ध के मैदान जैसा नजर आया।
हंगामे के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ा और कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया। हिरासत में लिए गए नेताओं में कई पूर्व विधायक और जिला पदाधिकारी भी शामिल हैं।फिलहाल रसिया मोहल्ला से लेकर स्वास्थ्य मंत्री के बंगले तक भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और तनाव की स्थिति बनी हुई है।
दरअसल यह पूरा बवाल रीवा के संजय गांधी अस्पताल में कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के बाद शुरू हुआ है। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही ने जच्चा-बच्चा दोनों की जान ले ली। इसी मामले में कल्पना के पिता पिछले 9 दिनों से सिरमौर चौराहे पर भूख हड़ताल पर हैं, जिनकी हालत अब बेहद नाजुक है और वे लेटकर अनशन कर रहे हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और इसके सीधे जिम्मेदार स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल हैं। कांग्रेस लगातार स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है। आज जीतू पटवारी के आने के बाद इस आंदोलन ने अब आर-पार की लड़ाई का रूप ले लिया है।
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