
नईदुनिया प्रतिनिधि,रीवा। रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की मौत का मामला अब पूरी तरह से राजनीतिक तूल पकड़ चुका है। इस दर्दनाक घटना को लेकर जहां एक तरफ पीड़ित परिवार न्याय के लिए अनशन पर बैठा है, वहीं दूसरी तरफ छात्र संगठन एनएसयूआई ने मोर्चा खोल दिया है।
दरअसल आज रीवा में स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब एनएसयूआई छात्र संगठन के जिला अध्यक्ष पंकज उपाध्याय के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ता श्याम शाह मेडिकल कॉलेज पहुंचे। छात्र प्रसूता की मौत के विरोध में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल को चूड़ियां भेंट करने जा रहे थे।
एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल को इस दोहरी मौत का मुख्य जिम्मेदार ठहराया है। छात्रों का आरोप है कि अस्पताल में वरिष्ठ डॉक्टरों की घोर लापरवाही के कारण एक हंसता-खेलता परिवार तबाह हो गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने प्रारंभिक तौर पर दो डॉक्टरों, दो नर्सों को निलंबित कर दिया है और तत्कालीन अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को भी पद से हटा दिया गया है। लेकिन एनएसयूआई का कहना है कि सिर्फ छोटे कर्मचारियों या अधीक्षक को हटाना काफी नहीं है।
संगठन ने मांग की है कि डीन सुनील अग्रवाल तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें और दोषी डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज की जाए।एनएसयूआई के उग्र प्रदर्शन के दौरान एक समय स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी। छात्र इस बात से भी नाराज थे कि उनका ज्ञापन पत्र लेने के लिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से कोई भी जिम्मेदार अधिकारी सामने नहीं आया। इसके बाद मौके पर मौजूद प्रशासनिक तंत्र की ओर से नायब तहसीलदार यतीश शुक्ला ने कमान संभाली।
उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की, उनकी गंभीर समस्याओं और मांगों को सुना और अंततः छात्रों से ज्ञापन पत्र लिया।बता दे की यह पूरा मामला अब मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के गृह जिले का होने के कारण राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। विभिन्न सामाजिक संगठन और नागरिक भी अब पीड़ित परिवार के समर्थन में उतर आए हैं, जिससे प्रशासन पर निष्पक्ष कार्रवाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
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