-नौरादेही, उत्तर और दक्षिण वन मंडल में है जिले का वन क्षेत्र

-आदर्श भूभाग मे शामिल होने के लिए तकरीबन साढ़े तीन लाख वर्ग किमी वन क्षेत्र की आवश्यकता

हरवेंद्र सिंह ठाकुर, सागर। यूं तो सागर पहाड़ियों और वनों से घिरा हुआ है और हरियाली की एक पेंटिंग नजर आता है, नौरादेही अभयारण्य इसकी हरियाली में चार चांद लगाता है, लेकिन आदर्श भूभाग बनने से काफी पीछे है। सागर जिले को इस आदर्श की परिभाषा में शामिल होने के लिए तकरीबन साढ़े तीन लाख वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र की आवश्यकता है, जबकि फिलहाल यहां पौने तीन लाख वर्ग किमी के आसपास ही वनाच्छादित क्षेत्र है। साढ़े 27 हजार वर्ग किमी की हरियाली हम और रोप लें और उन्हें वन में तब्दील कर लें, तो हमारी धरती के चेहरे पर आदर्श मुस्कान आएगी।

फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के अनुसार, सागर जिले का कुल क्षेत्रफल 10, 252 वर्ग किलोमीटर है। आदर्श भूभाग में शामिल होने के लिए एक तिहाई भूमि में अर्थात 3, 417.33 वर्ग किमी में वन क्षेत्र होना चाहिए। जबकि उत्तर व दक्षिण वन मंडल और नौरादेही अभयारण्य मिलाकर कुल 2,794.54 वर्ग किमी जंगल ही है। इसमें से 1,141.57 वर्ग किमी मध्यम घना वन क्षेत्र है, जबकि 1,651.97 वर्ग किमी खुले वन में आता है।

नौरादेही अभयारण्य में सर्वाधिक वनाच्छादित क्षेत्र

आश्चर्यजनक है कि सागर जिले में केवल एक वर्ग किमी का हिस्सा ही अत्यधिक घने वन की श्रेणी में आता है। यह हिस्सा नौरादेही अभयारण्य में है। जिले में 27.26 वर्ग किमी में घास लगी हुई है और 197.17 वर्ग किमी में झाड़ी है। उत्तर और दक्षिण वन मंडल में पठारीय क्षेत्र अधिक है और यहां खुला वन भी ज्यादा है। नौरादेही अभयारण्य में वनाच्छादित क्षेत्र सर्वाधिक है।

जिले में वन की स्थिति

-10, 252 वर्ग किमी है सागर का कुल क्षेत्रफल

-3, 417.33 वर्ग किमी वन क्षेत्र होना चाहिए

-1.00 वर्ग किमी में अत्यधिक घना वन

-1, 141.57 वर्ग किमी में मध्यम घना वन

-1, 651.97 वर्ग किमी खुला वन

- 2, 794.54 वर्ग किमी कुल जंगल

- 2,762.79 वर्ग किमी जंगल आदर्श भूभाग में कम

- 27.26 वर्ग किमी में घास

- 197.17 वर्ग किमी में झाड़ी

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क्या कहते हैं पर्यावरणविद

संयुक्त प्रयासों से बचेंगे वन

सागर जिला मध्यप्रदेश के मध्य में स्थित एक विकासशील जिला है। पर्यावरण के प्रति जागरूकता का अभाव तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रसोई में आज भी लकड़ी का बहुतायत प्रयोग भी पर्यावरण का संकट खड़ा करती है। विश्वविद्यालय परिसर में ही वृक्षों के आसपास के लोगो के द्वारा दैनिक घरेलू उपयोग के लिए कटाई की जाती रही है। शासन और समाज के संयुक्त प्रयासों से सघन वृक्षारोपण कार्यक्रम के माध्यम से सागर जिले के प्राकृतिक वातावरण में सुधार लाया जा सकता है।

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-प्रो. सुबोध पाण्डेय, डॉ. हरीसिंह गौर विवि, सागर

बंजर व पठारी क्षेत्र में वन की जरूरत

सागर बुंदेलखंड क्षेत्र का प्रमुख शहर है। बुंदेलखंड भौगोलिक परिस्थितियों से घिरा है। कोई बड़ी नदी या कोई जलस्रोत नहीं है। बहुत बड़ा क्षेत्र ऐसा है जो बंजर व पठारी क्षेत्र है। जिले का बहुत बड़ा इलाका दमोह-पन्ना के पठार पर आता है। इन पठारों पर पौधारोपण न होने से बारिश का जल बह जाता है, इससे भू-जल स्तर नहीं बढ़ता। अगर पठारी क्षेत्र पर सघन पौधारोपण किया जाए तो भू-जल स्तर बढ़ाने में सहायक होगा। गर्मियों में 45 डिग्री तक तापमान होता है। बोरबेल की औसतन गहराई 400 से 500 फीट है। इससे कृषि क्षेत्र में उपज की लागत बढ़ जाती है।

- डॉ. कमलेश समदरिया, शासकीय महाविद्यालय, मकरोनिया

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पौधे लगाने की योजना जरूरी

वृक्षों की अहमियत तो सभी जगह है। वृक्ष ऑक्सीजन देने के साथ सुंदरता बढ़ाते हैं। आंखों को सुकून देता है। योजना पूर्वक पौधारोपण होना चाहिए। भविष्य की मुश्किलों को देखते हुए मकान की तरह पौधे लगाने की भी प्लानिंग करनी पड़ेगी। इसमें किस प्रजाति के पौधे लगाए जाएं तथा उनकी क्या दूरी हो, इत्यादि बातों का ध्यान रखना होगा। जिले का एक बड़ा हिस्सा पठारीय है, उसे वनस्पति विशेषज्ञों के माध्यम से हरा भरा बनाया जा सकता है। वहां कौन से पौधे, कितने समय में व क्या आकार ले सकते हैं, इस पर काम होते ही पठारीय हिस्सा हरा-भरा हो सकता है।

- डॉ. अमर जैन, कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, सागर

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वृक्षों की अहमियत पूरी पृथ्वी के लिए बहुत जरूरी है। वृक्षों के बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं है। मैं अपनी कविता के माध्यम से बताना चाहूंगा कि वृक्ष बिना संभव नहीं, जीवन का कोई काम। रोटी, कपड़ा, दें ये, ये ही दें मकान। क्या बचपन का पालना, क्या शादी की डोल। क्या बूढ़ों की लाठियां, वृक्ष बिना है बोल। क्या संभव है कर्म कोई, वृक्षन बिना विचार। अंत समय भी अर्थियां, यही लगाएं पार। वृक्ष संत के रूप हैं, सदा करें उपकार। देते हैं आशीष फल, मांगे थोड़ा प्यार।

- अवधेश कुमार नेमा, कृषि उपसंचालक, सागर

Posted By: Nai Dunia News Network

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