
विष्णु कुमार सोनी, नईदुनिया, सागर। मध्य प्रदेश पुलिस का ऐसा कारनामा सामने आया है, जिससे हाई कोर्ट भी हैरान है। पुलिस अधिकारियों को जवाब देते नहीं बन रहा। सागर जिले के मोतीनगर थाना पुलिस ने हत्या के प्रयास के एक अपराध में आरोपित की गिरफ्तारी के समय जिस चाकू की बरामदगी दिखाई, वह स्वयं नाली में रखा। बगल की दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में उनकी यह हरकत कैद हो गई। इसकी पुलिसकर्मियों को भनक भी नहीं हुई। उन्हें भी तब पता लगा, जब कुछ दिन बाद जमानत पर छूटे आरोपित ने हाई कोर्ट के सामने सीसीटीवी के फुटेज रखे।
यह हरकत करने वाले उपनिरीक्षक व आरक्षक को निलंबित कर दिया गया है। मामला सागर जिले के मोतीनगर थाना क्षेत्र के इतवारी टौरी का है। प्रियांशु रजक की शिकायत पर पुलिस ने रज्जू उर्फ सुंदर साहू और उसके तीन स्वजन पर चाकू से जानलेवा हमला करने की एफआईआर दर्ज की थी। रज्जू ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए घटना के समय बाघराज मंदिर में मौजूद होने के सीसीटीवी फुटेज पुलिस को दिए, लेकिन उसका नाम नहीं हटाया गया।
20 मई को पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और रिपोर्ट में उसकी निशानदेही पर हमले में प्रयुक्त चाकू नाली से बरामद दिखाया। कुछ दिन बाद जमानत पर बाहर आए रज्जू ने एक दुकान के सीसीटीवी में बरामदगी के समय का फुटेज देखा तो उसमें साफ दिख रहा है कि एक आरक्षक दो आरोपितों को लेकर आता है।
उसके बाद उपनिरीक्षक अपने पास रखा चाकू नाली में डालते हैं, फिर आरक्षक से कैमरे में रिकॉर्ड करने को कहते हैं। आरोपितों का नाम पूछकर उनमें से एक से नाली में रखा चाकू निकलवाते हैं।
इसके बाद पुलिस दोनों आरोपितों को चाकू के साथ ले जाती है। आरोपित रज्जू ने इस फुटेज के साथ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया से जवाब मांगा। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद विवेचक एसआइ लोकेश पटेल और आरक्षक दिनेश अहिरवार को निलंबित कर दिया गया। मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है।