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बदल जाएगी सागर के एरण की सूरत! केंद्र सरकार की योजना से बनेगा 'लिविंग कल्चरल स्पेस', Tourists को मिलेगा अनोखा अनुभव

मध्य प्रदेश के सागर जिले (बीना) में स्थित प्राचीन और पुरातात्विक स्थल 'एरण' का जल्द कायाकल्प होने जा रहा है। केंद्र सरकार की योजना के तहत देश के 15 सब...और पढ़ें

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Fri, 18 Sep 2026 11:32:34 AM (IST)Updated Date: Fri, 18 Sep 2026 11:32:34 AM (IST)
बदल जाएगी सागर के एरण की सूरत! केंद्र सरकार की योजना से बनेगा 'लिविंग कल्चरल स्पेस', Tourists को मिलेगा अनोखा अनुभव
सागर जिले के ऐतिहासिक एरण में मूर्ति और 1,171 करोड़ के मेगा मास्टर प्लान के तहत बनने वाला ऑन-साइट म्यूजियम। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. केंद्र सरकार की योजना के तहत दे बीना का 'एरण' बनेगा लिविंग कल्चरल स्पेस
  2. एरण हड़प्पा की समकालीन ताम्र पाषाण कालीन सभ्यता का गवाह रहा है
  3. हाई-टेक म्यूजियम की सौगात: एरण में ऑन-साइट म्यूजियम और व्याख्यान केंद्र बनेगा

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के सागर जिले की सबसे प्राचीन, ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर एरण (बीना) के अब अच्छे दिन आने वाले हैं। केंद्र सरकार की योजना 'डेवलपमेंट ऑफ एक्सकैवेशन साइट्स एंड हेरिटेज कॉम्प्लेक्स' के तहत देशभर के जिन 15 सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों को चुना गया है, उनमें बीना का एरण भी शामिल है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इन 15 चुनिंदा साइटों के कायाकल्प और विकास के लिए 1,171 करोड़ का मेगा मास्टर प्लान तैयार किया है। इस भारी-भरकम बजट से एरण को एक आधुनिक और जीवंत 'लिविंग कल्चरल स्पेस' के रूप में विकसित किया जाएगा।


एरण का समृद्ध इतिहास और ऐतिहासिक महत्व

  • एरण प्राचीन काल में गुप्त साम्राज्य का एक प्रमुख सैन्य पड़ाव और देश का एक बड़ा सिक्के ढालने का केंद्र (प्राचीन टकसाल) रहा है।
  • एरण में हड़प्पा सभ्यता के समकालीन ग्रामीण ताम्र पाषाण कालीन (Chalcolithic) संस्कृति विकसित हुई थी।
  • राष्ट्रीय महत्व का यह स्थल साल तक उपेक्षा का शिकार रहा है। अब यहां स्थित प्रसिद्ध विशाल वराह मूर्ति, भगवान विष्णु की प्रतिमा और गुप्तकालीन ऐतिहासिक अभिलेखों को नए व आकर्षक कलेवर में पर्यटकों के सामने पेश किया जाएगा।

हाई-टेक म्यूजियम और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की योजना

  • ऑन-साइट हाई-टेक म्यूजियम: एरण में उत्खनन (खुदाई) के दौरान मिले प्राचीन सिक्के, मृदभांड (मिट्टी के बर्तन) और दुर्लभ मूर्तियों को सुरक्षित रखने के लिए एक अत्याधुनिक संग्रहालय तैयार किया जाएगा।
  • व्याख्यान केंद्र (Interpretation Centre): पर्यटकों और शोधकर्ताओं को एरण के इतिहास की संपूर्ण जानकारी देने के लिए एक आधुनिक व्याख्यान केंद्र का निर्माण भी होगा।

स्पेशलिस्ट की क्या राय (Expert View)

प्रो. मोहन लाल चडार (राष्ट्रीय इंदिरा गांधी जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक) के मुताबिक- मैंने एरण पर गहन शोध किया है और इसका इतिहास बेहद समृद्ध है। सिक्कों के इतिहास से लेकर हड़प्पा सभ्यता की समकालीन ताम्र पाषाण कालीन संस्कृति और गुप्तकालीन वास्तुकला तक—यहां शोधार्थियों के लिए अपार संभावनाएं हैं। केंद्र सरकार के करोड़ों रुपये के बजट से जब यहां का इंफ्रास्ट्रक्चर सुधरेगा, तो एरण वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर खजुराहो और सांची की तरह अपनी चमक बिखेरेगा।

(नोट: यह जानकारी केंद्र सरकार की heritage योजना, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट और पुरातत्व स्पेशलिस्ट के बयानों पर आधारित है।)

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